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PHYSICS
एक प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में धारा तथा ...

एक प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में धारा तथा वोल्टता के तात्क्षणिक मान क्रमशः दिये गये हैं-
`I=10sin 314t` ऐम्पियर तथा `V=50sin(314t+(pi)/2)`
वोल्ट | परिपथ में औसत शक्ति का व्यय क्या होगा?

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In triangle ABC , angle A=52^@ and O is the orthocentre of the triangle (BO and CO meet AC and AB at E and F respectively when produced). If the bisectors of angle OBC and angle OCB meet at P, then the measure of angle BPC is: त्रिभुज ABC में, angle A=52^@ है तथा O त्रिभुज का लम्ब केंद्र है | (BO और CO बढाए जाने पर AC तथा AB से क्रमशः E तथा F पर मिलते हैं |) यदि angle OBC तथा angle OCB के समद्विभाजक P पर मिलते हैं, तो angle BPC का मान क्या होगा ?

A, B and C started a business by investing Rs 1,37,500 and Rs 1,62,500 and Rs 1,87,500 respectively. A is a working partner and gets 20% of the profit as working allowance and remaining is distributed in the proportion of their investment. If the total profit is Rs 2,19,375. What is the share of C? A, B और C ने क्रमशः 1,37,500 रुपये , 1,62,500 रुपये तथा 1,84,500 रुपये निवेश करके एक व्यवसाय की शुरुआत की | A कार्यशील साझेदार है तथा लाभ का 20% कार्यशील भत्ता के रूप में लेता है और शेष लाभ का वितरण उनके निवेश के अनुपात में कर दिया जाता है | यदि कुल लाभ 2,19,375 रुपये का है, तो C का हिस्सा क्या होगा ?

कुछ महत्वपूर्ण पद |प्रत्यावर्ती परिपथ में शक्ति व्यय |प्रत्यावर्ती धारा का मापन |विभिन्न प्रकार के प्रत्यावर्ती परिपथ |OMR|Summary

The ratios of copper to Zinc in alloys A and B are 3:4 and 5:9 respectively. A and B are taken in the ratio 2:3 and melted to form a new alloy C. What is the ratio of copper to Zinc in C? मिश्रधातु A और B में तांबा और जस्ता का अनुपात क्रमशः 3 : 4 और 5:9 है | A और B को 2 : 3 के अनुपात में लिया जाता है तथा पिघलाकर एक नयी मिश्रधातु C बनाई जाती है | C में तांबा और जस्ता का क्या अनुपात होगा ?

A boat can go 30 km downstream and 24 km upstream in 2 hours 27 minutes. Also, it can go 10 km downstream and 4 km upstream in 37 minutes. What is the speed of the boat upstream (in km/h)? एक नाव 2 घंटे 27 मिनट में धारा के अनुकूल 30 किमी तथा धारा के प्रतिकूल 24 किमी जा सकती है| साथ ही, यह 37 मिनट में 10 किमी धारा के अनुकूल तथा 4 किमी धारा के प्रतिकूल जा सकती है| धारा के प्रतिकूल नाव की चाल ( किमी/घंटा में) क्या है ?

The radii of a right circular cone and a right circular cylinder are in the ratio 2:3. If the ratio of heights of the cone and the cylinder is 3:4, then what is the ratio of the volumes of the cone and the cylinder? एक लम्ब वृत्तीय शंकु तथा लम्ब वृत्तीय बेलन की त्रिज्याएँ 2 : 3 के अनुपात में हैं | यदि शंकु तथा बेलन की ऊंचाई में 3 : 4 का अनुपात है, तो शंकु तथा बेलन के आयतन में क्या अनुपात होगा ?

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये बहुविकल्पी प्रश्नों में सही विकल्प का चयन करों। क्रोध को हम एक बहुत ही हानि रहित कमजोरी की तरह देखने के लिए प्रवृत होते हैं। इसे हम महज एक प्राकृतिक दुर्बलता,एक पारिवारिक असफलता, एक स्वभाव संबधी विषय के रूप वर्णित करते हैं न कि किसी व्यक्ति के चरित्र का आकलन करने हेतु गम्भीरता से गणना में सम्मिलित करने का तत्व है और बाइबल मानव स्वभाव के सर्वाधिक विनाशकारी तत्वों में से एक के रूप में इसकी भर्त्सना करती है। क्रोध की एक विशेषता यह है कि यह गुणवान लोगों का एक अवगुण है तथा उच्च चरित्र वाले माने जाने वाले व्यक्ति पर यह अक्सर एक कलंक की तरह होता है। क्रोधी स्वभाव और उच्च नैतिक चरित्र के बीच में यह अनुकूलता आचार शास्त्र की सर्वाधिक विलक्षण एवं दुखद समस्यायों में से एक है। किसी भी प्रकार का पाप, कोई भी शराबखोरी या नशेबाजी समाज को इतना मानवता विहीन नहीं बनाते जितना क्रोध बनाता है। जीवन को कडुआ बना देने, जन समुदायों को तोड़ने ,पवित्रतम रिश्तों-नातों को नष्ट करने, घरों को बर्बाद करने, पुरुष तथा महिलाओं को मुरझा देने, बचपन से उसकी ताजगी और खिलखिलाहट छिन लेने, संक्षिप्त में एक शुद्ध स्वयमेव दुखोत्पादक शक्ति के रूप में क्रोध की सत्ता सर्वोपरि है। ईर्ष्या, घमंड, अनुदारता, निर्दयता, स्वयं को सही समझने की प्रवृति, भड़कीलापन , अड़ियलपन, उदासी- कम ज्यादा मात्रा में ये सब उग्र स्वभाव के ही तत्त्व है। इस प्रकार के स्वभाव के लिए स्वर्ग में सचमुच ही कोई स्थान नहीं है। इस प्रकार की मनःस्थितिवाला व्यक्ति स्वर्ग में स्थित सभी लोगों के लिए जीवन केवल यातनापूर्ण ही बनाएगा। प्रस्तुत गद्यांश में क्रोधी स्वभाव में कई तत्व बताये गए हैं, उनमेंसे एक है

