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अंको 0,1,2,3,4,5 का प्रयोग करके (जहाँ अं...

अंको 0,1,2,3,4,5 का प्रयोग करके (जहाँ अंको को दोहराया जा सकता है) बनाई जा सकने वाली चार अंको की संख्याओं, जो 4321 से अधिक (strictly greater) हो, की संख्या है

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What is the difference between the largest and smallest numbers of the four digits created using numbers 2, 9, 6, 5? | (Each number can be used only once) अंक 2,9,6, और 5 का उपयोग करके बनी चार अंको की सबसे बड़ी और सबसे छोटी संख्यायों का अंतर क्या है? (प्रत्येक अंक केवल एक ही बार प्रयुक्त हो सकता है )

The average of eleven numbers is 54. The average of the first four numbers is 48 and that of the next four numbers is 25% more than the average of the first four. The ninth number is 8 greater than the 11th number and the tenth number is 4 greater than the 11th number. What is the average of the 9th and the 10th numbers? 11 संख्याओं का औसत 54 है | पहली चार संख्याओं का औसत 48 है तथा अगली चार संख्याओं का औसत पहली चार संख्याओं के औसत से 25% अधिक है | 9वीं संख्या 11वीं संख्या से 8 अधिक है तथा दसवीं संख्या 11वीं संख्या से 4 अधिक है | 9वीं और 10वीं संख्याओं का औसत ज्ञात करें |

In a school 4/9 of the number of students are girls and the rest are boys 3/5 of the number of boys are below 12 years of age and 5/12 of the number of girls are 12 years or above 12 years of age. If the number of students below 12 years of age is 480, then 5/18 of the total number of students in the school will be equal to: एक विद्यालय में, छात्रो कौ कुल संख्या का 4/9 लडकियाँ और बाकी लडके है। लडको की कुल संख्या का 3/5 , 12 साल से कम है, और लडकियो की संख्या का 5/12 ,12 साल या उससे अधिक है। यदि 12 साल, से कम आयु के छात्रो की संख्या 480 है, तो स्कूल में छात्रो की कुल संख्या का 5/18 निम्न में से किसके बराबर है?

आपको किसी महत्त्वपूर्ण परीक्षा की तैयारी में क्या कठिनाई हो रही है? क्याऐसा करने में समय की कमी महसूस हो रही है? अगर आपका जवाब हाँ है, तो आपको समय प्रबन्धन सीखने की जरूरत है। समय प्रबन्धन किसी भी परीक्षा की तैयारी का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू है। बहुत से परीक्षार्थी ऐसे है, जो परीक्षाओं की तैयारी देर से और बेहतरीन ढंग से शुरू करते हैं, जिससे उन्हें समयाभाव सबसे बड़े शत्रु की तरह दिखने लगता है। बिना समय प्रबन्धन के उस अनुपात में फायदा नहीं हो पाता, जिस अनुपात में आप मेहनत करते हैं। वास्तव में समय की गति को या उसके स्वभाव को मैनेज नहीं किया जा सकता, क्योकि न तो इसे धीमा किया जा सकता है और न ही रोका जा सकता है। आप स्वयं को मैनेज करते हुए सिर्फ इसका सही उपयोग. कर सकते हैं। वास्तविकता यही है। सबसे पहले आप यह निर्धारित करें कि आपका वर्तमान समय कैसे व्यतीत हो रहा है। आप पिछले एक सप्ताह के अपने कार्यकलाप को एक पेपर पर । लिखकर देखिए कि आपने टाइमटेबल का कितना और कैसा अनुसरण किया है। पूरे सप्ताह में कितने घण्टे सेल्फ-स्टडी की है और आपका निर्धारित सिलेबस का कितना हिस्सा नहीं हो पाया है। एक बार पूरा विश्लेषण करने के बाद आप स्वयं को समय के हिसाब से बदलना शुरू कर सकते हैं। समा बचाने के लिए किसी विशेषज्ञ की टिप्स काम आ सकती है, परन्तु सबसे ' अधिक प्रभाव आपके निश्चय, समर्पण और समय नियोजन का रहेगा। समयप्रबन्धन आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा और यह सफलता की दिशा में निर्णायक होगा। समय का अभाव उन्हें शत्रु जैसा लगता है, जो

