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एक नली में 12 सेमी.^(3)/से. कि दर से बाल...

एक नली में 12 सेमी`.^(3)`/से. कि दर से बालू उंडेली जा रही है। उंडेली गई बालू से एक शंकु का निर्माण इस प्रकार होता है कि शंकु कि ऊंचाई सदैव आधार कि त्रिज्या का `(1)/(6)` वा भाग होती ह। बालू के शंकु कि ऊंचाई में किस गति से वृद्धि हो रही है जबकि ऊंचाई 4 सेमी. है ?

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निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। उपरोक्त गद्यांश का भावार्थ है कि कुछ साधारण से नियमों का पालन करने से

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। लेखक का मानना है कि यह एक गम्भीर गलती है

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। लेखक कहना चाहता है कि

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। निम्नलिखित में से कौन-सा वाक्य सही है?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। उपरोक्त गद्यांश का शीर्षक होगा

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में सबसे उचित विकल्प चुनिए। इस समय जनसत्त संसार के प्रत्येक देश के दरवाजे पर दस्तक दे रही है और आज वह अपने मजबूत हाथो में भारतवर्ष के दरवाजे की जंजीर भी खटखटाती हुई उसे अत्यंत प्राचीन भूमि के निवासियों से प्रश्न करती है की बतलाओ , तुम नवयुग का स्वागत किस प्रकार करना चाहते हो ? इस देश के युवको से और उन सभी प्रकार के लोगो से जो कर्मक्षेत्र में अवतीर्ण हो चुके है उसके संसार के अत्याचारों और अनाचारों की और ऊँगली उठाते हुए स्पष्ट प्रश्न है कि क्या उस समय जबकि संसार में न्याय और अन्याय का ऐसा घमासान युद्ध छिड़ा हुआ है , तुम निष्क्रिय और चुपचाप हाथ पर हाथ रखे बैठे रहना ही उचित समझते हो ? क्या उस समय जबकि राष्ट्रों के होनहार नैनिहाल केवल निकृष्ट श्रेणियों में जन्म लेने के कारण जबरदस्तों कि स्वार्थ वेदी पर बेदर्दी से बलिदान किये जा रहे है , जब केवल जाती या रंग के कारण मनुष्य मनुष्य कि गर्दन काट रहा है , तुम चुपचाप बैठे हुए इस विभीषिका को देखते रहना अपना धर्म समझते हो ? क्या उस समय जब व्यक्तियों के स्वेच्छाचारो के अंत कि घोषणा संसार भर में गूंज उठी है और स्वेच्छाचार अपनी धाक कि समाप्ति के पश्चात अब अपने जाने कि गंभीरतापूर्वक तयारी कर रहा है , तब उन घटनाओ को चुपचाप देखना ही तुम्हारा कर्तव्य है ? इनमे से किस कारणवश कुछ व्यक्तियों का बलिदान किया जा रहा है ?

A cone of radius 90 cm and A height 120 cm stands on its base. It is cut into 3 parts by 2 cuts parallel to its base such that the height of the three parts (from top to bottom) are in ratio of 1:2:3. What is the total surface area (in cm^2 ) of the middle part? एक 90 से.मी. त्रिज्या तथा ऊँचाई 120 से.मी. ऊँचाई वाला शंकु अपने आधार पर खड़ा हे। इसे आधार समांतर 2 कटाव से 3 भागों में इस प्रकार काटा जाता है कि तीनो भागों की ऊँचाई (ऊपर से नीचे को ओर) का अनुपात 1:2:3 हैं । मध्य भाग का कूल पृष्ठिय क्षेत्रफल ( सेमी ^2 में) क्या हैं?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में सबसे उचित विकल्प चुनिए। इस समय जनसत्त संसार के प्रत्येक देश के दरवाजे पर दस्तक दे रही है और आज वह अपने मजबूत हाथो में भारतवर्ष के दरवाजे की जंजीर भी खटखटाती हुई उसे अत्यंत प्राचीन भूमि के निवासियों से प्रश्न करती है की बतलाओ , तुम नवयुग का स्वागत किस प्रकार करना चाहते हो ? इस देश के युवको से और उन सभी प्रकार के लोगो से जो कर्मक्षेत्र में अवतीर्ण हो चुके है उसके संसार के अत्याचारों और अनाचारों की और ऊँगली उठाते हुए स्पष्ट प्रश्न है कि क्या उस समय जबकि संसार में न्याय और अन्याय का ऐसा घमासान युद्ध छिड़ा हुआ है , तुम निष्क्रिय और चुपचाप हाथ पर हाथ रखे बैठे रहना ही उचित समझते हो ? क्या उस समय जबकि राष्ट्रों के होनहार नैनिहाल केवल निकृष्ट श्रेणियों में जन्म लेने के कारण जबरदस्तों कि स्वार्थ वेदी पर बेदर्दी से बलिदान किये जा रहे है , जब केवल जाती या रंग के कारण मनुष्य मनुष्य कि गर्दन काट रहा है , तुम चुपचाप बैठे हुए इस विभीषिका को देखते रहना अपना धर्म समझते हो ? क्या उस समय जब व्यक्तियों के स्वेच्छाचारो के अंत कि घोषणा संसार भर में गूंज उठी है और स्वेच्छाचार अपनी धाक कि समाप्ति के पश्चात अब अपने जाने कि गंभीरतापूर्वक तयारी कर रहा है , तब उन घटनाओ को चुपचाप देखना ही तुम्हारा कर्तव्य है ? जनसत्ता किससे प्रश्न कर रही है ?

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