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Kaise Lagae Padhai Mein Mann?|16 Ghante tak kaise padein?|पढ़ाई कैसे करें लम्बे समय के लिए?|Doubtnut

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माँ : रमेश, मीना क्यों रो रही है? रमेशः मैंने चाँटा मारा, था। मुझे पढ़ने नहीं दे रही थी। माँ लेकिन तुम इस समय क्यों पढ़ रहे हो? यह भी कोई पढ़ने का समया है? क्या आजकल पढ़ाई चौबीसों घंटे की हो गई? दिमाग है * या मशीन? और क्या पढ़ने के लिए बहन को पीटना जरूरी है? रमेश: माँ, पढूँगा नहीं तो कक्षा में अव्वल कैसे आउँगा? मुझे तो फर्स्ट आना है। तुम भी तो यही कहती थी। माँ : हाँ, कहती थी, पर तुम? हर वक्त खेल-खेल-खेल। फर्स्ट आना था तो शुरू से पढ़ा-होता। अब जब परीक्षाएँ सर पर आ गईं तो रटने बैठे हो! तुम क्या समझते हो कि ऐसे रटने से अव्वल आ जाओंगे? अरे! पढ़ना थोड़ी देर का ही काफी होता है अगर नियम से मन लगाकर पढ़ा जाए। रमेश-: अब रहने-दो माँ। मैं आज खेलने भी नहीं जाउँगा। कोई आए तो मना कर देना। अब मुझे पढ़ने दो - "अकबर का जन्म... अकबर का जन्म... अमरकोट में हुआ था... अमरकोट में....'' माँ : अकबर का जन्म जहाँ भी हुआ हो, तुम्हारा जन्म यही हुआ है और मैं तुम्हें रटू तोता नहीं बनने दूंगी। पढ़ने के समय पढ़ना और खेलने के समय खेलना अच्छा होता है। कक्षा में प्रथम आने के लिए आवश्यक है

माँ : रमेश, मीना क्यों रो रही है? रमेशः मैंने चाँटा मारा, था। मुझे पढ़ने नहीं दे रही थी। माँ लेकिन तुम इस समय क्यों पढ़ रहे हो? यह भी कोई पढ़ने का समया है? क्या आजकल पढ़ाई चौबीसों घंटे की हो गई? दिमाग है * या मशीन? और क्या पढ़ने के लिए बहन को पीटना जरूरी है? रमेश: माँ, पढूँगा नहीं तो कक्षा में अव्वल कैसे आउँगा? मुझे तो फर्स्ट आना है। तुम भी तो यही कहती थी। माँ : हाँ, कहती थी, पर तुम? हर वक्त खेल-खेल-खेल। फर्स्ट आना था तो शुरू से पढ़ा-होता। अब जब परीक्षाएँ सर पर आ गईं तो रटने बैठे हो! तुम क्या समझते हो कि ऐसे रटने से अव्वल आ जाओंगे? अरे! पढ़ना थोड़ी देर का ही काफी होता है अगर नियम से मन लगाकर पढ़ा जाए। रमेश-: अब रहने-दो माँ। मैं आज खेलने भी नहीं जाउँगा। कोई आए तो मना कर देना। अब मुझे पढ़ने दो - "अकबर का जन्म... अकबर का जन्म... अमरकोट में हुआ था... अमरकोट में....'' माँ : अकबर का जन्म जहाँ भी हुआ हो, तुम्हारा जन्म यही हुआ है और मैं तुम्हें रटू तोता नहीं बनने दूंगी। पढ़ने के समय पढ़ना और खेलने के समय खेलना अच्छा होता है। कौन-सा विशेषण रमेश के लिए उपयुक्त है?

