द्रव्यमान 10 g तथा लंबाई `40 cm` कि डोरी का एक सिरा एक दीवार से बँधा है दूसरा सिरा एक स्प्रिंग से जोड़ा है । स्प्रिंग अपनी स्वाभाविक लंबाई से `1.0 cm` खिँचा हुआ है तथा इसका स्प्रिंग नियतांक `160N//m` है । यदि इस डोरी पर दीवार के पास एक तरंगिका उत्पन्न कि जाए तो उसे स्प्रिंग तक पहुँचने में कितना समय लगेगा ।
द्रव्यमान 10 g तथा लंबाई `40 cm` कि डोरी का एक सिरा एक दीवार से बँधा है दूसरा सिरा एक स्प्रिंग से जोड़ा है । स्प्रिंग अपनी स्वाभाविक लंबाई से `1.0 cm` खिँचा हुआ है तथा इसका स्प्रिंग नियतांक `160N//m` है । यदि इस डोरी पर दीवार के पास एक तरंगिका उत्पन्न कि जाए तो उसे स्प्रिंग तक पहुँचने में कितना समय लगेगा ।
Similar Questions
Explore conceptually related problems
गद्यांश को पड़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हमारे देश में आधुनिक शिक्षा नामक एक चीत प्रकट हुई। इसके नाम पर यत्रतत्र स्कूल और कॉलेज कुकुरमुत्तों की तरह सिर उनकर खड़े हो गए हैं। इनका गठन इस तरह किया गया है कि इनका प्रकाश कॉलेज व्यवस्था के बाहर मुश्किल से पुटंचता है। सूरज की रोशनी चाँद से टकराकर जितनी निकलती है, इनसे उससे भी कम रोशनी निकलती है। एक परदेशी भाषा की मोटी दीवार इसे चारों ओर से घेरे हुए है। जब मैं अपनी मातृभाषा के पारिए शिक्षा के प्रसार के बारे सोचता हूँ तो उस विचार से साहस क्षीण होचा है कि घर की चारदीवारी में बंद दुल्हन की तरह यह भयभीत रहती है। बरामदे तक ही इसके स्वतंत्रता का साम्राज्य है। यह एक इंच आगे बढ़ी कि अपट निकल आता है। हमारी मातृभामा का राज प्राथमिक शिक्षा तक सीमित है। दूसरे शब्दों में, यह केवल बच्चे की शिक्षा के लिए उपयुक्त है, मानो यह कि जिसे कोई दूसरी भाषा सीखने का अवसर नहीं मिला, हमारी जनता की उस विशाल भीड़ को शिक्षा के उनके अधिकार के प्रसंग में बच्चा ही समझा जाएगा। उन्हें कभी पूर्ण विकसित मनुष्य नहीं बनना है और तब भी हम प्रेमपूर्वक सोचते है कि स्वग्रन मिलने पर उन्हें संपूर्ण मनुष्य के अधिकार हासिल होंगे। स्कूल और कॉलेजों का कुकुरमुत्तों की तरह सिर उठाने से तात्पर्य है कि स्कूल और कॉलेज
गद्यांश को पड़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हमारे देश में आधुनिक शिक्षा नामक एक चीत प्रकट हुई। इसके नाम पर यत्रतत्र स्कूल और कॉलेज कुकुरमुत्तों की तरह सिर उनकर खड़े हो गए हैं। इनका गठन इस तरह किया गया है कि इनका प्रकाश कॉलेज व्यवस्था के बाहर मुश्किल से पुटंचता है। सूरज की रोशनी चाँद से टकराकर जितनी निकलती है, इनसे उससे भी कम रोशनी निकलती है। एक परदेशी भाषा की मोटी दीवार इसे चारों ओर से घेरे हुए है। जब मैं अपनी मातृभाषा के पारिए शिक्षा के प्रसार के बारे सोचता हूँ तो उस विचार से साहस क्षीण होचा है कि घर की चारदीवारी में बंद दुल्हन की तरह यह भयभीत रहती है। बरामदे तक ही इसके स्वतंत्रता का साम्राज्य है। यह एक इंच आगे बढ़ी कि अपट निकल आता है। हमारी मातृभामा का राज प्राथमिक शिक्षा तक सीमित है। दूसरे शब्दों में, यह केवल बच्चे की शिक्षा के लिए उपयुक्त है, मानो यह कि जिसे कोई दूसरी भाषा सीखने का अवसर नहीं मिला, हमारी जनता की उस विशाल भीड़ को शिक्षा के उनके अधिकार के प्रसंग में बच्चा ही समझा जाएगा। उन्हें कभी पूर्ण विकसित मनुष्य नहीं बनना है और तब भी हम प्रेमपूर्वक सोचते है कि स्वग्रन मिलने पर उन्हें संपूर्ण मनुष्य के अधिकार हासिल होंगे। आधुनिक शिक्षा के नाम पर ऐसा क्या हुआ जो लेखक को अप्रिय है?
