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12 HP की एक मोटर 8 घंटे प्रतिदिन काम मे...

12 HP की एक मोटर 8 घंटे प्रतिदिन काम मे लायी जा रही है। यदि हम मोटर को 10 दिन तक काम मे लाते हैं , तो 50 पैसे प्रति किलो वाट घण्टा के हिसाब से कितना खर्च आएगा ?

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Working alone A can do a work in 72 days and B in 90 days. If they work on it together for 10 days, then what fraction of work is left? A अकेले कार्य करते हुए 72 दिनों में एक काम कर सकता है और B उसे 90 दिनों में कर सकता है। यदि वे 10 दिनों तक एक साथ उस काम को करते हैं, तो काम का कितना अंश बच जाता है?

A can do a piece of work alone in 8 days. B can do the same work alone in 21 days. If they work together for 3 days, then how much work is completed? A अकेले किसी कार्य को 8 दिनों में पूरा कर सकता है, B वही कार्य अकेले 21 दिनों में कर सकता है। यदि वे 3 दिनों के लिए एक साथ काम करते हैं, तो कितना काम पूरा होता है?

A person is employed by a company on a salary of Rs6,000 per month. Throughout the year, he remained absent from work for 15 days. If Rs200 gets deducted for every single holiday, then how much money will he earn at the end of the year? एक व्यक्ति को एक कम्पनी में प्रति माह Rs. 6000 पर कार्यरत किया जाता है | पुरे वर्ष में वह 15 दिनों के लिए काम से छुट्टी लेता है | यदि हर अवकाश के लिए उसके Rs. 200 कटते है तो बताएं की वह साल के अंत में कितने पैसे कमाएगा ?

The owner of a bike buys petrol at the rate of Rs. 64, Rs. 80 and Rs. 320 per litre for three consecutive years. If he spends Rs. 32000 on petrol every year, then what is the average price of petrol per litre ? एक बाइक का मालिक लगातार 3 वर्षों तक क्रमश: रु 64, रु 80 और रु 320 प्रति लीटर के हिसाब से पेट्रोल खरीदता है | यदि वह पेट्रोल खरीदने में हर वर्ष रु 32000 खर्च करता है, तो पेट्रोल का प्रति लीटर औसत मूल्य कितना है ?

240 men can finish a work in 20 days working 5 hours a day. To finish the work within 10 days working 8 hours a day, the minimum number of men required is 240 आदमी प्रतिदिन 5 घंटे काम करके एक काम को 20 दिन में पूरा कर सकते है। उसी काम को प्रतिदिन 8 घंटे काम करके 10 दिन के भीतर पूरा करने के लिए अपेक्षित आदमियों की न्यूनतम संख्या है-

हमारे व्यावहारिक अथवा वास्तविक जीवन में भी यही सिद्धांत काम करता है कि हम समाज अथवा लोगों को जो देते हैं वही हमारे पास लौटकर आता है। हम लोगों से प्यार करते हैं तो लोग भी हमें प्यार करते हैं लेकिन यदि हम लोगों से घृणा करते हैं तो वे भी हमसे घृणा ही करेंगे इसमें संदेह नहीं। यदि हम सबके साथ सहयोग करते हैं अथवा ईमानदार बने रहते हैं तो दूसरे भी हमारे प्रति सहयोगात्मक और ईमानदार हो जाते है। इसे आकर्षण का नियम कहा गया है। हम जैसा स्वभाव विकसित कर लेते हैं वैसी ही चीजें हमारी ओर आकर्षित होती हैं। गंदगी मक्खी को आकर्षित करती है तो फूल तितली को आकर्षित करते हैं। यदि हम स्वयं को फूल जैसा सुंदर, सुवासित, मसृण व रंगीन अर्थात सुंदर गुणों से युक्त बना लेंगे तो स्वाभाविक है कि समाज के सुंदर गुणी व्यक्ति हमारी ओर आकर्षित होंगे ही। यदि हम चाहते हैं कि हमारे संपर्क में केवल अच्छे लोग ही आएँ तो हमें स्वयं को उनके अनुरूप बनाना होगा - दुर्गुणों में नहीं, सदगुणों में। अपने व्यवहार को व्यवस्थित व आदतों को अच्छा करना होगा। अपनी वाणी को कोमल व मधुर बनाना होगा। केवल मात्र बाहर से नहीं, मन की गहराइयों में रचयं को सुंदर बनाना होगा। यदि हम बाहरी रुप स्वरुप से नहीं, वरन मन से सुंदर बन पाते है तो विचार और कर्म स्वयं सुंदर हो जाएंगे। जीवन रूपी सितार ठीक बजने लगेगा। जीवन के प्रति सत्यम् शिवम् और सुंदरम् का आकर्षण बढ़ने लगेगा। हमारे व्यवहार और कार्य स्वयं ठीक से हो जाएंगे यदि हम

हमारे व्यावहारिक अथवा वास्तविक जीवन में भी यही सिद्धांत काम करता है कि हम समाज अथवा लोगों को जो देते हैं वही हमारे पास लौटकर आता है। हम लोगों से प्यार करते हैं तो लोग भी हमें प्यार करते हैं लेकिन यदि हम लोगों से घृणा करते हैं तो वे भी हमसे घृणा ही करेंगे इसमें संदेह नहीं। यदि हम सबके साथ सहयोग करते हैं अथवा ईमानदार बने रहते हैं तो दूसरे भी हमारे प्रति सहयोगात्मक और ईमानदार हो जाते है। इसे आकर्षण का नियम कहा गया है। हम जैसा स्वभाव विकसित कर लेते हैं वैसी ही चीजें हमारी ओर आकर्षित होती हैं। गंदगी मक्खी को आकर्षित करती है तो फूल तितली को आकर्षित करते हैं। यदि हम स्वयं को फूल जैसा सुंदर, सुवासित, मसृण व रंगीन अर्थात सुंदर गुणों से युक्त बना लेंगे तो स्वाभाविक है कि समाज के सुंदर गुणी व्यक्ति हमारी ओर आकर्षित होंगे ही। यदि हम चाहते हैं कि हमारे संपर्क में केवल अच्छे लोग ही आएँ तो हमें स्वयं को उनके अनुरूप बनाना होगा - दुर्गुणों में नहीं, सदगुणों में। अपने व्यवहार को व्यवस्थित व आदतों को अच्छा करना होगा। अपनी वाणी को कोमल व मधुर बनाना होगा। केवल मात्र बाहर से नहीं, मन की गहराइयों में रचयं को सुंदर बनाना होगा। यदि हम बाहरी रुप स्वरुप से नहीं, वरन मन से सुंदर बन पाते है तो विचार और कर्म स्वयं सुंदर हो जाएंगे। जीवन रूपी सितार ठीक बजने लगेगा। जीवन के प्रति सत्यम् शिवम् और सुंदरम् का आकर्षण बढ़ने लगेगा। फूल के लिए कौन-सा विशेषण ul(" अनुपयुक्त ") है?

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