Home
Class 11
PHYSICS
g तथा G में संबंध समझाइये तथा सिद्ध कीजि...

g तथा G में संबंध समझाइये तथा सिद्ध कीजिये कि गुरुत्वीय त्वरण का मान वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता।

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

Revision |मुक्त पतन |गुरुत्वीय त्वरण g के मान का परिकलन

गुरुत्वीय त्वरण के मान में परिवर्तन पर उदाहरण|गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा|OMR|Summary

गुरुत्वीय त्वरण के मान में परिवर्तन पर उदाहरण|गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा|OMR|Summary

गुरुत्वीय त्वरण के मान में परिवर्तन पर उदाहरण|गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा|OMR|Summary

गुरुत्वाकर्षण बल का परिचय|गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम|गुरुत्व बल के प्रभाव में वस्तुओं की गति|द्रव्यमान तथा भार|आर्किमीडीज का सिद्धांत|Summary

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम विज्ञान युग में जी रहे हैं। हमसे ये आशा नहीं की जाती कि हम अविश्वसनीय मतों अथवा एकांतिक दैवी-संदेशों को सोचे समझे बगैर आसानी से स्वीकार कर लेंगे। आज के युग में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नित-नूतन आविष्कार हो रहे हैं। प्रकृति के रहस्यों पर से आवरण क्रमशः हटता जा रहा है। यह युग मानववाद का भी है, जिसमें वे धर्म जो मानवीय बुराइयों तथा सामाजिक अपराधों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं, आधुनिक व्यक्ति के गले नहीं उतरते। वे धर्म जो विभेद, वैमनस्य और अनैतिकता को बढ़ावा देते हैं तथा एकता, सद्भावना और सामंजस्य को प्रोत्साहित नहीं करते, वे मनुष्य को मनुष्य से लड़ाकार धर्मद्रोहियों के हाथ में अस्त्र बन जाते हैं। विज्ञान की प्रकृति कभी धर्म-विरोधी नहीं रही है। धार्मिक मतों के पक्ष में मुख्य तर्क प्रायः ब्रह्मांड संबंधी वस्तुपरक विचारों पर आधरित होते हैं। प्राकृतिक धर्म कभी भी किन्हीं आप्त स्रोतों, इल्हामों या परंपराओं पर निर्भर नहीं करता, वह तो अनुभूत अनुभव सिद्ध प्रत्यक्ष तथ्यों के अध्ययन और व्यावहारिकता पर अवलंबित होता है। वैज्ञानिक विधि का अनुसरण करते हुए, प्राकृतिक तथ्यों का सर्वेक्षण करके, युक्तियुक्त तर्क देकर परमसत्ता-विषयक सिद्धान्त का प्रतिपादन किया जाता है। वैज्ञानिक धर्म में ब्रह्मांड को समझने की जिज्ञासा पर बल दिया जाता है। प्राकृतिक ऊर्जा व पदार्थों के जन्म तथा विनाश को समझ सकने की इच्छा होती है। विकास का क्रम ऊर्ध्वमुखी रहा है: यह अप्राण से सप्राण तक, सप्राण से संवेदनशील तक, संवेदनशील से सज्ञान जीवन तक विकसित होता है। सज्ञान प्राणी को आध्यात्मिक प्राणी के रूप में आत्मविकास करना पड़ता है। आध्यात्मिक प्राणी- विशुद्ध ज्ञानी या विचारवान् प्राणी से उतना ऊँचा होता है जितना ज्ञानवान प्राणी संवेदनशील प्राणी से उन्नत होता है। विज्ञान की चेतना में कहीं यह संकेत नहीं मिलता कि पदार्थ से ही सृष्टि का आरंभ हुआ था। परमाणु को विखंडित करने वाले मनुष्य का मन निश्चय ही परमाणु से कहीं अधिक श्रेष्ठ है। प्रकृति की व्यवस्था और प्रगति के अवलोकन से स्पष्ट हो जाता है कि अगणित क्रमबद्ध प्रणालियों का संचालन, किसी सर्वद्रष्टा परम-आत्मा द्वारा किया जा रहा है। आधुनिक मनुष्य किस प्रकार के धर्म को स्वीकार नहीं करता।

Recommended Questions
  1. g तथा G में संबंध समझाइये तथा सिद्ध कीजिये कि गुरुत्वीय त्वरण का मान व...

    Text Solution

    |

  2. यदि f : RtoR,f(x)=x^(3) तथा g : RtoR,g(x)=3x-1 तब (gof)(x) तथा (fog)(x...

    Text Solution

    |

  3. गुरुत्व त्वरण G के मान का परिकलन | द्रव्यमान तथा भार

    Text Solution

    |

  4. एक वस्तु जिसका द्रव्यमान m है विराम से h ऊँचाई से गुरुत्वीय त्वरण g के...

    Text Solution

    |

  5. गुरुत्वीय त्वरण G तथा सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक G में सम्बन्ध

    Text Solution

    |

  6. गुरुत्वीय त्वरण का मान ज्ञात करना

    Text Solution

    |

  7. गुरुत्वीय त्वरण के मान का प्रयोग प्रश्नों में | भाग 1

    Text Solution

    |

  8. गुरुत्वीय त्वरण G || गुरुत्वीय त्वरण G तथा सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नि...

    Text Solution

    |

  9. एक्जाम स्पेशल |गुरुत्वीय त्वरण तथा भार पर आधारित प्रश्न

    Text Solution

    |