गद्यांश को पड़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हमारे देश में आधुनिक शिक्षा नामक एक चीत प्रकट हुई। इसके नाम पर यत्रतत्र स्कूल और कॉलेज कुकुरमुत्तों की तरह सिर उनकर खड़े हो गए हैं। इनका गठन इस तरह किया गया है कि इनका प्रकाश कॉलेज व्यवस्था के बाहर मुश्किल से पुटंचता है। सूरज की रोशनी चाँद से टकराकर जितनी निकलती है, इनसे उससे भी कम रोशनी निकलती है। एक परदेशी भाषा की मोटी दीवार इसे चारों ओर से घेरे हुए है। जब मैं अपनी मातृभाषा के पारिए शिक्षा के प्रसार के बारे सोचता हूँ तो उस विचार से साहस क्षीण होचा है कि घर की चारदीवारी में बंद दुल्हन की तरह यह भयभीत रहती है। बरामदे तक ही इसके स्वतंत्रता का साम्राज्य है। यह एक इंच आगे बढ़ी कि अपट निकल आता है। हमारी मातृभामा का राज प्राथमिक शिक्षा तक सीमित है। दूसरे शब्दों में, यह केवल बच्चे की शिक्षा के लिए उपयुक्त है, मानो यह कि जिसे कोई दूसरी भाषा सीखने का अवसर नहीं मिला, हमारी जनता की उस विशाल भीड़ को शिक्षा के उनके अधिकार के प्रसंग में बच्चा ही समझा जाएगा। उन्हें कभी पूर्ण विकसित मनुष्य नहीं बनना है और तब भी हम प्रेमपूर्वक सोचते है कि स्वग्रन मिलने पर उन्हें संपूर्ण मनुष्य के अधिकार हासिल होंगे। घर की चारदीवारी में बंद दुल्हन की तरह यह भयभीत रहती है। वाक्य में रेखांकित अंश है
गद्यांश को पड़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हमारे देश में आधुनिक शिक्षा नामक एक चीत प्रकट हुई। इसके नाम पर यत्रतत्र स्कूल और कॉलेज कुकुरमुत्तों की तरह सिर उनकर खड़े हो गए हैं। इनका गठन इस तरह किया गया है कि इनका प्रकाश कॉलेज व्यवस्था के बाहर मुश्किल से पुटंचता है। सूरज की रोशनी चाँद से टकराकर जितनी निकलती है, इनसे उससे भी कम रोशनी निकलती है। एक परदेशी भाषा की मोटी दीवार इसे चारों ओर से घेरे हुए है। जब मैं अपनी मातृभाषा के पारिए शिक्षा के प्रसार के बारे सोचता हूँ तो उस विचार से साहस क्षीण होचा है कि घर की चारदीवारी में बंद दुल्हन की तरह यह भयभीत रहती है। बरामदे तक ही इसके स्वतंत्रता का साम्राज्य है। यह एक इंच आगे बढ़ी कि अपट निकल आता है। हमारी मातृभाषा का राज प्राथमिक शिक्षा तक सीमित है। दूसरे शब्दों में, यह केवल बच्चे की शिक्षा के लिए उपयुक्त है, मानो यह कि जिसे कोई दूसरी भाषा सीखने का अवसर नहीं मिला, हमारी जनता की उस विशाल भीड़ को शिक्षा के उनके अधिकार के प्रसंग में बच्चा ही समझा जाएगा। उन्हें कभी पूर्ण विकसित मनुष्य नहीं बनना है और तब भी हम प्रेमपूर्वक सोचते है कि स्वग्रन मिलने पर उन्हें संपूर्ण मनुष्य के अधिकार हासिल होंगे। लेखक किस विचार से सहमत नहीं है?
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। लेखक का मानना है कि यह एक गम्भीर गलती है
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। उपरोक्त गद्यांश का भावार्थ है कि कुछ साधारण से नियमों का पालन करने से
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। लेखक कहना चाहता है कि
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। निम्नलिखित में से कौन-सा वाक्य सही है?
निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। उपरोक्त गद्यांश का शीर्षक होगा
Recommended Questions
- द्रव्यमान 10 g तथा लंबाई 40 cm कि डोरी का एक सिरा एक दीवार से बँधा है ...
Text Solution
|
- 30 सेमी लम्बी एक छड़ AB दो लम्ब अक्षो पर इस प्रकार फिसलती है की छड़ का...
Text Solution
|
- माना कि triangle PQR एक त्रिभुज है तथा veca = vec(QR), vecb = vec(RP) ...
Text Solution
|
- एक कम्पनी दो प्रकार के टेलीफोनों का निर्माण करती है|पहला डोरी युक्त,दू...
Text Solution
|
- एक छड़ की लम्बाई l है । इसका एक सिरा भूमि पर तथा दूसरा सिरा एक ऊर्ध...
Text Solution
|
- एक 13 मीटर लम्बी सीढ़ी दीवार के सहारे झुकी हुई है। सीढ़ी के पाद को 1.5...
Text Solution
|
- एक नली में 12 सेमी.^(3)/से. कि दर से बालू उंडेली जा रही है। उंडेली गई ...
Text Solution
|
- बताएं कि एक प्रतिदर्श समष्टि का विभाजन एक है या एक से अधिक?
Text Solution
|
- एक काले तथा लाल पासे को कर्म में उछाला गया है। तब पासो पर प्राप्...
Text Solution
|