समान धारिता वाले दो सिलेण्डर Aतथा Bएक - दूसरे से स्टॉपकॉक के व्दारा जुड़े हैं । A में मानक ताप व दाब पर गैस भरी हैं जबकि B पूर्णतः निर्वातित् हैं । स्टॉपकॉक यकायक खोल दी जाती हैं । तो गैस की आन्तरिक ऊर्जा में कितना परिवर्तन होगा ?
समान धारिता वाले दो सिलेण्डर Aतथा Bएक - दूसरे से स्टॉपकॉक के व्दारा जुड़े हैं । A में मानक ताप व दाब पर गैस भरी हैं जबकि B पूर्णतः निर्वातित् हैं । स्टॉपकॉक यकायक खोल दी जाती हैं । तो गैस की आन्तरिक ऊर्जा में कितना परिवर्तन होगा ?
Similar Questions
Explore conceptually related problems
Places A and B are 144 km apart. Two cars start simultaneously, one from A and the other from B. If they move in the same direction, they meet after 12 hours, but if they move towards each other they meet after 9/8 hours. The speed(in km/h) of the car moving at a faster speed, is: / स्थान A और B 144 किमी दूर हैं | दो करें एक ही समय चलना शुरू करती हैं, पहली कार A से तथा दूसरी कार B से | ये वे समान दिशा में चलती हैं, तो वे 12 घंटों के बाद मिलती हैं, लेकिन यदि वे एक-दूसरे की ओर चलती हैं, तो 9/8 घंटे के बाद मिलती हैं| तीव्र गति से चलने वाली कार की चाल (किमी/घंटा में ) कितनी है ?
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। भारत की विभिन्नता विशाल है अर्थात भारत विभिन्नतापूर्ण देश है। यह स्पष्ट है, यह सबके सामने है और कोई भी व्यक्ति इसे देख सकता है। इसका सम्बन्ध बाहरी आकृति तथा कुछ निश्चित मानसिक प्रवृत्तियों एवं विशेष गुणों से है। बाह्य रूप से उत्तर-पश्चिम के पठान तथा सुदूर दक्षिण के तमिलों में बिल्कुल भी समानता नहीं है। उनकी नस्लें भी एक नहीं हैं। यद्यपि उनमें कुछ सामान्य गुण एक से हो सकते हैं, वे चहरे और शक्ल में, खानपान और कपड़ों में तथा स्वाभाविक रूप से भाषा में एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न हैं। उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रान्त में मध्य एशिया का प्रभाव पहले से ही है, कश्मीर के समान ही उनके अनेक रीति-रिवाज हमें हिमालय के दूसरी ओर स्थित देशों की याद दिलाते हैं। पठानों के लोकप्रिय नाच रूस के कज्जाक लोगों के नाचों से विचित्र रूप से समान हैं। फिर भी इन अन्तरों के होने पर भी पठानों पर भारत की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है यही बात तमिलों के विषय में भी है। अर्थात पठानों और तमिलों पर भारतीयता की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है कि ये सीमा प्रान्तीय प्रदेश और अफगानिस्तान हजारों वर्षों से भारत के साथ जुड़े हुए हैं। प्राचीन काल के तुर्क और दूसरी जातियाँ जो मध्य एशिया के अन्य भागों में रहा करती थीं, इस्लाम धर्म के प्रसार से पहले अधिकांश रूप से बौद्ध धर्म को मानने वाली थीं और उससे भी पहले महाकाव्य युग में हिन्दू धर्म को मानती थीं। सीमा प्रान्त का प्रदेश प्राचीन भारतीय संस्कृति का केन्द्र था और अब भी इस प्रदेश में स्मारकों तथा मठों के खंडहर भरे पड़े हैं और विशेष रूप से गहन विश्वविद्यालय तक्षशिला के खंडहर पाये जाते हैं जो अब से 2000 वर्ष पूर्व अपनी प्रसिद्धि की चरम सीमा पर था अर्थात बहुत प्रसिद्ध था। इस विश्वविद्यालय में भारत के प्रत्येक भाग से तथा रशिया के विभिन्न भागों से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने के लिए आया करते थे। धर्म के परिवर्तन ने अंतर तो डाला किन्तु मानसिक पृष्ठभूमि को पूर्ण रूप से नहीं बदल सका जिसका विकास उन क्षेत्रों के लोगों ने किया था। विभिन्नता पूर्ण देश कौन-सा है?
