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PHYSICS
दूरदर्शी एक प्रकाशीय उपकरण है जो कि अति ...

दूरदर्शी एक प्रकाशीय उपकरण है जो कि अति दूर स्थित वस्तुओं के परीक्षण में प्रयोग होता है। दो प्रकार के दूरदर्शी होते हैं, अपवर्तक व परावर्तक दूरदर्शी। अपवर्तक दूरदर्शी में दो अभिसारी लेन्स होते हैं, अभिदृश्यक एवं अभिनेत्र (नेत्रिका)।
अभिदृश्यक लेन्स वस्तु की ओर होता है। अभिदृश्यक द्वारा वस्तु का प्रतिबिम्ब अभिदृश्यक के फोकस तल में होता है। नेत्रिका की स्थिति को तब तक समायोजित किया जाता है जब तक कि प्रतिबिम्ब का निर्माण नेत्रिका के प्रथम फोकस पर नहीं हो जाता। आँखों की स्थिति नेत्रिका के निकट होती है जिससे आवर्धित प्रतिबिम्ब दिखाई देता है। यदि वस्तु का प्रतिबिम्ब अनन्त पर हो तो दूरदर्शी सामान्य समंजन की अवस्था में कहलाता है।
दूरदर्शी की आवर्धन क्षमता अधिक होगी यदि

A

अभिदृश्यक व नेत्रिका दोनों कम फोकस दूरी के हों

B

अभिदृश्यक व नेत्रिका दोनों अधिक फोकस दूरी के हों

C

अभिदृश्यक कम व नेत्रिका अधिक फोकस दूरी के हों

D

अभिदृश्यक अधिक व नेत्रिका कम फोकस दूरी के हों

लिखित उत्तर

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दूरदर्शी की आवर्धन क्षमता (यदि वस्तु अनन्त पर हो)
`M=(f_(o))/(f_(e)).(D+f_(e))/(D)`
जहाँ, D = स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी, जहाँ अन्तिम प्रतिबिम्ब निर्मित होता है |
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