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PHYSICS
दो पोलेराइड इस प्रकार रखे है कि उनके जल ...

दो पोलेराइड इस प्रकार रखे है कि उनके जल आपतित प्रकाश के लंबवत तथा उनकी ध्रुवण दिशाओ के बीच कोण `30 ^(@)` है|यदि पहले पोलेराइड पर साधारण अध्रुवित प्रकाश आपतित हो तो दूसरे पोलेराइड से निर्गत प्रकाश कि तीव्रता आपतित तीव्रता का कितने प्रतिशत होगी ?

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निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। उपरोक्त गद्यांश का भावार्थ है कि कुछ साधारण से नियमों का पालन करने से

छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। 'विद्यालय' का संधि-विच्छेद है

छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अंग है

छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। कौन सा शब्द पुस्तक का पर्याय है?

छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। लेखक की दृष्टि में सर्वाधिक महत्वपूर्ण क्या है?

छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। लेखक ने अनूठी शिक्षा में ____ बल दिया है।

छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। 'सूक्ष्म' का विलोम

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। लेखक का मानना है कि यह एक गम्भीर गलती है