10 kHz आवृत्ति तथा 10 V शिखर वोल्टता के सन्देश सिंग्नल का उपयोग किसी 1 MHz आवृत्ति तथा 20 शिखर वोल्टता कि वाहक तरंग को मॉडुलित करने में किया जाता है।
उतपन्न पार्श्व बैंड ज्ञात कीजिये
10 kHz आवृत्ति तथा 10 V शिखर वोल्टता के सन्देश सिंग्नल का उपयोग किसी 1 MHz आवृत्ति तथा 20 शिखर वोल्टता कि वाहक तरंग को मॉडुलित करने में किया जाता है।
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A ,B, and C started a business by investing Rs. 55,000 , Rs. 65,000 and Rs. 75,000 respectively. A is a working partner and gets 20% of the profit as a working allowance and remaining is distributed in the proportion of their investment. If the money received by C is Rs. 27,000 what is total profit? A, B और C ने क्रमशः 55,000 रुपये, 65,000 रुपये तथा 75,000 रुपये निवेश करने एक व्यवसाय की शुरुआत की |A कार्यशील साझेदार है और उसे लाभ का 20% कार्यकारी भत्ते के रूप में दिया जाता है तथा शेष लाभ का वितरण उनके निवेश के अनुपात में किया जाता है | यदि C के द्वारा प्राप्त राशि 27000 रुपये है, तो कुल लाभ क्या है ?
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये बहुविकल्पी प्रश्नों में सही विकल्प का चयन करों। क्रोध को हम एक बहुत ही हानि रहित कमजोरी की तरह देखने के लिए प्रवृत होते हैं। इसे हम महज एक प्राकृतिक दुर्बलता,एक पारिवारिक असफलता, एक स्वभाव संबधी विषय के रूप वर्णित करते हैं न कि किसी व्यक्ति के चरित्र का आकलन करने हेतु गम्भीरता से गणना में सम्मिलित करने का तत्व है और बाइबल मानव स्वभाव के सर्वाधिक विनाशकारी तत्वों में से एक के रूप में इसकी भर्त्सना करती है। क्रोध की एक विशेषता यह है कि यह गुणवान लोगों का एक अवगुण है तथा उच्च चरित्र वाले माने जाने वाले व्यक्ति पर यह अक्सर एक कलंक की तरह होता है। क्रोधी स्वभाव और उच्च नैतिक चरित्र के बीच में यह अनुकूलता आचार शास्त्र की सर्वाधिक विलक्षण एवं दुखद समस्यायों में से एक है। किसी भी प्रकार का पाप, कोई भी शराबखोरी या नशेबाजी समाज को इतना मानवता विहीन नहीं बनाते जितना क्रोध बनाता है। जीवन को कडुआ बना देने, जन समुदायों को तोड़ने ,पवित्रतम रिश्तों-नातों को नष्ट करने, घरों को बर्बाद करने, पुरुष तथा महिलाओं को मुरझा देने, बचपन से उसकी ताजगी और खिलखिलाहट छिन लेने, संक्षिप्त में एक शुद्ध स्वयमेव दुखोत्पादक शक्ति के रूप में क्रोध की सत्ता सर्वोपरि है। ईर्ष्या, घमंड, अनुदारता, निर्दयता, स्वयं को सही समझने की प्रवृति, भड़कीलापन , अड़ियलपन, उदासी- कम ज्यादा मात्रा में ये सब उग्र स्वभाव के ही तत्त्व है। इस प्रकार के स्वभाव के लिए स्वर्ग में सचमुच ही कोई स्थान नहीं है। इस प्रकार की मनःस्थितिवाला व्यक्ति स्वर्ग में स्थित सभी लोगों के लिए जीवन केवल यातनापूर्ण ही बनाएगा। प्रस्तुत गद्य में क्रोधी स्वभाव का आंकलन किया है
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये बहुविकल्पी प्रश्नों में सहीविकल्प का चयन करों। क्रोध को हम एक बहुत ही हानि रहित कमजोरी की तरह देखने के लिए प्रवृत होते हैं। इसे हम महज एक प्राकृतिक दुर्बलता,एक पारिवारिक असफलता, एक स्वभाव संबधी विषय के रूप वर्णित करते हैं न कि किसी व्यक्ति के चरित्र का आकलन करने हेतु गम्भीरता से गणना में सम्मिलित करने का तत्व है और बाइबल मानव स्वभाव के सर्वाधिक विनाशकारी तत्वों में से एक के रूप में इसकी भर्त्सना करती है। क्रोध की एक विशेषता यह है कि यह गुणवान लोगों का एक अवगुण है तथा उच्च चरित्र वाले माने जाने वाले व्यक्ति पर यह अक्सर एक कलंक की तरह होता है। क्रोधी स्वभाव