माँ : रमेश, मीना क्यों रो रही है? रमेशः मैंने चाँटा मारा, था। मुझे पढ़ने नहीं दे रही थी। माँ लेकिन तुम इस समय क्यों पढ़ रहे हो? यह भी कोई पढ़ने का समया है? क्या आजकल पढ़ाई चौबीसों घंटे की हो गई? दिमाग है * या मशीन? और क्या पढ़ने के लिए बहन को पीटना जरूरी है? रमेश: माँ, पढूँगा नहीं तो कक्षा में अव्वल कैसे आउँगा? मुझे तो फर्स्ट आना है। तुम भी तो यही कहती थी। माँ : हाँ, कहती थी, पर तुम? हर वक्त खेल-खेल-खेल। फर्स्ट आना था तो शुरू से पढ़ा-होता। अब जब परीक्षाएँ सर पर आ गईं तो रटने बैठे हो! तुम क्या समझते हो कि ऐसे रटने से अव्वल आ जाओंगे? अरे! पढ़ना थोड़ी देर का ही काफी होता है अगर नियम से मन लगाकर पढ़ा जाए। रमेश-: अब रहने-दो माँ। मैं आज खेलने भी नहीं जाउँगा। कोई आए तो मना कर देना। अब मुझे पढ़ने दो - "अकबर का जन्म... अकबर का जन्म... अमरकोट में हुआ था... अमरकोट में....'' माँ : अकबर का जन्म जहाँ भी हुआ हो, तुम्हारा जन्म यही हुआ है और मैं तुम्हें रटू तोता नहीं बनने दूंगी। पढ़ने के समय पढ़ना और खेलने के समय खेलना अच्छा होता है। 'बहुत निकट आना' के लिए मुहावरा है ।

माँ : रमेश, मीना क्यों रो रही है? रमेशः मैंने चाँटा मारा, था। मुझे पढ़ने नहीं दे रही थी। माँ लेकिन तुम इस समय क्यों पढ़ रहे हो? यह भी कोई पढ़ने का समया है? क्या आजकल पढ़ाई चौबीसों घंटे की हो गई? दिमाग है * या मशीन? और क्या पढ़ने के लिए बहन को पीटना जरूरी है? रमेश: माँ, पढूँगा नहीं तो कक्षा में अव्वल कैसे आउँगा? मुझे तो फर्स्ट आना है। तुम भी तो यही कहती थी। माँ : हाँ, कहती थी, पर तुम? हर वक्त खेल-खेल-खेल। फर्स्ट आना था तो शुरू से पढ़ा-होता। अब जब परीक्षाएँ सर पर आ गईं तो रटने बैठे हो! तुम क्या समझते हो कि ऐसे रटने से अव्वल आ जाओंगे? अरे! पढ़ना थोड़ी देर का ही काफी होता है अगर नियम से मन लगाकर पढ़ा जाए। रमेश-: अब रहने-दो माँ। मैं आज खेलने भी नहीं जाउँगा। कोई आए तो मना कर देना। अब मुझे पढ़ने दो - "अकबर का जन्म... अकबर का जन्म... अमरकोट में हुआ था... अमरकोट में....'' माँ : अकबर का जन्म जहाँ भी हुआ हो, तुम्हारा जन्म यही हुआ है और मैं तुम्हें रटू तोता नहीं बनने दूंगी। पढ़ने के समय पढ़ना और खेलने के समय खेलना अच्छा होता है। ''यह भी कोई पढ़ने का समय है" प्रश्न का आशय है

