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PHYSICS
एक वस्तु दो समान्तर दर्पणों के बीच रखी ग...

एक वस्तु दो समान्तर दर्पणों के बीच रखी गई है। उत्तरोत्तर परावर्तन के कारण उसके कई प्रतिबिम्ब बनते हैं। दूर बनने वाले प्रतिबिम्बों की तीव्रता घटती जाती है। क्यों?

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In a circle two equal and parallel chords are 6 cm apart and lie on the opposite sides of the centre of the circle.If the length of each chord is 8 cm, than the radius of the circle is: एक वृत्त में दो बराबर और समान्तर जीवाएँ 6 cm के दुरी पर हैं और वृत्त के केंद्र के विपरीत भाग पर स्थित हैं। यदि प्रत्येक जीवाएँ की लंबाई 8 सेमी है, तो वृत्त की त्रिज्या है:

Two circles touch each other externally. The distance between their centres is 8 cm. If the radius of one circle is 3 cm, then the radius of the other circle is: दो वृत्त एक दूसरे को बाह्य रूप से स्पर्श करते हैं। उनके केंद्रों के बीच की दूरी 8 सेमी है। यदि एक वृत्त की त्रिज्या 3 सेमी है, तो दूसरे वृत्त की त्रिज्या है:

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये सौन्दर्य की परख अनेक प्रकार से की जाती है। बाह्य सौन्दर्य की परख समझना तथा उसकी अभिव्यक्ति करना सरल है। जय रूप के साथ चरत्रि का भी स्पर्श हो जाता है तब उसमें रसास्वादन की अनुभूति भी होती है। एक वस्तु केवल इन्द्रियों को सन्तुष्ट करती है, जबकि मनोरम वस्तु चित को भी आनन्दित करती है। इस दृष्टि से कवि जयदेव का वसन्त चित्रण सुन्दर है तथा कालिदास का प्रकृति वर्णन मनोहर है, क्योंकि उसमें चरित्र की प्रधानता है। 'सुन्दर' शब्द संकीर्ण है, जबकि 'मनोहर' व्यापक तथा विस्तृत है। साहित्य में साधारण वस्तु भी विशेष प्रतीत होती है तथा उसे मनोहर कहते हैं। सौन्दर्य की परख की जाती है

हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन नदियों को जन्म दिया है, उनमें गंगा और यमुना नाम की नदियाँ हमारे जीवन की धमनियों की तरह रही हैं। उनकी गोद में हमारे पूर्वजों ने सभ्यता के प्रांगण में अनेक नए खेल खेले। उनके तटों पर जीवन का जो प्रवाह प्रचलित हुआ, वह आज तक हमारे भूत और भावी जीवन को सींच रहा है। भारत हमारा देश है और हम उसके नागरिक हैं यह एक सच्चाई हमारे रोम-रोम में बिंधी हुई है। नदियों की अन्तर्वेदी में पनपने वाले आदि युग के जीवन पर हम अब जितना अधिक विचार करते हैं हमको अपने विकास और वृद्धि की सनातन जड़ों का पृथ्वी के साथ सम्बन्ध उतना ही अधिक घनिष्ठ जान पड़ता है। हमारे धार्मिक पर्वो पर लाखों लोग नदी और जलाशयों के तटों पर एकत्र होते हैं। पृथ्वी के एक-एक जलाशय और सरोवर को भारतीय भावना ने ठीक प्रकार से समझने का प्रयत्न किया, उनके साथ सौहार्द का भाव उत्पन्न किया जो हर एक पीढ़ी के साथ नए रूप में बंधा रहा किन्तु आज स्थिति बड़ी विचित्र और एक सीमा तक चिन्ताजनक हो गई है। हमारी औद्योगिक क्रान्ति ने इन्हें प्रदूषित कर विषैला बना दिया है। जीवनदायिनी नदियाँ आज प्राणघातिनी होती जा रही हैं। मिल-बैठकर सोचने की आवश्यकता है कि क्या करें कि ये पुनः जीवनदायिनी हों और उन सोची हुई योजनाओं को अमल में । लाने की भी आवश्यकता है। स्थिति चिन्ताजनक क्यों हो गई है?

नीना की कक्षा में बच्चे अक्सर एक संकल्पना/वस्तु/ प्राणी के लिए अलग-अलग भाषाओं के शब्द खोजते हैं। नीना ऐसा क्यों करती है?

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