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PHYSICS
5 किग्रा द्रव्यमान एवं 0.4 मीटर त्रिजया ...

5 किग्रा द्रव्यमान एवं 0.4 मीटर त्रिजया की एक डिस्क अपनी अक्ष के परितः 28 चक्कर/सेकण्ड की दर से घूर्णन कर रही है। इसका कोणीय संवेग एवं घूर्णन गतिज ऊॅर्जा ज्ञात कीजिए। (`pi=22/7`)

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एक 5 kg द्रव्यमान वाली वस्तु पर 2s के लिये एक नियत बल कार्यरत होता है। यह वस्तु के वेग को 3m/s से बढा 7m/s कर देता है। लगाये गये बल की मात्रा ज्ञात करें

The radius of a solid right circular cylinder is 21 cm and its height is 40 cm. What is the cost of painting the curved surface area of the cylinder at the rate of Rs. 20 per sq.cm? (Take pi=22/7 ) एक ठोस लम्ब वृत्तीय बेलन की त्रिज्या 21 सेमी है तथा इसकी ऊंचाई 40 सेमी है | 20 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से इस बेलन के वक्र पृष्ठ क्षेत्र को रंगने की लागत ज्ञात करें |

The radius and height of a cylinder are in the ratio 4: 7 and its volume is 2816 cm^3 . Find its radius. (Take pi=22/7 ) एक बेलन की त्रिज्या और ऊँचाई का अनुपात 4 : 7 है और इसका आयतन 2816 cm^3 है। इसकी त्रिज्या ज्ञात कीजिए। ( pi=22/7 लें)

संस्कृतियों के निर्माण में एक सीमा तक. देश व जाति का योगदान रहता है। संस्कृति के मूल उपादान तो प्रायः सुसंस्कृत और सभ्य देशों में एक सीमा तक समान रहते हैं, किन्तु बाह्य उपादानों में अन्तर अवश्य आता है, राष्ट्रीय या जातीय संस्कृति का सबसे बड़ा योगदान यही है कि वह हमें अपने राष्ट्र की परम्परा से संपृक्त बनाती है, रीति-नीति की सम्पदा को विच्छिन्न नहीं होने देती। आज के युग में राष्ट्रीय एवं जातीय संस्कृतियों के मिले अवसर अति सुलभ हो गए हैं। संस्कृतियों का पारस्परिक संघर्ष भी शुरू हो गया है। कुछ ऐसे विदेशी प्रभाव देश पर पड़ रहे हैं, जिनके आतंक ने हमें स्वयं अपनी संस्कृति के प्रति शंकालु बना दिया है। हमारी आस्था डिगने लगी है। यह हमारी वैचारिक दुर्बलता का फल है। अपनी संस्कृति को छोड़ विदेशी संस्कृति के विवेकहीन अनुकरण से हमारे राष्ट्रीय गौरव को जो ठेस पहुँच रही है। वह किसी राष्ट्रप्रेमी जागरूक व्यक्ति से छिपी नहीं। भारतीय संस्कृति में त्याग और ग्रहण की अद्भुत क्षमता रही है। अत: आज के वैज्ञानिक युग में हम किसी विदेशी संस्कृति के जीवन्त तत्त्वों को ग्रहण करने में पीछे नहीं रहना चाहेंगे, किन्तु अपनी सांस्कृतिक निधि की करके नहीं। यह परावलम्बन राष्ट्र की गरिमा के अनुरूप नहीं है। यह स्मरण रखना चाहिए कि सूर्य की आलोक प्रदायिनी किरणों से पौधे को चाहे जितनी जीवन शक्ति मिले, किन्तु अपनी जमीन और अपनी जड़ों के बिना पौधा जीवित नहीं रह सकता। अविवेकी अनुकरण अज्ञान का ही पर्याय है। हम अपनी सांस्कृतिक परम्परा की उपेक्षा इसलिए नहीं कर सकते, क्योंकि

The volume of a conical tent is 1232 sq. m and the area of its base is 154 sq. m. Find the length of the canvas required to build the tent if the canvas is 2 m in width. (Take pi =22/7) एक शांकव तंबू का आयतन 1232 घन मीटर है और उसके आधार का क्षेत्रफल 154 वर्ग मीटर है। तदनुसार ( pi =22/7 मानकर) उस तंबू को बनाने के लिए आवश्यक कैन्वास की लम्बाई ज्ञात कीजिए, यदि उपलब्ध कैन्वास केवल 2 मीटर चौड़ा हो।

संस्कृतियों के निर्माण में एक सीमा तक. देश व जाति का योगदान रहता है। संस्कृति के मूल उपादान तो प्रायः सुसंस्कृत और सभ्य देशों में एक सीमा तक समान रहते हैं, किन्तु बाह्य उपादानों में अन्तर अवश्य आता है, राष्ट्रीय या जातीय संस्कृति का सबसे बड़ा योगदान यही है कि वह हमें अपने राष्ट्र की परम्परा से संपृक्त बनाती है, रीति-नीति की सम्पदा को विच्छिन्न नहीं होने देती। आज के युग में राष्ट्रीय एवं जातीय संस्कृतियों के मिले अवसर अति सुलभ हो गए हैं। संस्कृतियों का पारस्परिक संघर्ष भी शुरू हो गया है। कुछ ऐसे विदेशी प्रभाव देश पर पड़ रहे हैं, जिनके आतंक ने हमें स्वयं अपनी संस्कृति के प्रति शंकालु बना दिया है। हमारी आस्था डिगने लगी है। यह हमारी वैचारिक दुर्बलता का फल है। अपनी संस्कृति को छोड़ विदेशी संस्कृति के विवेकहीन अनुकरण से हमारे राष्ट्रीय गौरव को जो ठेस पहुँच रही है। वह किसी राष्ट्रप्रेमी जागरूक व्यक्ति से छिपी नहीं। भारतीय संस्कृति में त्याग और ग्रहण की अद्भुत क्षमता रही है। अत: आज के वैज्ञानिक युग में हम किसी विदेशी संस्कृति के जीवन्त तत्त्वों को ग्रहण करने में पीछे नहीं रहना चाहेंगे, किन्तु अपनी सांस्कृतिक निधि की करके नहीं। यह परावलम्बन राष्ट्र की गरिमा के अनुरूप नहीं है। यह स्मरण रखना चाहिए कि सूर्य की आलोक प्रदायिनी किरणों से पौधे को चाहे जितनी जीवन शक्ति मिले, किन्तु अपनी जमीन और अपनी जड़ों के बिना पौधा जीवित नहीं रह सकता। अविवेकी अनुकरण अज्ञान का ही पर्याय है। हम विदेशी संस्कृति के महत्त्वपूर्ण तत्त्वों को ग्रहण कर सकते हैं, क्योंकि

A and B started their journeys from X to Y and Y to X, respectively. After crossing each other, A and B completed the remaining parts of their journey in 6 1/8 h and 8h respectively. If the speed of B is 28 km/h, then the speed (in km/h), then the speed (in km/h) of A is : A और B ने क्रमशः X से Y और Y से X तक की अपनी यात्राएं शुरू की | एक-दूसरे को पार करने के बाद, A और B ने अपनी यात्रा का शेष भाग क्रमशः 6 1/8 घंटे एवं 8 घंटे में पूरा किया | यदि B की चाल 28 किमी/घंटा है, तो A की चाल ( किमी/घंटा में ) ज्ञात करें |

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