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PHYSICS
5 किग्रा द्रव्यमान का एक पिण्ड 20 मी/से ...

5 किग्रा द्रव्यमान का एक पिण्ड 20 मी/से के वेग से चल रहा है | यदि उस पर 10 सेकण्ड तक 100 न्यूटन का बल पिण्ड के वेग की ही दिशा में लगाया जाए तो पिण्ड का वेग हो जाएगा:

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एक 5 kg द्रव्यमान वाली वस्तु पर 2s के लिये एक नियत बल कार्यरत होता है। यह वस्तु के वेग को 3m/s से बढा 7m/s कर देता है। लगाये गये बल की मात्रा ज्ञात करें

आंकड़ों 2 ,5 ,6 ,x ,4 ,3 का माध्य 5 है। अब यदि x के स्थान पर 16 कर लिया जाए तो माध्य कितना बढ़ जाएगा ?

Two numbers A and B are in the ratio 5 : 2. If 4 is added to each number then this ratio becomes 9 : 4. If 5 is subtracted from each of the original numbers , then the ratio of A and B will be: दो संख्याएं A और B 5 : 2 के अनुपात में हैं |यदि प्रत्येक संख्या में 4 जोड़ा जाए, तो यह अनुपात 9 : 4 हो जाता है | यदि प्रत्येक मूल संख्या में से 5 घटाया जाए, तो A और B का अनुपात क्या हो जाएगा ?

एक संस्कृत व्यक्ति किसी नई चीज की खोज करता है, किन्तु उसकी सन्तान को वह अपने पूर्वज से अनायास प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी सन्तान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वज की भाँति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकता। एक आधुनिक उदाहरण लें। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के युग का भौतिक विज्ञान क विद्यार्थी न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण से तो परिचित है ही, लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान प्राप्त है, जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित ही रहा। ऐसा होने पर भी हम आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी को न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले ही कह सकें, पर न्यूटन जितना संस्कृत नहीं कह सकते। 'संस्कृत' का अर्थ है।

एक संस्कृत व्यक्ति किसी नई चीज की खोज करता है, किन्तु उसकी सन्तान को वह अपने पूर्वज से अनायास प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी सन्तान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वज की भाँति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकता। एक आधुनिक उदाहरण लें। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के युग का भौतिक विज्ञान क विद्यार्थी न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण से तो परिचित है ही, लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान प्राप्त है, जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित ही रहा। ऐसा होने पर भी हम आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी को न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले ही कह सकें, पर न्यूटन जितना संस्कृत नहीं कह सकते। 'अनायास' का अर्थ है

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