प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में धारा व विभवान्तर के बीच कालान्तर से आप क्या समझते है? ग्राफ द्वारा समझाइए, जबकि
धारा, कला विभवान्तर से कला में कोण `pi//2` अग्रगामी है ।
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आधुनिक शिक्षण संस्थाएँ ही नहीं, बल्कि परिवार एवं समाज के अन्य सदस्य। भी अपने कार्य एवं व्यवहार से मनुष्य के शिक्षण में सहायक होते हैं। किसी भी क्षेत्र विशेष के लोगों पर उसके क्षेत्र का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यह प्रभाव भाषा ही नहीं व्यवहार में भी दिखाई पड़ता है। इस तरह की शिक्षा को अनौपचारिक शिक्षण के अन्तर्गत रखा जाता है। इस तरह सामान्य रूप से शिक्षा की दो प्रणालियाँ होती हैं-औपचारिक शिक्षा एवं अनौपचारिक शिक्षा। मुक्त विद्यालय एवं विश्वविद्यालय अनौपचारिक शिक्षा के ही उदाहरण हैं। इनके अलावा परिवार के सदस्य भी बालकों की शिक्षा में प्रत्यक्ष रूप से अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हैं। समुदाय के अन्य सदस्यों की भी इसमें सहभागिता होती है। बालक अपनी परम्परा एवं अपने रीतिरिवाजों को समाज के अन्य सदस्यों द्वारा ही सीखता है। बालकों पर उसके परिवेश उसके साथियों का भी प्रभाव पड़ता है। गलत संगति में बालकों में गलत आदतों का विकास अथवा आपराधिक प्रवृत्तियों में लिप्त हो जाना इसका उदाहरण है। औपचारिक शिक्षा में शिक्षण का स्थान सुनिश्चित होता है, जबकि अनौपचारिक में ऐसा नहीं। होता। औपचारिक शिक्षा में प्रवेश के लिए आयु-सीमा निर्धारित होती है, जबकि अनौपचारिक शिक्षा में ऐसी कोई बाध्यता नहीं होती है। अनौपचारिक शिक्षा के द्वारा शिक्षा से वंचित समाज के पिछड़े लोगों एवं प्रौढ़ों को शिक्षित करने में सहायता मिलती है। अनौपचारिक शिक्षा में औपचारिक शिक्षा जैसे कठोर नियम नहीं होते ये अत्यधिक लचीले होते हैं। अनौपचारिक शिक्षा के जरिए औपचारिक शिक्षा से वंचित समाज के पिछड़े लोगों को शिक्षित करने में सहायता मिलती है। प्रौढ़ शिक्षा एवं स्त्री शिक्षा इसी का उदाहरण है। औपचारिक शिक्षा समाजीय व्यवस्था की एक उपव्यवस्था के रूप में कार्य करती है। इस पर परिवार, संस्कृति, राज्य, धर्म, अर्थव्यवस्था एवं समाज के स्पष्ट प्रभाव होता है, क्योंकि यह इन सभी से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सम्बन्धित होता है। सिर्फ शिक्षा पर ही समाज का प्रभाव नहीं होता, बल्कि शिक्षा भी समाज को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। शिक्षा के परिणामस्वरूप ही भारत में स्त्रियों की स्थिति में सुधार हुआ है। शहरीकरण, सामाजिक स्थितियों में बदलाव, संयुक्त परिवारों का एकल परिवारों के रूप में विभाजन ये सभी शिक्षा का समाज पर प्रभाव स्पष्ट करते हैं। मानव किसकी सहायता से शिक्षा प्राप्त करता है?
