Home
Class 11
PHYSICS
एक 100 ग्राम का पत्थर एक भरहीं 100 सेमि ...

एक 100 ग्राम का पत्थर एक भरहीं 100 सेमि लम्बाई की डोरी सिरे पर बांध कर उध्र्वाधर ताल के चुमाया जाता है। जब डोरी उधर्व से `60^@` का कोण बनती है, तब पत्थर की चल 200 सेमी/सेकंड है। उस स्थिति की डोरी में तनाव ज्ञात कीजिय । (`g=9.8` नियन्तण/किग्रा )

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

एक आयत की लम्बाई x, 5 cm / min की दर से घट रही है और चौड़ाई y, 4 cm / min कि दर से बढ़ रही है जब x=8 cm और y= 6 cm है तब आयत के (a) परिमाप (b) क्षेत्रफल की परिवर्तन की दर ज्ञात कीजिए

एक आयत की लम्बाई x, 5 cm / min की दर से घट रही है और चौड़ाई y, 4 cm / min कि दर से बढ़ रही है जब x=8 cm और y= 6 cm है तब आयत के (a) परिमाप (b) क्षेत्रफल की परिवर्तन की दर ज्ञात कीजिए

Two trees are standing along the opposite sides of a road. Distance between the two trees is 400 metres. There is a point on the road between the trees. The angle of depressions of the point from the top of the trees are 45^@ and 60^@ . If the height of the tree which makes 45^@ angle is 200 metres, then what will be the height (in metres) of the other tree? दो वृक्ष एक सड़क की विपरीत दिशा में खडे है। दोनों वृक्षों के मध्य की दूरी 400 मीटर है। दोनों वृक्षों के मध्य सड़क पर एक बिन्दु है। वृक्षों की चोटी से बिन्दु का अवनमन कोण 45^@ तथा 60^@ है। यदि वह वृक्ष जो 45^@ का कोण बनाता है की ऊँचाई 200 मीटर है, तो दूसरे वृक्ष की ऊंचाई (मीटर में) क्या हे?

आज जब भी कोई गाँव का नाम लेता है तो एक अलग ही छवि उभरती है। वह छवि कहती है कि वहाँ गरीबी है। वहाँ अशिक्षा और अज्ञान है। वहाँ अंध-विश्वास है। गंदगी है। बीमारी है। हमें विचार करना है कि सच क्या है? क्या हमारे गाँव ऐसे ही थे जैसे आज हैं? आज जो गाँवों का दुर्दशा हुई है उसके लिए जिम्मेदार कौन है? इन सवालों की पड़ताल करते हुए हमें नई समझ बनानी है तथा गाँवों के सही स्वरूप की पहचान करनी है। वैसे यह खुदा का शुक्र है कि गाँवों पर कई तरह के आक्रामक दुष्प्रभावों के बावजूद उनका मूल स्वरूप नहीं बदलता है। जो दूरस्थ गाँव हैं-- शहर के पड़ोस से दूर उनकी निजता तो खासी बची हुई है। ऐसी स्थिति में हमारा दायित्व, एक शिक्षित समाज का दायित्व क्या बनता है? हमें विचार करना है। मंगर ऐसा कोई भी विचार गाँवों को आँखों से देखे बिना, स्वयं देख कर समझे बिना नहीं किया जा सकता! तो हमें अपनी फर्स्ट हैंड समझ बनाने के लिए गाँव चलना है। अपने मूल स्वरूप में गाँव एक वेधशाला है। एक विद्याशाला है। गाँच वेधशाला इसलिए है कि ज्ञान को रोज वहाँ कर्म की कसौटी पर कसा जाता है। आजमाया जाता है। जो ज्ञान कर्म की कसौटी पर खरा न उतरे तो उसे खारिज कर दिया जाता है। हर ज्ञान के होने की शर्त यह है वह सृजन और उत्पादन की शान पर तराशा जाए। गाँव की छवि में क्या शामिल नहीं है?

