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PHYSICS
एक अवतल दर्पण की फोकस दुरी 20 cm है| दर्...

एक अवतल दर्पण की फोकस दुरी 20 cm है| दर्पण के सामने 20 cm दुरी पर वास्तु रखने पर उसका प्रतिबिम्ब बनेगा-

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यदि दो समतल दर्पण 90^(@) के कोण पर रखे हो तो उनके मध्य कितने प्रतिबिम्ब बनेंगे

यदि कोई वस्तु समतल दर्पण से 5cm दूर है तो वस्तु एवं प्रतिबम्ब के मध्य दूरी ज्ञात कीजिये

The perimeter of a rhombus is 20 cm. The length of its one of the diagonals is 6 cm Find the length of the other diagonal . किसी समचतुर्भुज की परिमाप 20 cm है | इसके एक विकर्ण की लम्बाई 6 cm है | दूसरे विकर्ण की लम्बाई कितनी है?

दर्पण सूत्र न्यूटन का सूत्र एक दर्पण की शक्ति पर प्रश्न

In a circle two equal and parallel chords are 6 cm apart and lie on the opposite sides of the centre of the circle.If the length of each chord is 8 cm, than the radius of the circle is: एक वृत्त में दो बराबर और समान्तर जीवाएँ 6 cm के दुरी पर हैं और वृत्त के केंद्र के विपरीत भाग पर स्थित हैं। यदि प्रत्येक जीवाएँ की लंबाई 8 सेमी है, तो वृत्त की त्रिज्या है:

In a circle, two equal and parallel chords are 6 cm apart and they lie on the opposite sides of the centre of the circle, whose radius is 5 cm. The length of each chord (in cm), is एक वृत्त में, दो समान और समानान्तर जीवा 6 सेमी के दुरी पर हैं और वे वृत्त के केंद्र के विपरीत किनारों पर स्थित हैं, जिसकी त्रिज्या 5 सेमी है। प्रत्येक जीवा की लंबाई (सेमी में ) है:

On selling an article for Rs.800, a person loses 20% of its selling price. At what price should he sell it to gain 25% on its cost price? किसी वस्तु को 800 रुपये में बेचने पर, एक व्यक्ति को इसके विक्रय मूल्य पर 20% की हानि होती है | क्रय मूल्य पर 25% लाभ कमाने के लिए उसे इस वस्तु को किस कीमत पर बेचना चाहिए ?

एक धनी युवक सन्त के पास यह पूछने के लिए गया कि उसे अपने जीवन । में क्या करना चाहिए। सन्त उसे कमरे की खिड़की तक ले गए और उससे पूछा, "तुम्हें काँच के परे क्या दिख रहा है?" "सड़क पर लोग आ-जा रहे। हैं और एक बेचारा गरीब व्यक्ति भीख माँग रहा है।" इसके बाद सन्त ने उसे एक बड़ा दर्पण दिखाया और पूछा, "अब इस दर्पण में देखकर बताओ कि तुम क्या देखते हो।" "इसमें मैं खुद को देख रहा । "ठीक है, दर्पण में तुम दूसरों को नहीं देख सकते। तुम जानते हो कि खिड़की लगा काँच और यह दर्पण एक ही मूल पदार्थ से बने हैं। तुम स्वयं की तुलना काँच के इन दोनों रूपों से करके देखो। जब यह साधारण है तो तुम्हें सभी दिखते हैं और उन्हें देखकर तुम्हारे भीतर करुणा जागती है और जब इस काँच पर चाँदी का लेप हो जाता है, तो तुम केवल स्वयं को देखने लगते हो। "तुम्हारा जीवन भी तभी महत्त्वपूर्ण बनेगा जब तुम अपन आँखों पर लगी चाँदी की परत को उतार दो। "......." अपनी आँखों पर लगी चाँदी की परत को उतार दो।" इस - वाक्य का निहितार्थ है

एक धनी युवक सन्त के पास यह पूछने के लिए गया कि उसे अपने जीवन । में क्या करना चाहिए। सन्त उसे कमरे की खिड़की तक ले गए और उससे पूछा, "तुम्हें काँच के परे क्या दिख रहा है?" "सड़क पर लोग आ-जा रहे। हैं और एक बेचारा गरीब व्यक्ति भीख माँग रहा है।" इसके बाद सन्त ने उसे एक बड़ा दर्पण दिखाया और पूछा, "अब इस दर्पण में देखकर बताओ कि तुम क्या देखते हो।" "इसमें मैं खुद को देख रहा । "ठीक है, दर्पण में तुम दूसरों को नहीं देख सकते। तुम जानते हो कि खिड़की लगा काँच और यह दर्पण एक ही मूल पदार्थ से बने हैं। तुम स्वयं की तुलना काँच के इन दोनों रूपों से करके देखो। जब यह साधारण है तो तुम्हें सभी दिखते हैं और उन्हें देखकर तुम्हारे भीतर करुणा जागती है और जब इस काँच पर चाँदी का लेप हो जाता है, तो तुम केवल स्वयं को देखने लगते हो। "तुम्हारा जीवन भी तभी महत्त्वपूर्ण बनेगा जब तुम अपन आँखों पर लगी चाँदी की परत को उतार दो। "दर्पण में हम दूसरों को नहीं देख सकते।" इस वाक्य का निहितार्थ है।

एक धनी युवक सन्त के पास यह पूछने के लिए गया कि उसे अपने जीवन । में क्या करना चाहिए। सन्त उसे कमरे की खिड़की तक ले गए और उससे पूछा, "तुम्हें काँच के परे क्या दिख रहा है?" "सड़क पर लोग आ-जा रहे। हैं और एक बेचारा गरीब व्यक्ति भीख माँग रहा है।" इसके बाद सन्त ने उसे एक बड़ा दर्पण दिखाया और पूछा, "अब इस दर्पण में देखकर बताओ कि तुम क्या देखते हो।" "इसमें मैं खुद को देख रहा । "ठीक है, दर्पण में तुम दूसरों को नहीं देख सकते। तुम जानते हो कि खिड़की लगा काँच और यह दर्पण एक ही मूल पदार्थ से बने हैं। तुम स्वयं की तुलना काँच के इन दोनों रूपों से करके देखो। जब यह साधारण है तो तुम्हें सभी दिखते हैं और उन्हें देखकर तुम्हारे भीतर करुणा जागती है और जब इस काँच पर चाँदी का लेप हो जाता है, तो तुम केवल स्वयं को देखने लगते हो। "तुम्हारा जीवन भी तभी महत्त्वपूर्ण बनेगा जब तुम अपन आँखों पर लगी चाँदी की परत को उतार दो। सन्त ने युवक को काँच और दर्पण क्यों दिखाए?

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