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये बहुविकल्पी प्रश्नों में सही विकल्प का चयन करों। क्रोध को हम एक बहुत ही हानि रहित कमजोरी की तरह देखने के लिए प्रवृत होते हैं। इसे हम महज एक प्राकृतिक दुर्बलता,एक पारिवारिक असफलता, एक स्वभाव संबधी विषय के रूप वर्णित करते हैं न कि किसी व्यक्ति के चरित्र का आकलन करने हेतु गम्भीरता से गणना में सम्मिलित करने का तत्व है और बाइबल मानव स्वभाव के सर्वाधिक विनाशकारी तत्वों में से एक के रूप में इसकी भर्त्सना करती है। क्रोध की एक विशेषता यह है कि यह गुणवान लोगों का एक अवगुण है तथा उच्च चरित्र वाले माने जाने वाले व्यक्ति पर यह अक्सर एक कलंक की तरह होता है। क्रोधी स्वभाव और उच्च नैतिक चरित्र के बीच में यह अनुकूलता आचार शास्त्र की सर्वाधिक विलक्षण एवं दुखद समस्यायों में से एक है। किसी भी प्रकार का पाप, कोई भी शराबखोरी या नशेबाजी समाज को इतना मानवता विहीन नहीं बनाते जितना क्रोध बनाता है। जीवन को कडुआ बना देने, जन समुदायों को तोड़ने ,पवित्रतम रिश्तों-नातों को नष्ट करने, घरों को बर्बाद करने, पुरुष तथा महिलाओं को मुरझा देने, बचपन से उसकी ताजगी और खिलखिलाहट छिन लेने, संक्षिप्त में एक शुद्ध स्वयमेव दुखोत्पादक शक्ति के रूप में क्रोध की सत्ता सर्वोपरि है। ईर्ष्या, घमंड, अनुदारता, निर्दयता, स्वयं को सही समझने की प्रवृति, भड़कीलापन , अड़ियलपन, उदासी- कम ज्यादा मात्रा में ये सब उग्र स्वभाव के ही तत्त्व है। इस प्रकार के स्वभाव के लिए स्वर्ग में सचमुच ही कोई स्थान नहीं है। इस प्रकार की मनःस्थितिवाला व्यक्ति स्वर्ग में स्थित सभी लोगों के लिए जीवन केवल यातनापूर्ण ही बनाएगा। प्रस्तुत गद्य में क्रोधी स्वभाव का आंकलन किया है

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिये गये बहुविकल्पी प्रश्नों में सही विकल्प का चयन करों। क्रोध को हम एक बहुत ही हानि रहित कमजोरी की तरह देखने के लिए प्रवृत होते हैं। इसे हम महज एक प्राकृतिक दुर्बलता,एक पारिवारिक असफलता, एक स्वभाव संबधी विषय के रूप वर्णित करते हैं न कि किसी व्यक्ति के चरित्र का आकलन करने हेतु गम्भीरता से गणना में सम्मिलित करने का तत्व है और बाइबल मानव स्वभाव के सर्वाधिक विनाशकारी तत्वों में से एक के रूप में इसकी भर्त्सना करती है। क्रोध की एक विशेषता यह है कि यह गुणवान लोगों का एक अवगुण है तथा उच्च चरित्र वाले माने जाने वाले व्यक्ति पर यह अक्सर एक कलंक की तरह होता है। क्रोधी स्वभाव और उच्च नैतिक चरित्र के बीच में यह अनुकूलता आचार शास्त्र की सर्वाधिक विलक्षण एवं दुखद समस्यायों में से एक है। किसी भी प्रकार का पाप, कोई भी शराबखोरी या नशेबाजी समाज को इतना मानवता विहीन नहीं बनाते जितना क्रोध बनाता है। जीवन को कडुआ बना देने, जन समुदायों को तोड़ने ,पवित्रतम रिश्तों-नातों को नष्ट करने, घरों को बर्बाद करने, पुरुष तथा महिलाओं को मुरझा देने, बचपन से उसकी ताजगी और खिलखिलाहट छिन लेने, संक्षिप्त में एक शुद्ध स्वयमेव दुखोत्पादक शक्ति के रूप में क्रोध की सत्ता सर्वोपरि है। ईर्ष्या, घमंड, अनुदारता, निर्दयता, स्वयं को सही समझने की प्रवृति, भड़कीलापन , अड़ियलपन, उदासी- कम ज्यादा मात्रा में ये सब उग्र स्वभाव के ही तत्त्व है। इस प्रकार के स्वभाव के लिए स्वर्ग में सचमुच ही कोई स्थान नहीं है। इस प्रकार की मनःस्थितिवाला व्यक्ति स्वर्ग में स्थित सभी लोगों के लिए जीवन केवल यातनापूर्ण ही बनाएगा। प्रस्तुत गद्यांश में आचार शास्त्र की सबसे जटिल समस्या एक कौन सी है?

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