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PHYSICS
एक व्यक्ति 40 मीटर त्रिज्या के अर्धवक्रा...

एक व्यक्ति 40 मीटर त्रिज्या के अर्धवक्राकार पथ पर एक सिरे से दूसरे सिरे पर 10 सेकण्ड में पहुँचता है, व्यक्ति द्वारा तय की गई दुरी तथा उसका विस्थापन ज्ञात कीजिये

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एक व्यक्ति अपनी यात्रा का 2/5 ट्रेन से, एक तिहाई बस से, एक चौथाई कार से तथा 3km पैदल तय करता है। व्यक्ति द्वारा तय की गई दूरी बतायें -

A man is running at the speed of 20 km/hr. What is time (in seconds) taken by man to cover one round of a circular garden of radius 350 metres? एक व्यक्ति 20 किमी/घंटा की गति से दौड़ रहा है। एक वृत्ताकार बगीचा जिसकी त्रिज्या 350 मीटर है, को पार करने में व्यक्ति द्वारा कितना समय (सेंकण्ड में) लिया जायेगा ?

A man can row a distance of 900 meters against the stream in 12 minutes and returns to the starting point in 9 minutes. What is the speed (in km/h) of the man in still water ? / एक व्यक्ति धारा के विपरीत 900 मीटर की दूरी नाव से 12 मिनट में तय करता है तथा आरंभिक बिंदु पर 9 मिनट में पहुँचता है | स्थिर जल में व्यक्ति की चाल (किमी/घंटा में ) कितनी होगी ?

A man travels a certain distance at 12km/h and returns to the starting point at 9km/h. The total time taken by him for the entire journey is 2 1/3 hours. The total distance (In km) covered by him is: / एक व्यक्ति कोई निश्चित दूरी 12 किमी/घंटा की चाल से तय करता है और आरंभिक बिंदु पर 9 किमी/घंटा की चाल से लौटता है | पूरी यात्रा में उसे कुल 2 1/3 घंटे का समय लगता है | उसके द्वारा तय की गयी कुल दूरी ज्ञात करें |

A drives at the rate of 45km/h and reaches its destination 4 minutes late. If speed is 60 km/h, A reaches 5 minutes early.The distance travelled by A is : A 45 किमी/घंटा की चाल से वाहन चलाता है और अपने गंतव्य स्थल पर 4 मिनट देर से पहुँचता है | यदि चाल 60 किमी/घंटा होती है, तो A 5 मिनट पहले पहुँचता है |A द्वारा तय की गयी दूरी ज्ञात करें |

एक संस्कृत व्यक्ति किसी चीज़ की खोज करता है, किन्तु उसकी संतान को वह अपने पूर्वजों से अनायास प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी संतान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वज की भांति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकती। एक आधुनिक उदाहरण लें। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के युग का भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण से तो परिचित है ही, लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान प्राप्त है, जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित रहा। ऐसा होने पर भी हम आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी को न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले ही कह सकें, पर न्यूटन जितना संस्कृत नही कह सकते। 'न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण बल की खोज की वाक्य को कर्मवाच्य में बदलिए!

एक संस्कृत व्यक्ति किसी नई चीज की खोज करता है, किन्तु उसकी सन्तान को वह अपने पूर्वज से अनायास प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी सन्तान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वज की भाँति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकता। एक आधुनिक उदाहरण लें। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के युग का भौतिक विज्ञान क विद्यार्थी न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण से तो परिचित है ही, लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान प्राप्त है, जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित ही रहा। ऐसा होने पर भी हम आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी को न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले ही कह सकें, पर न्यूटन जितना संस्कृत नहीं कह सकते। वास्तविक संस्कृत व्यक्ति वह है जो

एक संस्कृत व्यक्ति किसी चीज़ की खोज करता है, किन्तु उसकी संतान को वह अपने पूर्वजों से अनायास प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी संतान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वज की भांति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकती। एक आधुनिक उदाहरण लें। न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के युग का भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण से तो परिचित है ही, लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान प्राप्त है, जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित रहा। ऐसा होने पर भी हम आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी को न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले ही कह सकें, पर न्यूटन जितना संस्कृत नही कह सकते। वास्तविक संस्कृत व्यक्ति वह है जो

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