माँ : रमेश, मीना क्यों रो रही है? रमेशः मैंने चाँटा मारा, था। मुझे पढ़ने नहीं दे रही थी। माँ लेकिन तुम इस समय क्यों पढ़ रहे हो? यह भी कोई पढ़ने का समया है? क्या आजकल पढ़ाई चौबीसों घंटे की हो गई? दिमाग है * या मशीन? और क्या पढ़ने के लिए बहन को पीटना जरूरी है? रमेश: माँ, पढूँगा नहीं तो कक्षा में अव्वल कैसे आउँगा? मुझे तो फर्स्ट आना है। तुम भी तो यही कहती थी। माँ : हाँ, कहती थी, पर तुम? हर वक्त खेल-खेल-खेल। फर्स्ट आना था तो शुरू से पढ़ा-होता। अब जब परीक्षाएँ सर पर आ गईं तो रटने बैठे हो! तुम क्या समझते हो कि ऐसे रटने से अव्वल आ जाओंगे? अरे! पढ़ना थोड़ी देर का ही काफी होता है अगर नियम से मन लगाकर पढ़ा जाए। रमेश-: अब रहने-दो माँ। मैं आज खेलने भी नहीं जाउँगा। कोई आए तो मना कर देना। अब मुझे पढ़ने दो - "अकबर का जन्म... अकबर का जन्म... अमरकोट में हुआ था... अमरकोट में....'' माँ : अकबर का जन्म जहाँ भी हुआ हो, तुम्हारा जन्म यही हुआ है और मैं तुम्हें रटू तोता नहीं बनने दूंगी। पढ़ने के समय पढ़ना और खेलने के समय खेलना अच्छा होता है। मीना और रमेश हैं, परस्पर

माँ : रमेश, मीना क्यों रो रही है? रमेशः मैंने चाँटा मारा, था। मुझे पढ़ने नहीं दे रही थी। माँ लेकिन तुम इस समय क्यों पढ़ रहे हो? यह भी कोई पढ़ने का समया है? क्या आजकल पढ़ाई चौबीसों घंटे की हो गई? दिमाग है * या मशीन? और क्या पढ़ने के लिए बहन को पीटना जरूरी है? रमेश: माँ, पढूँगा नहीं तो कक्षा में अव्वल कैसे आउँगा? मुझे तो फर्स्ट आना है। तुम भी तो यही कहती थी। माँ : हाँ, कहती थी, पर तुम? हर वक्त खेल-खेल-खेल। फर्स्ट आना था तो शुरू से पढ़ा-होता। अब जब परीक्षाएँ सर पर आ गईं तो रटने बैठे हो! तुम क्या समझते हो कि ऐसे रटने से अव्वल आ जाओंगे? अरे! पढ़ना थोड़ी देर का ही काफी होता है अगर नियम से मन लगाकर पढ़ा जाए। रमेश-: अब रहने-दो माँ। मैं आज खेलने भी नहीं जाउँगा। कोई आए तो मना कर देना। अब मुझे पढ़ने दो - "अकबर का जन्म... अकबर का जन्म... अमरकोट में हुआ था... अमरकोट में....'' माँ : अकबर का जन्म जहाँ भी हुआ हो, तुम्हारा जन्म यही हुआ है और मैं तुम्हें रटू तोता नहीं बनने दूंगी। पढ़ने के समय पढ़ना और खेलने के समय खेलना अच्छा होता है। रमेश ने मीना की पिटाई की, क्योंकि वह

माँ : रमेश, मीना क्यों रो रही है? रमेशः मैंने चाँटा मारा, था। मुझे पढ़ने नहीं दे रही थी। माँ लेकिन तुम इस समय क्यों पढ़ रहे हो? यह भी कोई पढ़ने का समया है? क्या आजकल पढ़ाई चौबीसों घंटे की हो गई? दिमाग है * या मशीन? और क्या पढ़ने के लिए बहन को पीटना जरूरी है? रमेश: माँ, पढूँगा नहीं तो कक्षा में अव्वल कैसे आउँगा? मुझे तो फर्स्ट आना है। तुम भी तो यही कहती थी। माँ : हाँ, कहती थी, पर तुम? हर वक्त खेल-खेल-खेल। फर्स्ट आना था तो शुरू से पढ़ा-होता। अब जब परीक्षाएँ सर पर आ गईं तो रटने बैठे हो! तुम क्या समझते हो कि ऐसे रटने से अव्वल आ जाओंगे? अरे! पढ़ना थोड़ी देर का ही काफी होता है अगर नियम से मन लगाकर पढ़ा जाए। रमेश-: अब रहने-दो माँ। मैं आज खेलने भी नहीं जाउँगा। कोई आए तो मना कर देना। अब मुझे पढ़ने दो - "अकबर का जन्म... अकबर का जन्म... अमरकोट में हुआ था... अमरकोट में....'' माँ : अकबर का जन्म जहाँ भी हुआ हो, तुम्हारा जन्म यही हुआ है और मैं तुम्हें रटू तोता नहीं बनने दूंगी। पढ़ने के समय पढ़ना और खेलने के समय खेलना अच्छा होता है। जो शब्द शेष से भिन्न हो, उसे छांटिए।