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। भारत की विभिन्नता विशाल है अर्थात भारत विभिन्नतापूर्ण देश है। यह स्पष्ट है, यह सबके सामने है और कोई भी व्यक्ति इसे देख सकता है। इसका सम्बन्ध बाहरी आकृति तथा कुछ निश्चित मानसिक प्रवृत्तियों एवं विशेष गुणों से है। बाह्य रूप से उत्तर-पश्चिम के पठान तथा सुदूर दक्षिण के तमिलों में बिल्कुल भी समानता नहीं है। उनकी नस्लें भी एक नहीं हैं। यद्यपि उनमें कुछ सामान्य गुण एक से हो सकते हैं, वे चहरे और शक्ल में, खानपान और कपड़ों में तथा स्वाभाविक रूप से भाषा में एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न हैं। उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रान्त में मध्य एशिया का प्रभाव पहले से ही है, कश्मीर के समान ही उनके अनेक रीति-रिवाज हमें हिमालय के दूसरी ओर स्थित देशों की याद दिलाते हैं। पठानों के लोकप्रिय नाच रूस के कज्जाक लोगों के नाचों से विचित्र रूप से समान हैं। फिर भी इन अन्तरों के होने पर भी पठानों पर भारत की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है यही बात तमिलों के विषय में भी है। अर्थात पठानों और तमिलों पर भारतीयता की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है कि ये सीमा प्रान्तीय प्रदेश और अफगानिस्तान हजारों वर्षों से भारत के साथ जुड़े हुए हैं। प्राचीन काल के तुर्क और दूसरी जातियाँ जो मध्य एशिया के अन्य भागों में रहा करती थीं, इस्लाम धर्म के प्रसार से पहले अधिकांश रूप से बौद्ध धर्म को मानने वाली थीं और उससे भी पहले महाकाव्य युग में हिन्दू धर्म को मानती थीं। सीमा प्रान्त का प्रदेश प्राचीन भारतीय संस्कृति का केन्द्र था और अब भी इस प्रदेश में स्मारकों तथा मठों के खंडहर भरे पड़े हैं और विशेष रूप से गहन विश्वविद्यालय तक्षशिला के खंडहर पाये जाते हैं जो अब से 2000 वर्ष पूर्व अपनी प्रसिद्धि की चरम सीमा पर था अर्थात बहुत प्रसिद्ध था। इस विश्वविद्यालय में भारत के प्रत्येक भाग से तथा रशिया के विभिन्न भागों से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने के लिए आया करते थे। धर्म के परिवर्तन ने अंतर तो डाला किन्तु मानसिक पृष्ठभूमि को पूर्ण रूप से नहीं बदल सका जिसका विकास उन क्षेत्रों के लोगों ने किया था। प्राचीन काल के तुर्क इस्लाम धर्म के पहले कौन-से धर्म को मानते थे?