और उच्च नैतिक चरित्र के बीच में यह अनुकूलता आचार शास्त्र की सर्वाधिक विलक्षण एवं दुखद समस्यायों में से एक है। किसी भी प्रकार का पाप, कोई भी शराबखोरी या नशेबाजी समाज को इतना मानवता विहीन नहीं बनाते जितना क्रोध बनाता है। जीवन को कडुआ बना देने, जन समुदायों को तोड़ने ,पवित्रतम रिश्तों-नातों को नष्ट करने, घरों को बर्बाद करने, पुरुष तथा महिलाओं को मुरझा देने, बचपन से उसकी ताजगी और खिलखिलाहट छिन लेने, संक्षिप्त में एक शुद्ध स्वयमेव दुखोत्पादक शक्ति के रूप में क्रोध की सत्ता सर्वोपरि है। ईर्ष्या, घमंड, अनुदारता, निर्दयता, स्वयं को सही समझने की प्रवृति, भड़कीलापन , अड़ियलपन, उदासी- कम ज्यादा मात्रा में ये सब उग्र स्वभाव के ही तत्त्व है। इस प्रकार के स्वभाव के लिए स्वर्ग में सचमुच ही कोई स्थान नहीं है। इस प्रकार की मनःस्थितिवाला व्यक्ति स्वर्ग में स्थित सभी लोगों के लिए जीवन केवल यातनापूर्ण ही बनाएगा। क्रोध की एक विशेषता है कि
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भाँति अशुभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह स्मरण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप नहीं कर सकता है। किंतु कुछ लोग अंधकार को स्वीकार करने से बचने के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत् उपक्रम बन जाता है। जीवन में बहुत अंधकार हैं। रेखांकित अंश में कौन सा कारक है?
गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भाँति अशुभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह स्मरण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप नहीं कर सकता है। किंतु कुछ लोग अंधकार को स्वीकार करने से बचने के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत् उपक्रम बन जाता है। इस गद्यांश में 'उपक्रम' का अर्थ है
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये बहुविकल्पी प्रश्नों में सही विकल्प का चयन करों। क्रोध को हम एक बहुत ही हानि रहित कमजोरी की तरह देखने के लिए प्रवृत होते हैं। इसे हम महज एक प्राकृतिक दुर्बलता,एक पारिवारिक असफलता, एक स्वभाव संबधी विषय के रूप वर्णित करते हैं न कि किसी व्यक्ति के चरित्र का आकलन करने हेतु गम्भीरता से गणना में सम्मिलित करने का तत्व है और बाइबल मानव स्वभाव के सर्वाधिक विनाशकारी तत्वों में से एक के रूप में इसकी भर्त्सना करती है। क्रोध की एक विशेषता यह है कि यह गुणवान लोगों का एक अवगुण है तथा उच्च चरित्र वाले माने जाने वाले व्यक्ति पर यह अक्सर एक कलंक की तरह होता है। क्रोधी स्वभाव और उच्च नैतिक चरित्र के बीच में यह अनुकूलता आचार शास्त्र की सर्वाधिक विलक्षण एवं दुखद समस्यायों में से एक है। किसी भी प्रकार का पाप, कोई भी शराबखोरी या नशेबाजी समाज को इतना मानवता विहीन नहीं बनाते जितना क्रोध बनाता है। जीवन को कडुआ बना देने, जन समुदायों को तोड़ने ,पवित्रतम रिश्तों-नातों को नष्ट करने, घरों को बर्बाद करने, पुरुष तथा महिलाओं को मुरझा देने, बचपन से उसकी ताजगी और खिलखिलाहट छिन लेने, संक्षिप्त में एक शुद्ध स्वयमेव दुखोत्पादक शक्ति के रूप में क्रोध की सत्ता सर्वोपरि है। ईर्ष्या, घमंड, अनुदारता, निर्दयता, स्वयं को सही समझने की प्रवृति, भड़कीलापन , अड़ियलपन, उदासी- कम ज्यादा मात्रा में ये सब उग्र स्वभाव के ही तत्त्व है। इस प्रकार के स्वभाव के लिए स्वर्ग में सचमुच ही कोई स्थान नहीं है। इस प्रकार की मनःस्थितिवाला व्यक्ति स्वर्ग में स्थित सभी लोगों के लिए जीवन केवल यातनापूर्ण ही बनाएगा। गद्यांश में आए जीवन को कडुआ बना देने से तात्पर्य है
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