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PHYSICS
दो स्प्रिंगों जिनके बल नियतांक क्रमशः 15...

दो स्प्रिंगों जिनके बल नियतांक क्रमशः 1500 न्यूटन/मीटर तथा 3000 न्यूटन/मीटर हैं , को समान बल से खींचा जाता हैं | उनकी स्थितिज ऊर्जा का अनुपात होगा :

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Two racers run at a speed of 100m/min and 120m/min respectively. If the second racer takes 10 minute less than the first to complete the run, then how long is the race? दो धावक क्रमशः 100 मीटर/मिनट तथा 120 मीटर / मिनट की चाल से दौड़ते हैं | यदि दूसरे धावक को पहले धावक की तुलना में दौड़ पूरी करने में 10 मिनट कम लगते हैं, तो दौड़ की लंबाई कितनी है ?

Two numbers are in the ratio 3:5. If 13 is subtracted from each, the new numbers are in the ratio 10:21. If 15 is added to each of the original numbers, then the ratio becomes : दो संख्याएं 3 : 5 के अनुपात में हैं | यदि प्रत्येक संख्या से 13 घटा दिया जाए, तो नयी संख्याओं का अनुपात 10 : 21 हो जाता है | यदि मूल संख्याओं में 5 जोड़ा जाए, तो नया अनुपात क्या होगा ?

The height of a tower is, 300 meters. When its top is seen from top of another tower, then the angle of depression is 60^@ . The horizontal distance between the bases of the two towers is 120 metres. What is the height (in meters) of the small tower? एक मीनार की ऊँचाई 300 मीटर है। जब उसकी चोटी की दूसरे मीनार की चोटी से देखा जाता है, तो उन्नयन कोण 60^@ का होता है। दोनों मीनारें के आधारों के मध्य को दूरी 120 मीटर हैं छोटे मीनार की ऊँचाई (मीटर में) क्या है?

Two trains of the same length are running on parallel tracks in the same direction at 54 km/h and 42 km/h respectively. The faster train passes the other train in 63 seconds. What is the length (In metres) of each train? समान लंबाई की दो ट्रेनें समानांतर पटरियों पर एक ही दिशा में क्रमशः 54 किमी/घंटा और 42 किमी/घंटा की चाल से चल रही हैं | तेज़ ट्रेन दूसरी ट्रेन को 63 सेकंड में पीछे छोड़ देती है | प्रत्येक ट्रेन की लंबाई (मीटर में ) ज्ञात करें |

The ratio of monthly incomes of Pawan and Sunil is 4:3 and the ratio of their monthly expenditures is 3:2. If Pawan and Sunil save Rs. 4000 and Rs 6000 respectively per month, then what is the sum of their monthly incomes ? पवन और सुनील की मासिक आय का अनुपात 4 : 3 है तथा उनके मासिक व्यय का अनुपात 3 : 2 है | यदि पवन और सुनील क्रमशः 4000 रुपये और 6000 रुपये की बचत करते हैं, तो उनकी मासिक आय का योग क्या होगा ?

A pyramid has a square base. The side of square is 12 cm and height of pyramid is 21 cm. The pyramid is cut into 3 parts by 2 cuts parallel to its base. The cuts are at height of 7 cm and 14 cm respectively from the base. What is the difference (in cm^3 ) in the volume of top most and bottom most part? एक पिरामिड का आधार एक वर्ग है। वर्ग की भुजा 12 से.मी. तथा पिसमिड की ऊँचाई 21 से.मी. है। पिरामिड को उसके आधार के समांतर 2 कर्टावों से 3 भागों में काटा जाता है। कटाव आधार से. क्रमशः 7 से.मी. तथा 14 से.मी. को ऊँचाई पर है। सबसे ऊपर तथा सबसे नीचे के भाग के आयतन का अंतर ( से.मी.^3 में)क्या हैं।

