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आरोह - चार्ली चेपलिन यानि हम सब | लेख | ...

आरोह - चार्ली चेपलिन यानि हम सब | लेख | चार्ली चेपलिन यानि हम सब भाग -3

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हरा-भरा हो जीवन स्वस्थ रहे संसार, नदियाँ, पर्वत, हवा, पेड़ से आती बहार। बचपन, कोमल तन-मन लेकर, आए अनुपम जीवन लेकर, जग से तुम और तुमसे है यह प्यारा संसार, हरा-भरा हो जीवन अपना स्वस्थ रहे संसार, वृंद-लताएँ, पौधे, डाली चारों ओर भरे हरियाली मन में जगे उमंग यही है सृष्टि का उपहार, हरा-भरा हो जीवन अपना स्वस्थ रहे संसार, मुश्किल से मिलता है जीवन, हम सब इसे बनाएँ चंदन पर्यावरण सुरक्षित न हो तो है सब बेकार हरा-भरा हो जीवन अपना स्वस्थ रहे संसार। 'जग से तुम और तुम से है ये प्यारा संसार' पंक्ति के माध्यम से कवि कहना चाहता है कि

हरा-भरा हो जीवन स्वस्थ रहे संसार, नदियाँ, पर्वत, हवा, पेड़ से आती बहार। बचपन, कोमल तन-मन लेकर, आए अनुपम जीवन लेकर, जग से तुम और तुमसे है यह प्यारा संसार, हरा-भरा हो जीवन अपना स्वस्थ रहे संसार, वृंद-लताएँ, पौधे, डाली चारों ओर भरे हरियाली मन में जगे उमंग यही है सृष्टि का उपहार, हरा-भरा हो जीवन अपना स्वस्थ रहे संसार, मुश्किल से मिलता है जीवन, हम सब इसे बनाएँ चंदन पर्यावरण सुरक्षित न हो तो है सब बेकार हरा-भरा हो जीवन अपना स्वस्थ रहे संसार। हरा-भरा जीवन' का अर्थ है।