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। भारत की विभिन्नता विशाल है अर्थात भारत विभिन्नतापूर्ण देश है। यह स्पष्ट है, यह सबके सामने है और कोई भी व्यक्ति इसे देख सकता है। इसका सम्बन्ध बाहरी आकृति तथा कुछ निश्चित मानसिक प्रवृत्तियों एवं विशेष गुणों से है। बाह्य रूप से उत्तर-पश्चिम के पठान तथा सुदूर दक्षिण के तमिलों में बिल्कुल भी समानता नहीं है। उनकी नस्लें भी एक नहीं हैं। यद्यपि उनमें कुछ सामान्य गुण एक से हो सकते हैं, वे चहरे और शक्ल में, खानपान और कपड़ों में तथा स्वाभाविक रूप से भाषा में एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न हैं। उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रान्त में मध्य एशिया का प्रभाव पहले से ही है, कश्मीर के समान ही उनके अनेक रीति-रिवाज हमें हिमालय के दूसरी ओर स्थित देशों की याद दिलाते हैं। पठानों के लोकप्रिय नाच रूस के कज्जाक लोगों के नाचों से विचित्र रूप से समान हैं। फिर भी इन अन्तरों के होने पर भी पठानों पर भारत की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है यही बात तमिलों के विषय में भी है। अर्थात पठानों और तमिलों पर भारतीयता की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है कि ये सीमा प्रान्तीय प्रदेश और अफगानिस्तान हजारों वर्षों से भारत के साथ जुड़े हुए हैं। प्राचीन काल के तुर्क और दूसरी जातियाँ जो मध्य एशिया के अन्य भागों में रहा करती थीं, इस्लाम धर्म के प्रसार से पहले अधिकांश रूप से बौद्ध धर्म को मानने वाली थीं और उससे भी पहले महाकाव्य युग में हिन्दू धर्म को मानती थीं। सीमा प्रान्त का प्रदेश प्राचीन भारतीय संस्कृति का केन्द्र था और अब भी इस प्रदेश में स्मारकों तथा मठों के खंडहर भरे पड़े हैं और विशेष रूप से गहन विश्वविद्यालय तक्षशिला के खंडहर पाये जाते हैं जो अब से 2000 वर्ष पूर्व अपनी प्रसिद्धि की चरम सीमा पर था अर्थात बहुत प्रसिद्ध था। इस विश्वविद्यालय में भारत के प्रत्येक भाग से तथा रशिया के विभिन्न भागों से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने के लिए आया करते थे। धर्म के परिवर्तन ने अंतर तो डाला किन्तु मानसिक पृष्ठभूमि को पूर्ण रूप से नहीं बदल सका जिसका विकास उन क्षेत्रों के लोगों ने किया था। सीमा प्रान्त के प्रदेश किस चीज के प्रसिद्ध केंद्र थे?
मेरे मकान के आगे चौराहे पर ढाबे के आगे फुटपाथ पर खाना खाने वाले लोग बैठते हैंरिक्शेवाले, मजदूर, फेरीवाले, कबाड़ी वाले.....| आना-जाना लगा ही रहता है। लोग कहते हैं-''आपको बुरा नहीं लगता ? लोग सड़क पर गंदा फैला रहे हैं और आप इन्हें बरदाश्त कर रहे है? इनके कारण पूरे मोहल्ले की आबोहवा खराब हो रही है।'' मैं उनकी बातों को हलके में ही लेता हूँ। मुझे पता है कि यहाँ जो लोग जुटते हैं वे गरीब लोग होते हैं। अपने काम-धाम के बीच रोटी खाने चले आते हैं और खाकर चले जाते हैं। ये आमतौर पर बिहार से आए गरीब ईमानदार लोग है जो हमारे इस परिसर के स्थायी सदस्य हो गए हैं। ये उन अशिष्ट अमीरों से भिन्न हैं जो साधारण से बात पर भी हंगामा खड़ा कर देते हैं। लोगों के पास पैसा तो आ गया पर धनी होने का शऊर नहीं आया। अधजल गगरी छलकत जाए की तर्ज पर इनमें दिखावे की भावना उबाल खाती है। असल में यह ढाबा हमें भी अपने माहौल से जोड़ता है। मैं लेखक हूँ तो क्या हुआ ? गाँव के एक सामान्य घर से आया हुआ व्यक्ति हूँ। बचपन में गाँव घर की गरीबी