जड़त्व के चैतन्य के साथ लगातार रहवासी बनकर पुल स्वयं चैतन्यमय हो उठता है प्राकृतिक जड़ भी अपनी अंतवर्ती चेतना में प्राणवान है मनुष्य द्वारा निर्मित पुरातत्व भी प्रकृति के इन्ही है प्राणो से मिलकर उसके साहचर्य के परिणाम स्वरूप कालांतर में प्रकृति में ही तब्दील हो जाता है। प्रकृति , जो ऊपर से जड़ दिखती है वह अपनी गतिशील उपस्थिति में सक्रीय और जीवट है। पहाड़ , नदी , निर्झर , पेड़ , गलम , वीरुघि सभी जड़ प्राकृति के चैतन्य अंश से लबालब है इनकी गतिमीयता , इनकी परिवर्तनशीलता कभी - कभी अलक्षित रहकर भी अपनी जीवंतता को प्रमाणित करती रहती है इसी जीवंतता के साथ मनुष्यकृत किले , पुल , मंदिर अपनी दीर्घयात्रा में प्रकृति गतिशील अंग बन जाते है। नदी की गतिशील भंगिमाओं , नदी की बदलती छवियों , नदी की जिवंत हरकतों के बीच बरसो से खड़ा पुल अपनी लखोरी ईंटो में अनंत सुर्यास्तो की लालिमा से रंजीत मात्र एक दृश्य नहीं रह जाता है। उसके व्यक्तित्व की रक्तिम आभा सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक न जाने कितने शेड्स में बदलकर उसे प्रकृति का हिस्सा बना देती है उसे अनंत रंग - स्पन्दों में बदल देती है नदी के बरजोर प्रवाह से निरंतर होड़ लेती आदि धार में कड़ी अपना प्रतिबिम्ब झांकती पुल की मेहराबे , तिकोने अनियारे दृढ़व्रती स्तम्भ और पुल के अंतराल में अनुगूँज भर्ती लहरों की लीला -ध्वनियाँ पुल को महज चुना , ईंट , रेत, पत्थर , लोहा और अन्य पार्थिव वस्तुओ का संपुंजित सायुज्य नहीं रहने देती है। कालांतर में पुल प्रकृति में तब्दील होकर चैतन्य में अपनी संवेदना -प्रणाली का भाव -विस्तार बनकर विराट जीवन की स्पंदित फांक बन जाता है। ऐसे में पुल केवल यात्राओं का साधन नहीं रहता है , वह अनेक सांस्कृतिक यात्राओं की बिम्बधमी फ्लापी नदी के विस्तृत मॉनिटर -पॉट के लहरीले स्क्रीन पर अनेक दृशय इबारते लिखता रहता है। नदी की धारा में अपना प्रतिबिम्ब कौन निहारती है ?
आधुनिक शिक्षण संस्थाएँ ही नहीं, बल्कि परिवार एवं समाज के अन्य सदस्य। भी अपने कार्य एवं व्यवहार से मनुष्य के शिक्षण में सहायक होते हैं। किसी भी क्षेत्र विशेष के लोगों पर उसके क्षेत्र का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यह प्रभाव भाषा ही नहीं व्यवहार में भी दिखाई पड़ता है। इस तरह की शिक्षा को अनौपचारिक शिक्षण के अन्तर्गत रखा जाता है। इस तरह सामान्य रूप से शिक्षा की दो प्रणालियाँ होती हैं-औपचारिक शिक्षा एवं अनौपचारिक शिक्षा। मुक्त विद्यालय एवं विश्वविद्यालय अनौपचारिक शिक्षा के ही उदाहरण हैं। इनके अलावा परिवार के सदस्य भी बालकों की शिक्षा में प्रत्यक्ष रूप से अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हैं। समुदाय के अन्य सदस्यों की भी इसमें सहभागिता होती है। बालक अपनी परम्परा एवं अपने रीतिरिवाजों को समाज के अन्य सदस्यों द्वारा ही सीखता है। बालकों पर उसके परिवेश उसके साथियों का भी प्रभाव पड़ता है। गलत संगति में बालकों में गलत आदतों का विकास अथवा आपराधिक प्रवृत्तियों में लिप्त हो जाना इसका उदाहरण है। औपचारिक शिक्षा में शिक्षण का स्थान सुनिश्चित होता है, जबकि अनौपचारिक में ऐसा नहीं। होता। औपचारिक शिक्षा में प्रवेश के लिए आयु-सीमा निर्धारित होती है, जबकि अनौपचारिक शिक्षा में ऐसी कोई बाध्यता नहीं होती है। अनौपचारिक शिक्षा के द्वारा शिक्षा से वंचित समाज के पिछड़े लोगों एवं प्रौढ़ों को शिक्षित करने में सहायता मिलती है। अनौपचारिक शिक्षा में औपचारिक शिक्षा जैसे कठोर नियम नहीं होते ये अत्यधिक लचीले होते हैं। अनौपचारिक शिक्षा के