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वसंत - संसार पुस्तक है | पत्र | संसार पु...

वसंत - संसार पुस्तक है | पत्र | संसार पुस्तक है भाग -1

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वसंत - बचपन | संस्मरण | बचपन भाग -1

हरा-भरा हो जीवन स्वस्थ रहे संसार, नदियाँ, पर्वत, हवा, पेड़ से आती बहार। बचपन, कोमल तन-मन लेकर, आए अनुपम जीवन लेकर, जग से तुम और तुमसे है यह प्यारा संसार, हरा-भरा हो जीवन अपना स्वस्थ रहे संसार, वृंद-लताएँ, पौधे, डाली चारों ओर भरे हरियाली मन में जगे उमंग यही है सृष्टि का उपहार, हरा-भरा हो जीवन अपना स्वस्थ रहे संसार, मुश्किल से मिलता है जीवन, हम सब इसे बनाएँ चंदन पर्यावरण सुरक्षित न हो तो है सब बेकार हरा-भरा हो जीवन अपना स्वस्थ रहे संसार। 'जग से तुम और तुम से है ये प्यारा संसार' पंक्ति के माध्यम से कवि कहना चाहता है कि

एक विशिष्ट पाठ्यक्रम के अध्ययन के प्रमुख साधन के रूप में, एक निश्चित शैक्षिक स्तर पर प्रयुक्त करने के लिए, एक निश्चित विषय पर व्यवस्थित ढंग से लिखी हुई पुस्तक, पाठ्य-पुस्तक है।" पाठ्य-पुस्तक की यह परिभाषा किसने दी है

वसंत - कंचा | कहानी | कंचा भाग -1

A shopkeeper buys two books for ₹300. He sells the first book at a profit of 20% and the second book at a loss of 10%. What is the selling price of the first book, if in the whole transaction there is no profit no loss? एक दुकानदार ने दो पुस्तकों को 300 रुपये में ख़रीदा | उसने पहली पुस्तक 20% के लाभ पर तथा दूसरी पुस्तक 10% की हानि पर बेच दी | पहली पुस्तक का विक्रय मूल्य कितना है, यदि पूरे लेनदेन में ना तो लाभ ना ही हानि हुई है ?

पाठ्य पुस्तक रचना के सोपानों का क्रम है