देखी है और भोगी भी है। खेतों की मिट्टी में रमा हूँ, वह मुझमें रमी है। आज भी है। खेतों की मिट्टी को झाडझूड़ कर भले ही शहरी बनने की कोशिश करता हूँ, बन नहीं पाता। वह मिट्टी बाहर से चाहे न दिखाई दे. अपनी महक और रसमयता से वह मेरे भीतर बसी हुई है। इसलिए मिट्टी से जुड़े ये तमाम लोग भाते है लेकिन कोई किसी के प्रति गाँठ नही बाँधता। दूसरे तीसरे ही दिन परस्पर हँसते-बतियाते और एक-दूसरे के दुख-दर्द में शामिल होते दिखाई पड़ते हैं। ये कभी-न-कभी एक-दूसरे से लड़ चुके हैं लेकिन कभी इसकी प्रतीति नहीं होती कि ये लड़ चुके हैं। कल के गुस्से को अगले दिन धूल की तरह झाड़कर फेंक देते हैं। 'धूल की तरह झाड़कर फेंक देना' का आशय है:
मेरे मकान के आगे चौराहे पर ढाबे के आगे फुटपाथ पर खाना खाने वाले लोग बैठते हैंरिक्शेवाले, मजदूर, फेरीवाले, कबाड़ी वाले.....| आना-जाना लगा ही रहता है। लोग कहते हैं-''आपको बुरा नहीं लगता ? लोग सड़क पर गंदा फैला रहे हैं और आप इन्हें बरदाश्त कर रहे है? इनके कारण पूरे मोहल्ले की आबोहवा खराब हो रही है।'' मैं उनकी बातों को हलके में ही लेता हूँ। मुझे पता है कि यहाँ जो लोग जुटते हैं वे गरीब लोग होते हैं। अपने काम-धाम के बीच रोटी खाने चले आते हैं और खाकर चले जाते हैं। ये आमतौर पर बिहार से आए गरीब ईमानदार लोग है जो हमारे इस परिसर के स्थायी सदस्य हो गए हैं। ये उन अशिष्ट अमीरों से भिन्न हैं जो साधारण से बात पर भी हंगामा खड़ा कर देते हैं। लोगों के पास पैसा तो आ गया पर धनी होने का शऊर नहीं आया। अधजल गगरी छलकत जाए की तर्ज पर इनमें दिखावे की भावना उबाल खाती है। असल में यह ढाबा हमें भी अपने माहौल से जोड़ता है। मैं लेखक हूँ तो क्या हुआ ? गाँव के एक सामान्य घर से आया हुआ व्यक्ति हूँ। बचपन में गाँव घर की गरीबी देखी है और भोगी भी है। खेतों की मिट्टी में रमा हूँ, वह मुझमें रमी है। आज भी है। खेतों की मिट्टी को झाडझूड़ कर भले ही शहरी बनने की कोशिश करता हूँ, बन नहीं पाता। वह मिट्टी बाहर से चाहे न दिखाई दे. अपनी महक और रसमयता से वह मेरे भीतर बसी हुई है। इसलिए मिट्टी से जुड़े ये तमाम लोग भाते है लेकिन कोई किसी के प्रति गाँठ नही बाँधता। दूसरे तीसरे ही दिन परस्पर हँसते-बतियाते और एक-दूसरे के दुख-दर्द में शामिल होते दिखाई पड़ते हैं। ये कभी-न-कभी एक-दूसरे से लड़ चुके हैं लेकिन कभी इसकी प्रतीति नहीं होती कि ये लड़ चुके हैं। कल के गुस्से को अगले दिन धूल की तरह झाड़कर फेंक देते हैं। लोग लेखक से क्यों पूछते हैं कि क्या आपको बुरा नहीं लगता?
Recommended Questions
- समान धारिता वाले दो सिलेण्डर Aतथा Bएक - दूसरे से स्टॉपकॉक के व्दारा जु...
Text Solution
|
- यदि समुच्चय A में 5 अवयव हैं तथा समुच्चय B में 6 अवयव हैं , ...
Text Solution
|
- एक कण पर लगे समान परिमाण वाले तीन बल संतुलन में हैं, तो उनके बीच व कोण...
Text Solution
|
- दाब बढ़ाने पर गैसें सिकुड़ जाती हैं।
Text Solution
|
- पदार्थ की अवस्थाओं में परिवर्तन कैसे करते हैं
Text Solution
|
- रेजाणीपानी में भीतर की चिनाई किस लकड़ी से जाती हैं?
Text Solution
|
- मेरे घर में पाँच जोड़ी आँखें हैं माँ की आँखें पड़ाव से पहले ही तीर्थ य...
Text Solution
|
- मेरे घर में पाँच जोड़ी आँखें हैं माँ की आँखें पड़ाव से पहले ही तीर्थ य...
Text Solution
|
- निर्धारित कीजिए कि एक वास्तविक गैस के लिए अत्यंत उच्च दाब पर निम्नलिखि...
Text Solution
|