आपको किसी महत्त्वपूर्ण परीक्षा की तैयारी में क्या कठिनाई हो रही है? क्याऐसा करने में समय की कमी महसूस हो रही है? अगर आपका जवाब हाँ है, तो आपको समय प्रबन्धन सीखने की जरूरत है। समय प्रबन्धन किसी भी परीक्षा की तैयारी का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू है। बहुत से परीक्षार्थी ऐसे है, जो परीक्षाओं की तैयारी देर से और बेहतरीन ढंग से शुरू करते हैं, जिससे उन्हें समयाभाव सबसे बड़े शत्रु की तरह दिखने लगता है। बिना समय प्रबन्धन के उस अनुपात में फायदा नहीं हो पाता, जिस अनुपात में आप मेहनत करते हैं। वास्तव में समय की गति को या उसके स्वभाव को मैनेज नहीं किया जा सकता, क्योकि न तो इसे धीमा किया जा सकता है और न ही रोका जा सकता है। आप स्वयं को मैनेज करते हुए सिर्फ इसका सही उपयोग. कर सकते हैं। वास्तविकता यही है। सबसे पहले आप यह निर्धारित करें कि आपका वर्तमान समय कैसे व्यतीत हो रहा है। आप पिछले एक सप्ताह के अपने कार्यकलाप को एक पेपर पर । लिखकर देखिए कि आपने टाइमटेबल का कितना और कैसा अनुसरण किया है। पूरे सप्ताह में कितने घण्टे सेल्फ-स्टडी की है और आपका निर्धारित सिलेबस का कितना हिस्सा नहीं हो पाया है। एक बार पूरा विश्लेषण करने के बाद आप स्वयं को समय के हिसाब से बदलना शुरू कर सकते हैं। समा बचाने के लिए किसी विशेषज्ञ की टिप्स काम आ सकती है, परन्तु सबसे ' अधिक प्रभाव आपके निश्चय, समर्पण और समय नियोजन का रहेगा। समयप्रबन्धन आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा और यह सफलता की दिशा में निर्णायक होगा। समय प्रबन्धन से बढ़ सकता/सकती है

आपको किसी महत्त्वपूर्ण परीक्षा की तैयारी में क्या कठिनाई हो रही है? क्याऐसा करने में समय की कमी महसूस हो रही है? अगर आपका जवाब हाँ है, तो आपको समय प्रबन्धन सीखने की जरूरत है। समय प्रबन्धन किसी भी परीक्षा की तैयारी का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू है। बहुत से परीक्षार्थी ऐसे है, जो परीक्षाओं की तैयारी देर से और बेहतरीन ढंग से शुरू करते हैं, जिससे उन्हें समयाभाव सबसे बड़े शत्रु की तरह दिखने लगता है। बिना समय प्रबन्धन के उस अनुपात में फायदा नहीं हो पाता, जिस अनुपात में आप मेहनत करते हैं। वास्तव में समय की गति को या उसके स्वभाव को मैनेज नहीं किया जा सकता, क्योकि न तो इसे धीमा किया जा सकता है और न ही रोका जा सकता है। आप स्वयं को मैनेज करते हुए सिर्फ इसका सही उपयोग. कर सकते हैं। वास्तविकता यही है। सबसे पहले आप यह निर्धारित करें कि आपका वर्तमान समय कैसे व्यतीत हो रहा है। आप पिछले एक सप्ताह के अपने कार्यकलाप को एक पेपर पर । लिखकर देखिए कि आपने टाइमटेबल का कितना और कैसा अनुसरण किया है। पूरे सप्ताह में कितने घण्टे सेल्फ-स्टडी की है और आपका निर्धारित सिलेबस का कितना हिस्सा नहीं हो पाया है। एक बार पूरा विश्लेषण करने के बाद आप स्वयं को समय के हिसाब से बदलना शुरू कर सकते हैं। समा बचाने के लिए किसी विशेषज्ञ की टिप्स काम आ सकती है, परन्तु सबसे ' अधिक प्रभाव आपके निश्चय, समर्पण और समय नियोजन का रहेगा। समयप्रबन्धन आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा और यह सफलता की दिशा में निर्णायक होगा। समय प्रबन्धन सीखने की जरूरत कब है?

आपको किसी महत्त्वपूर्ण परीक्षा की तैयारी में क्या कठिनाई हो रही है? क्याऐसा करने में समय की कमी महसूस हो रही है? अगर आपका जवाब हाँ है, तो आपको समय प्रबन्धन सीखने की जरूरत है। समय प्रबन्धन किसी भी परीक्षा की तैयारी का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू है। बहुत से परीक्षार्थी ऐसे है, जो परीक्षाओं की तैयारी देर से और बेहतरीन ढंग से शुरू करते हैं, जिससे उन्हें समयाभाव सबसे बड़े शत्रु की तरह दिखने लगता है। बिना समय प्रबन्धन के उस अनुपात में फायदा नहीं हो पाता, जिस अनुपात में आप मेहनत करते हैं। वास्तव में समय की गति को या उसके स्वभाव को मैनेज नहीं किया जा सकता, क्योकि न तो इसे धीमा किया जा सकता है और न ही रोका जा सकता है। आप स्वयं को मैनेज करते हुए सिर्फ इसका सही उपयोग. कर सकते हैं। वास्तविकता यही है। सबसे पहले आप यह निर्धारित करें कि आपका वर्तमान समय कैसे व्यतीत हो रहा है। आप पिछले एक सप्ताह के अपने कार्यकलाप को एक पेपर पर । लिखकर देखिए कि आपने टाइमटेबल का कितना और कैसा अनुसरण किया है। पूरे सप्ताह में कितने घण्टे सेल्फ-स्टडी की है और आपका निर्धारित सिलेबस का कितना हिस्सा नहीं हो पाया है। एक बार पूरा विश्लेषण करने के बाद आप स्वयं को समय के हिसाब से बदलना शुरू कर सकते हैं। समा बचाने के लिए किसी विशेषज्ञ की टिप्स काम आ सकती है, परन्तु सबसे ' अधिक प्रभाव आपके निश्चय, समर्पण और समय नियोजन का रहेगा। समयप्रबन्धन आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा और यह सफलता की दिशा में निर्णायक होगा। 'महत्त्वपूर्ण पद का समास-विग्रह होगा

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