माँ : रमेश, मीना क्यों रो रही है? रमेशः मैंने चाँटा मारा, था। मुझे पढ़ने नहीं दे रही थी। माँ लेकिन तुम इस समय क्यों पढ़ रहे हो? यह भी कोई पढ़ने का समया है? क्या आजकल पढ़ाई चौबीसों घंटे की हो गई? दिमाग है * या मशीन? और क्या पढ़ने के लिए बहन को पीटना जरूरी है? रमेश: माँ, पढूँगा नहीं तो कक्षा में अव्वल कैसे आउँगा? मुझे तो फर्स्ट आना है। तुम भी तो यही कहती थी। माँ : हाँ, कहती थी, पर तुम? हर वक्त खेल-खेल-खेल। फर्स्ट आना था तो शुरू से पढ़ा-होता। अब जब परीक्षाएँ सर पर आ गईं तो रटने बैठे हो! तुम क्या समझते हो कि ऐसे रटने से अव्वल आ जाओंगे? अरे! पढ़ना थोड़ी देर का ही काफी होता है अगर नियम से मन लगाकर पढ़ा जाए। रमेश-: अब रहने-दो माँ। मैं आज खेलने भी नहीं जाउँगा। कोई आए तो मना कर देना। अब मुझे पढ़ने दो - "अकबर का जन्म... अकबर का जन्म... अमरकोट में हुआ था... अमरकोट में....'' माँ : अकबर का जन्म जहाँ भी हुआ हो, तुम्हारा जन्म यही हुआ है और मैं तुम्हें रटू तोता नहीं बनने दूंगी। पढ़ने के समय पढ़ना और खेलने के समय खेलना अच्छा होता है। 'पर तुम?' का भाव है

माँ : रमेश, मीना क्यों रो रही है? रमेशः मैंने चाँटा मारा, था। मुझे पढ़ने नहीं दे रही थी। माँ लेकिन तुम इस समय क्यों पढ़ रहे हो? यह भी कोई पढ़ने का समया है? क्या आजकल पढ़ाई चौबीसों घंटे की हो गई? दिमाग है * या मशीन? और क्या पढ़ने के लिए बहन को पीटना जरूरी है? रमेश: माँ, पढूँगा नहीं तो कक्षा में अव्वल कैसे आउँगा? मुझे तो फर्स्ट आना है। तुम भी तो यही कहती थी। माँ : हाँ, कहती थी, पर तुम? हर वक्त खेल-खेल-खेल। फर्स्ट आना था तो शुरू से पढ़ा-होता। अब जब परीक्षाएँ सर पर आ गईं तो रटने बैठे हो! तुम क्या समझते हो कि ऐसे रटने से अव्वल आ जाओंगे? अरे! पढ़ना थोड़ी देर का ही काफी होता है अगर नियम से मन लगाकर पढ़ा जाए। रमेश-: अब रहने-दो माँ। मैं आज खेलने भी नहीं जाउँगा। कोई आए तो मना कर देना। अब मुझे पढ़ने दो - "अकबर का जन्म... अकबर का जन्म... अमरकोट में हुआ था... अमरकोट में....'' माँ : अकबर का जन्म जहाँ भी हुआ हो, तुम्हारा जन्म यही हुआ है और मैं तुम्हें रटू तोता नहीं बनने दूंगी। पढ़ने के समय पढ़ना और खेलने के समय खेलना अच्छा होता है। अकबर का जन्म कहाँ हुआ था?