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम विज्ञान युग में जी रहे हैं। हमसे ये आशा नहीं की जाती कि हम अविश्वसनीय मतों अथवा एकांतिक दैवी-संदेशों को सोचे समझे बगैर आसानी से स्वीकार कर लेंगे। आज के युग में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नित-नूतन आविष्कार हो रहे हैं। प्रकृति के रहस्यों पर से आवरण क्रमशः हटता जा रहा है। यह युग मानववाद का भी है, जिसमें वे धर्म जो मानवीय बुराइयों तथा सामाजिक अपराधों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं, आधुनिक व्यक्ति के गले नहीं उतरते। वे धर्म जो विभेद, वैमनस्य और अनैतिकता को बढ़ावा देते हैं तथा एकता, सद्भावना और सामंजस्य को प्रोत्साहित नहीं करते, वे मनुष्य को मनुष्य से लड़ाकार धर्मद्रोहियों के हाथ में अस्त्र बन जाते हैं। विज्ञान की प्रकृति कभी धर्म-विरोधी नहीं रही है। धार्मिक मतों के पक्ष में मुख्य तर्क प्रायः ब्रह्मांड संबंधी वस्तुपरक विचारों पर आधरित होते हैं। प्राकृतिक धर्म कभी भी किन्हीं आप्त स्रोतों, इल्हामों या परंपराओं पर निर्भर नहीं करता, वह तो अनुभूत अनुभव सिद्ध प्रत्यक्ष तथ्यों के अध्ययन और व्यावहारिकता पर अवलंबित होता है। वैज्ञानिक विधि का अनुसरण करते हुए, प्राकृतिक तथ्यों का सर्वेक्षण करके, युक्तियुक्त तर्क देकर परमसत्ता-विषयक सिद्धान्त का प्रतिपादन किया जाता है। वैज्ञानिक धर्म में ब्रह्मांड को समझने की जिज्ञासा पर बल दिया जाता है। प्राकृतिक ऊर्जा व पदार्थों के जन्म तथा विनाश को समझ सकने की इच्छा होती है। विकास का क्रम ऊर्ध्वमुखी रहा है: यह अप्राण से सप्राण तक, सप्राण से संवेदनशील तक, संवेदनशील से सज्ञान जीवन तक विकसित होता है। सज्ञान प्राणी को आध्यात्मिक प्राणी के रूप में आत्मविकास करना पड़ता है। आध्यात्मिक प्राणी- विशुद्ध ज्ञानी या विचारवान् प्राणी से उतना ऊँचा होता है जितना ज्ञानवान प्राणी संवेदनशील प्राणी से उन्नत होता है। विज्ञान की चेतना में कहीं यह संकेत नहीं मिलता कि पदार्थ से ही सृष्टि का आरंभ हुआ था। परमाणु को विखंडित करने वाले मनुष्य का मन निश्चय ही परमाणु से कहीं अधिक श्रेष्ठ है। प्रकृति की व्यवस्था और प्रगति के अवलोकन से स्पष्ट हो जाता है कि अगणित क्रमबद्ध प्रणालियों का संचालन, किसी सर्वद्रष्टा परम-आत्मा द्वारा किया जा रहा है। आधुनिक मनुष्य किस प्रकार के धर्म को स्वीकार नहीं करता।

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम विज्ञान युग में जी रहे हैं। हमसे ये आशा नहीं की जाती कि हम अविश्वसनीय मतों अथवा एकांतिक दैवी-संदेशों को सोचे समझे बगैर आसानी से स्वीकार कर लेंगे। आज के युग में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नित-नूतन आविष्कार हो रहे हैं। प्रकृति के रहस्यों पर से आवरण क्रमशः हटता जा रहा है। यह युग मानववाद का भी है, जिसमें वे धर्म जो मानवीय बुराइयों तथा सामाजिक अपराधों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं, आधुनिक व्यक्ति के गले नहीं उतरते। वे धर्म जो विभेद, वैमनस्य और अनैतिकता को बढ़ावा देते हैं तथा एकता, सद्भावना और सामंजस्य को प्रोत्साहित नहीं करते, वे मनुष्य को मनुष्य से लड़ाकार धर्मद्रोहियों के हाथ में अस्त्र बन जाते हैं। विज्ञान की प्रकृति कभी धर्म-विरोधी नहीं रही है। धार्मिक मतों के पक्ष में मुख्य तर्क प्रायः ब्रह्मांड संबंधी वस्तुपरक विचारों पर आधरित होते हैं। प्राकृतिक धर्म कभी भी किन्हीं आप्त स्रोतों, इल्हामों या परंपराओं पर निर्भर नहीं करता, वह तो अनुभूत अनुभव सिद्ध प्रत्यक्ष तथ्यों के अध्ययन और व्यावहारिकता पर अवलंबित होता है। वैज्ञानिक विधि का अनुसरण करते हुए, प्राकृतिक तथ्यों का सर्वेक्षण करके, युक्तियुक्त तर्क देकर परमसत्ता-विषयक सिद्धान्त का प्रतिपादन किया जाता है। वैज्ञानिक धर्म में ब्रह्मांड को समझने की जिज्ञासा पर बल दिया जाता है। प्राकृतिक ऊर्जा व पदार्थों के जन्म तथा विनाश को समझ सकने की इच्छा होती है। विकास का क्रम ऊर्ध्वमुखी रहा है: यह अप्राण से सप्राण तक, सप्राण से संवेदनशील तक, संवेदनशील से सज्ञान जीवन तक विकसित होता है। सज्ञान प्राणी को आध्यात्मिक प्राणी के रूप में आत्मविकास करना पड़ता है। आध्यात्मिक प्राणी- विशुद्ध ज्ञानी या विचारवान् प्राणी से उतना ऊँचा होता है जितना ज्ञानवान प्राणी संवेदनशील प्राणी से उन्नत होता है। विज्ञान की चेतना में कहीं यह संकेत नहीं मिलता कि पदार्थ से ही सृष्टि का आरंभ हुआ था। परमाणु को विखंडित करने वाले मनुष्य का मन निश्चय ही परमाणु से कहीं अधिक श्रेष्ठ है। प्रकृति की व्यवस्था और प्रगति के अवलोकन से स्पष्ट हो जाता है कि अगणित क्रमबद्ध प्रणालियों का संचालन, किसी सर्वद्रष्टा परम-आत्मा द्वारा किया जा रहा है। वर्तमान युग का मनुष्य कैसे धर्म को सही समझ सकता है?