Home
Class 11
HINDI
अंतरा - बादल को घिरते देखा है | कविता | ...

अंतरा - बादल को घिरते देखा है | कविता | बादल को घिरते देखा है भाग -2

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

अंतरा - बादल को घिरते देखा है | कविता | बादल को घिरते देखा है भाग -1

अंतरा - बादल को घिरते देखा है | कविता | बादल को घिरते देखा है भाग -3

अंतरा - बादल को घिरते देखा है | कविता | बादल को घिरते देखा है भाग -4

शत-शत निर्झर-निर्झरणी कल मुखरित देवदारु कानन में शोणित धवल भोज-पत्रों से छाई हुई कुटी के भीतर रंग-बिरंगे और सुगंधित फूलों से कुंतल को साजे इंद्रनील की माला डाले शंख-सरीखे सुघड़ गलों में कानों में कुवलय लटकाए शतदल लाल कमल वेणी में रजत-रचित मणि खचित कलामय पान-पात्र द्राक्षासव पूरित रखे सामने अपने-अपने लोहित चंदन की त्रिपुटी पर नरम निदाग बाल-कस्तूरी भृगछालों पर पलथी मारे मदिरारुण आँखों वाले उन उन्मद किन्नर-किन्नरियों की मृदुल मनोरम अंगुलियों को वंशी पर फिरते देखा है बादल को घिरते देखा है। कविता में फूलों के माध्यम से किसे सजाया गया है?

शत-शत निर्झर-निर्झरणी कल मुखरित देवदारु कानन में शोणित धवल भोज-पत्रों से छाई हुई कुटी के भीतर रंग-बिरंगे और सुगंधित फूलों से कुंतल को साजे इंद्रनील की माला डाले शंख-सरीखे सुघड़ गलों में कानों में कुवलय लटकाए शतदल लाल कमल वेणी में रजत-रचित मणि खचित कलामय पान-पात्र द्राक्षासव पूरित रखे सामने अपने-अपने लोहित चंदन की त्रिपुटी पर नरम निदाग बाल-कस्तूरी भृगछालों पर पलथी मारे मदिरारुण आँखों वाले उन उन्मद किन्नर-किन्नरियों की मृदुल मनोरम अंगुलियों को वंशी पर फिरते देखा है बादल को घिरते देखा है। कविता में कवि ने गले की तुलना किससे की है?

शत-शत निर्झर-निर्झरणी कल मुखरित देवदारु कानन में शोणित धवल भोज-पत्रों से छाई हुई कुटी के भीतर रंग-बिरंगे और सुगंधित फूलों से कुंतल को साजे इंद्रनील की माला डाले शंख-सरीखे सुघड़ गलों में कानों में कुवलय लटकाए शतदल लाल कमल वेणी में रजत-रचित मणि खचित कलामय पान-पात्र द्राक्षासव पूरित रखे सामने अपने-अपने लोहित चंदन की त्रिपुटी पर नरम निदाग बाल-कस्तूरी भृगछालों पर पलथी मारे मदिरारुण आँखों वाले उन उन्मद किन्नर-किन्नरियों की मृदुल मनोरम अंगुलियों को वंशी पर फिरते देखा है बादल को घिरते देखा है। कवि किन्नर-किन्नरियों की अंगुलियों को किस पर फिरते देखता है?

शत-शत निर्झर-निर्झरणी कल मुखरित देवदारु कानन में शोणित धवल भोज-पत्रों से छाई हुई कुटी के भीतर रंग-बिरंगे और सुगंधित फूलों से कुंतल को साजे इंद्रनील की माला डाले शंख-सरीखे सुघड़ गलों में कानों में कुवलय लटकाए शतदल लाल कमल वेणी में रजत-रचित मणि खचित कलामय पान-पात्र द्राक्षासव पूरित रखे सामने अपने-अपने लोहित चंदन की त्रिपुटी पर नरम निदाग बाल-कस्तूरी भृगछालों पर पलथी मारे मदिरारुण आँखों वाले उन उन्मद किन्नर-किन्नरियों की मृदुल मनोरम अंगुलियों को वंशी पर फिरते देखा है बादल को घिरते देखा है। द्राक्षासव शब्द का अर्थ है:

शत-शत निर्झर-निर्झरणी कल मुखरित देवदारु कानन में शोणित धवल भोज-पत्रों से छाई हुई कुटी के भीतर रंग-बिरंगे और सुगंधित फूलों से कुंतल को साजे इंद्रनील की माला डाले शंख-सरीखे सुघड़ गलों में कानों में कुवलय लटकाए शतदल लाल कमल वेणी में रजत-रचित मणि खचित कलामय पान-पात्र द्राक्षासव पूरित रखे सामने अपने-अपने लोहित चंदन की त्रिपुटी पर नरम निदाग बाल-कस्तूरी भृगछालों पर पलथी मारे मदिरारुण आँखों वाले उन उन्मद किन्नर-किन्नरियों की मृदुल मनोरम अंगुलियों को वंशी पर फिरते देखा है बादल को घिरते देखा है। 'शत-शत निर्झर-निर्झरणी कल' में कौन-सा अलंकार है?