आज जब भी कोई गाँव का नाम लेता है तो एक अलग ही छवि उभरती है। वह छवि कहती है कि वहाँ गरीबी है। वहाँ अशिक्षा और अज्ञान है। वहाँ अंध-विश्वास है। गंदगी है। बीमारी है। हमें विचार करना है कि सच क्या है? क्या हमारे गाँव ऐसे ही थे जैसे आज हैं? आज जो गाँवों का दुर्दशा हुई है उसके लिए जिम्मेदार कौन है? इन सवालों की पड़ताल करते हुए हमें नई समझ बनानी है तथा गाँवों के सही स्वरूप की पहचान करनी है। वैसे यह खुदा का शुक्र है कि गाँवों पर कई तरह के आक्रामक दुष्प्रभावों के बावजूद उनका मूल स्वरूप नहीं बदलता है। जो दूरस्थ गाँव हैं-- शहर के पड़ोस से दूर उनकी निजता तो खासी बची हुई है। ऐसी स्थिति में हमारा दायित्व, एक शिक्षित समाज का दायित्व क्या बनता है? हमें विचार करना है। मंगर ऐसा कोई भी विचार गाँवों को आँखों से देखे बिना, स्वयं देख कर समझे बिना नहीं किया जा सकता! तो हमें अपनी फर्स्ट हैंड समझ बनाने के लिए गाँव चलना है। अपने मूल स्वरूप में गाँव एक वेधशाला है। एक विद्याशाला है। गाँच वेधशाला इसलिए है कि ज्ञान को रोज वहाँ कर्म की कसौटी पर कसा जाता है। आजमाया जाता है। जो ज्ञान कर्म की कसौटी पर खरा न उतरे तो उसे खारिज कर दिया जाता है। हर ज्ञान के होने की शर्त यह है वह सृजन और उत्पादन की शान पर तराशा जाए। ज्ञान के होने की अनिवार्य शर्त है

आज जब भी कोई गाँव का नाम लेता है तो एक अलग ही छवि उभरती है। वह छवि कहती है कि वहाँ गरीबी है। वहाँ अशिक्षा और अज्ञान है। वहाँ अंध-विश्वास है। गंदगी है। बीमारी है। हमें विचार करना है कि सच क्या है? क्या हमारे गाँव ऐसे ही थे जैसे आज हैं? आज जो गाँवों का दुर्दशा हुई है उसके लिए जिम्मेदार कौन है? इन सवालों की पड़ताल करते हुए हमें नई समझ बनानी है तथा गाँवों के सही स्वरूप की पहचान करनी है। वैसे यह खुदा का शुक्र है कि गाँवों पर कई तरह के आक्रामक दुष्प्रभावों के बावजूद उनका मूल स्वरूप नहीं बदलता है। जो दूरस्थ गाँव हैं-- शहर के पड़ोस से दूर उनकी निजता तो खासी बची हुई है। ऐसी स्थिति में हमारा दायित्व, एक शिक्षित समाज का दायित्व क्या बनता है? हमें विचार करना है। मंगर ऐसा कोई भी विचार गाँवों को आँखों से देखे बिना, स्वयं देख कर समझे बिना नहीं किया जा सकता! तो हमें अपनी फर्स्ट हैंड समझ बनाने के लिए गाँव चलना है। अपने मूल स्वरूप में गाँव एक वेधशाला है। एक विद्याशाला है। गाँच वेधशाला इसलिए है कि ज्ञान को रोज वहाँ कर्म की कसौटी पर कसा जाता है। आजमाया जाता है। जो ज्ञान कर्म की कसौटी पर खरा न उतरे तो उसे खारिज कर दिया जाता है। हर ज्ञान के होने की शर्त यह है वह सृजन और उत्पादन की शान पर तराशा जाए। गाँव को ठीक से समझने के लिए जरूरी है

Recommended Questions
  1. एक 100 ग्राम का पत्थर एक भरहीं 100 सेमि लम्बाई की डोरी सिरे पर बांध कर...

    Text Solution

    |

  2. एक 5 मीटर का लड़का 2 मीटर त्रिज्या के क्षैतिज व्रत में एक प्रथर को डोरी...

    Text Solution

    |

  3. एक कम्पनी दो प्रकार के टेलीफोनों का निर्माण करती है|पहला डोरी युक्त,दू...

    Text Solution

    |

  4. परवलय x^(2) = 8y पर एक स्पर्श रेखा,जो X-अक्ष की धनात्मक दिशा के साथ को...

    Text Solution

    |

  5. किसी वृत्त में एक चाप केन्द्र पर 45^@का कोण बनाता है। यदि चाप की लम्बा...

    Text Solution

    |

  6. एक घन के विकर्ण की लम्बाई 12sqrt(3) सेमी है। घन के कोर की लम्बाई ........

    Text Solution

    |

  7. एक वृत्त के अंतर्गत बने समबहुभुज की प्रत्येक भुजा केंद्र पर 36^(@) का ...

    Text Solution

    |

  8. एक वृत्त के अंतर्गत बने समबहुभुज की प्रत्येक भुजा केंद्र पर 45^(@) का ...

    Text Solution

    |

  9. उस बड़े से बड़े गोले का आयतन ज्ञात कीजिए, जो उस घन में से काटा गया जिसकी...

    Text Solution

    |