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Class 9
PHYSICS
100 kg द्रव्यमान की एक वस्तु का वेग समान...

100 kg द्रव्यमान की एक वस्तु का वेग समान त्वरण से चलते हुए 6.0 s में 5 m /s से 8 m /s हो जाता है। वस्तु के पहले और बाद में संवेगों की गणना करें । उस बल के परिमाण की गणना करें जो उस वस्तु पर आरोपित है।

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एक 5 kg द्रव्यमान वाली वस्तु पर 2s के लिये एक नियत बल कार्यरत होता है। यह वस्तु के वेग को 3m/s से बढा 7m/s कर देता है। लगाये गये बल की मात्रा ज्ञात करें

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। बाल-मस्तिष्क की प्रकृति की यह मांग होती है कि बच्चे का बौद्धिक विकास विचारों के प्रोच के पास हो। दूसरे शब्दों में, यह तोस, वास्तविक बिषों के बीच और सर्वप्रथम प्रकृति की गोद में हो. जहाँ बच्चा ठोस बिंब को देखें, सुने और फिर उसका विचार इस बिंब के बारे में प्राप्त सूचना के संसाधन के काम में लगे। जब बच्चे को प्रकृति से दूर रखा जाता है. अब बच्चा पढ़ाई के पहले दिन से ही केवल शब्दों के रूप में सारा ज्ञान और बोध पाता है, तो उसके मस्तिष्क की कोशिकाएँ जल्दी ही थक जाती हैं और अध्यापक द्वारा प्रस्तुत काम को निभा नहीं पाती और इन कोशिकाओं को तो अभी विकसित, सशक्त, सुबुढ़ होना है। यहीं पर उस बात का कारण छिपा है, जो प्राथमिक कक्षाओं में अक्सर देखने में आती है-बच्चा चुपचाप बैठा अध्यापक की आँखों में आँखें डाले देखता है, मानों बड़े ध्यान से सुन रहा हो, लेकिन वास्तव में वह एक शब्द भी नहीं समझ पाता, क्योंकि बच्चे को नियमों पर सोच विचार करना पड़ता है, और ये सब अमूर्त सामान्यीकृत बातें होती है। यहीं पर उस बात का कारण छिपा है, जो प्राथमिक _______ आती है।" वाक्य में किस बात की तरफ इशारा किया गया है?

बाल-मस्तिष्क की प्रकृति की यह माँग होती है कि बच्चे का बौद्धिक विकास विचारों के स्रोत के पास हो। दूसरे शब्दों में, यह ठोस, वास्तविक बिम्बों के बीच और सर्वप्रथम प्रकृति की गोद में हो, जहाँ बच्चा ठोस बिम्ब को देखे, सुने और फिर उसका विचार इस बिम्ब के बारे में प्राप्त सूचना के 'संसाधन' के काम में लगे। जब बच्चे को प्रकृति से दूर रखा जाता है, जब बच्चा पढ़ाई के पहले दिन से ही केवल शब्दों के रूप में सारा ज्ञान और बोध पाता है, तो उसके मस्तिष्क की कोशिकाएं जल्दी ही थक जाती है और अध्यापक द्वारा प्रस्तुत काम को निभा नहीं पाती और इन कोशिकाओं को तो अभी विकसित, सशक्त, सुदृढ़ होना है। यही पर उस बात का कारण छिपा है, जो प्राथमिक कक्षाओं में अक्सर देखने में आती है-बच्चा चुपचाप बैठा अध्यापक की आँखों में आँखें डाले देखता है, मानो बड़े ध्यान से सुन रहा हो, लेकिन वास्तव में वह एक शब्द भी नहीं समझ पाता, क्योक बच्चे को नियमों पर सोच-विचार करना पड़ता है, और ये सब अमूर्त सामान्यीकृत बातें होती हैं। “यहीं पर उस बात का कारण छिपा है, जो प्राथमिक ......... आती है।" वाक्य में किस बात की तरफ इशारा किया गया है?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये सौन्दर्य की परख अनेक प्रकार से की जाती है। बाह्य सौन्दर्य की परख समझना तथा उसकी अभिव्यक्ति करना सरल है। जय रूप के साथ चरत्रि का भी स्पर्श हो जाता है तब उसमें रसास्वादन की अनुभूति भी होती है। एक वस्तु केवल इन्द्रियों को सन्तुष्ट करती है, जबकि मनोरम वस्तु चित को भी आनन्दित करती है। इस दृष्टि से कवि जयदेव का वसन्त चित्रण सुन्दर है तथा कालिदास का प्रकृति वर्णन मनोहर है, क्योंकि उसमें चरित्र की प्रधानता है। 'सुन्दर' शब्द संकीर्ण है, जबकि 'मनोहर' व्यापक तथा विस्तृत है। साहित्य में साधारण वस्तु भी विशेष प्रतीत होती है तथा उसे मनोहर कहते हैं। सौन्दर्य की परख की जाती है