जरिए औपचारिक शिक्षा से वंचित समाज के पिछड़े लोगों को शिक्षित करने में सहायता मिलती है। प्रौढ़ शिक्षा एवं स्त्री शिक्षा इसी का उदाहरण है। औपचारिक शिक्षा समाजीय व्यवस्था की एक उपव्यवस्था के रूप में कार्य करती है। इस पर परिवार, संस्कृति, राज्य, धर्म, अर्थव्यवस्था एवं समाज के स्पष्ट प्रभाव होता है, क्योंकि यह इन सभी से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सम्बन्धित होता है। सिर्फ शिक्षा पर ही समाज का प्रभाव नहीं होता, बल्कि शिक्षा भी समाज को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है। शिक्षा के परिणामस्वरूप ही भारत में स्त्रियों की स्थिति में सुधार हुआ है। शहरीकरण, सामाजिक स्थितियों में बदलाव, संयुक्त परिवारों का एकल परिवारों के रूप में विभाजन ये सभी शिक्षा का समाज पर प्रभाव स्पष्ट करते हैं। गलत संगति में बालकों में गलत आदतों का विकास किसका उदाहरण है?
A boat can go 30 km downstream and 24 km upstream in 2 hours 27 minutes. Also, it can go 10 km downstream and 4 km upstream in 37 minutes. What is the speed of the boat upstream (in km/h)? एक नाव 2 घंटे 27 मिनट में धारा के अनुकूल 30 किमी तथा धारा के प्रतिकूल 24 किमी जा सकती है| साथ ही, यह 37 मिनट में 10 किमी धारा के अनुकूल तथा 4 किमी धारा के प्रतिकूल जा सकती है| धारा के प्रतिकूल नाव की चाल ( किमी/घंटा में) क्या है ?
A boat can go 20 km downstream and 30 km upstream in 2 hours 20 minutes. Also, it can go 10 km downstream and 8 km upstream in 49 minutes. What is the speed of boat downstream in km/h? एक नाव 2 घंटे 20 मिनट में 20 किमी धारा के अनुकूल और 30 किमी धारा के प्रतिकूल जा सकती है | साथ ही, यह 49 मिनट में 10 किमी धारा के अनुकूल और 8 किमी धारा के प्रतिकूल जा सकती है | धारा के अनुकूल नाव की चाल ( किमी/घंटा में) ज्ञात करें |
The speed of a boat in still water is 6 km/h. Time taken by the boat to cover a certain distance upstream is 3 hours more than the time taken to cover the same distance downstream. If the speed of the stream is 2 km/h, then what is the total distance, upstream and downstream, covered by the boat? स्थिर जल में किसी नाव की चाल 6 किमी/घंटा है | धारा के विपरीत किसी निश्चित दूरी को तय करने में नाव को लगने वाला समय धारा के अनुकूल इसी दूरी को तय करने में लगने वाले समय से 3 घंटा अधिक है | यदि धारा की चाल 2 किमी/घंटा है, तो नाव के द्वारा धारा के विपरीत तथा धारा के अनुकूल तय की गयी कुल दूरी ज्ञात करें |
A boat can go 30 km downstream and 24 km upstream in 2 hours 27 minutes.Also, it can go 20km downstream and 8 km upstream in 74 minutes. What is the speed of the boat in still water in km/h? एक नाव 2 घंटे 27 मिनट में 30 किमी धारा के अनुकूल और 24 किमी धारा के प्रतिकूल जा सकती है | साथ ही, यह 74 मिनट में 20 किमी धारा के अनुकूल और 8 किमी धारा के प्रतिकूल जा सकती है | स्थिर जल में नाव की चाल ( किमी/घंटा में ) ज्ञात करें |
A boat takes half time in moving a certain distance downstream than upstream. The ratio of the speed of the boat in still water and that current is एक नाव की किसी निश्चित दूरी को धारा के विपरीत दिशा में जाने मे लगे समय की अपेक्षा धारा के दिशा मे जाने में आधा समय लगता है। शांत जल मे नाव और धारा की गति का अनुपात क्या है?
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