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PHYSICS
यादि यंग के द्वि- स्लिट व्यतिकरण प्रयो...

यादि यंग के द्वि- स्लिट व्यतिकरण प्रयोग में स्लिटों के बीच की दूरी तीन गुनी कर दे तो फ्रिन्जो की चौडाई हो जाती है।

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यदि बालक में अक्षरों एवं शब्दों के सही आकार, क्रम तथा अक्षरों और शब्दों के बीच की दूरी से सही अन्तर को समझने की योग्यता का विकास करना है, तो बालकों को कौन-सी दक्षता का प्रशिक्षण देना चाहिए

Recap |यंग का द्वि-स्लिट प्रयोग |चमकीली तथा काली फ्रिनज़ों के लिए शर्त |कोणीय फ्रिंज चौड़ाई |पतली फिल्म का प्रभाव |एकल झिरी के कारण विवर्तन (केन्द्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई)|nth निम्निष्ठ के लिए |फ्रिंज चौड़ाई |तीव्रता वक्र |सूक्ष्मदर्शी और खगोलीय दूरदर्शी की विभेदन क्षमता |सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता |सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता बढ़ाने के उपाय |दूरदर्शी की विभेदन क्षमता

The distance between the centres of two circles of radius 6 cm each is 13 cm. The length (in cm) of a transverse common tangent is: 6 सेमी त्रिज्या ( प्रत्येक ) वाले दो वृत्तों के केंद्र के बीच की दूरी 13 सेमी है | अनुप्रस्थ स्पर्श रेखा की लंबाई है -

गद्य शिक्षण करते समय छात्रों के शब्द भण्डार में वृद्धि पाठ योजना के किस सोपान के अन्तर्गत की जाती है?

जाते हैं जीवन-भर वहीं संस्कार अमिट रहते हैं। इसीलिए यही काल आधारशिला कहा गया है। यदि यह नींव दृढ़ बन जाती है तो जीवन सुदृढ़ और सुखी बन जाता है। यदि इस काल में बालक कष्ट सहन कर लेता है तो उसका स्वास्थ्य सुंदर बनता है। यदि मन लगाकर अध्ययन कर लेता है तो उसे ज्ञान मिलता है, उसका मानसिक विकास होता है। जिस वृक्ष को प्रारंभ से सुंदर सिंचन और खाद मिल जाती है, वह पुष्पित एवं पल्लवित होकर संसार को सौरभ देने लगता है। इसी प्रकार विद्यार्थी काल में जो बालक श्रम, अनुशासन, समय एवं नियमन के साँचे में ढल जाता है। सभ्य नागरिक के लिए जिन-जिन गुणों की आवश्यकता है उन गुणों के लिए विद्यार्थी काल ही सुन्दर पाठशाला है। यहाँ पर अपने साथियों के बीच रह कर वे सभी गुण आ जाने आवश्यक हैं, जिनकी कि विद्यार्थी को अपने जीवन में आवश्यकता होती है। गद्यांश में आदर्श विद्यार्थी के किन गुणों की चर्चा की गई है?

जाते हैं जीवन-भर वहीं संस्कार अमिट रहते हैं। इसीलिए यही काल आधारशिला कहा गया है। यदि यह नींव दृढ़ बन जाती है तो जीवन सुदृढ़ और सुखी बन जाता है। यदि इस काल में बालक कष्ट सहन कर लेता है तो उसका स्वास्थ्य सुंदर बनता है। यदि मन लगाकर अध्ययन कर लेता है तो उसे ज्ञान मिलता है, उसका मानसिक विकास होता है। जिस वृक्ष को प्रारंभ से सुंदर सिंचन और खाद मिल जाती है, वह पुष्पित एवं पल्लवित होकर संसार को सौरभ देने लगता है। इसी प्रकार विद्यार्थी काल में जो बालक श्रम, अनुशासन, समय एवं नियमन के साँचे में ढल जाता है। सभ्य नागरिक के लिए जिन-जिन गुणों की आवश्यकता है उन गुणों के लिए विद्यार्थी काल ही सुन्दर पाठशाला है। यहाँ पर अपने साथियों के बीच रह कर वे सभी गुण आ जाने आवश्यक हैं, जिनकी कि विद्यार्थी को अपने जीवन में आवश्यकता होती है। मानव जीवन की रीढ़ की हड्डी विद्यार्थी जीवन को क्यों माना जाता है?

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