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BIOLOGY
वृद्धि नियामक (हॉर्मोन) क्या है? जिबरेलि...

वृद्धि नियामक (हॉर्मोन) क्या है? जिबरेलिन एवं एथिलीन की रासायनिक प्रकृति तथा कार्यिकी प्रभावों का वर्णन कीजिए।

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परिचय|एमीनो का वर्गीकरण|एमीनो का नामकरण|एमीनो का निर्माण तथा एमीनो की रासायानिक अभिक्रिया एवं क्षारीय गुण|एनिलीन की रासायनिक अभिक्रिया|डाई एजोनियम लवण|OMR|Summary

The given table represents the production of different types of motorcycles (in thousands) over a period of six years. Study the table carefully and answer the questions that follows: दी गयी तालिका छः वर्षों की अवधि के दौरान अलग-अलग प्रकार की मोटर साइकिलों के उत्पादन ( हज़ार में ) को दर्शाती है | इस तालिका का ध्यानपूर्वक अध्ययन करें तथा फिर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए | What is the percentage increase in the total production of all types of motorcycles from 2014to 2018? 2014 से 2018 तक सभी प्रकार की मोटरसाइकिल के कुल उत्पादन में कितने प्रतिशत की वृद्धि हुई है ?

परिचय|कार्बन यौगिक में आबंधन|सहसयोंजक बंध एवं इसके प्रकार|ध्रुवीय एवं अध्रुवीय सहसयोंजक बंध एवं यौगिक|कार्बनिक यौगिक क्या है?|अपररूपता एवं कार्बन के अपररूप|कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति एवं इसके कारण|सजातीय श्रेणी|क्रियात्मक समूह|Summary

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। भारत की शस्यश्यामला भूमि में जो निसर्ग-सिद्ध सुषमा है, उस पर भारतीय कवियों का चिरकाल से अनुराग रहा है। यों तो प्रकृति की साधारण वस्तुएँभी मनुष्यमात्र के लिए आकर्षक होती हैं, परन्तु उसकी सुन्दरतम विभूतियों __ में मानव वृत्तियाँ विशेष प्रकार से रमती हैं। अरब के कवि मरुस्थल में बहते हुए किसी साधारण से झरने अथवा ताड़ के लंबे-लंबे पेड़ों में ही सौन्दर्य का अनुभव कर लेते हैं तथा ऊँटों की चाल में ही सुन्दरता की कल्पना कर लेते हैं, परन्तु जिन्होंने भारत की हिमाच्छादित शैलमाला पर संध्या की सुनहली किरणों की सुषमा देखी हैं अथवा जिन्हें घनी अमराइयों की छाया में कल-कल ध्वनि से बहती हुई निर्झरिणी तथा उसकी समीपवर्तिनी लताओं की वसन्तश्री देखने का अवसर मिला है, साथ ही जो यहाँ के विशालकाय हाथियों की मतवाली चाल देख चुके हैं, उन्हें अरब की उपर्युक्त वस्तुओं में सौन्दर्य तो क्या, उलटे नीरसता, शुष्कता और भद्दापन ही मिलेगा। भारतीय कवियों को प्रकृति की सुन्दर गोद में क्रीड़ा करने का सौभाग्य प्राप्त है। ये हरे-हरे उपवनों तथा सुन्दर जलाशयों के तटों पर विचरण करते तथा प्रकृति के नाना मनोहारी रूपों से परिचित होते हैं। यही कारण है कि भारतीय कवि प्रकृति के संश्लिष्ट तथा सजीव चित्र जितनी मार्मिकता, उत्तमता तथा अधिकता से अंकित कर सकते हैं तथा उपमा-उत्प्रेक्षाओं के लिए जैसी सुन्दर वस्तुओं का उपयोग कर सकते हैं, वैसा रूखे-सूखे देश के निवासी कवि नहीं कर सकते। यह भारत-भूमि की ही विशेषता है कि यहाँ के कवियों का प्राकृतिक-वर्णन तथा तत्संभव सौन्दर्य-ज्ञान उच्च कोटि का होता है। प्रकृति के रम्य रूपों में तल्लीनता की जो अनुभूति होती है उसका उपयोग कविगण कभी-कभी रहस्यमयी भावनाओं के संचार में भी करते हैं। यह अखंड भूमण्डल तथा असंख्य ग्रह, उपग्रह, रवि-शशि अथवा जल, वायु, अग्नि, आकाश कितने रहस्यमय तथा अज्ञेय हैं? इनके सृष्टि-संचालन आदि के सम्बन्ध में दार्शनिकों अथवा वैज्ञानिकों ने इन तत्वों का निरूपण किया है। प्रकृति के रम्य रूपों में किस चीज की अनुभूति होती है?

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