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BIOLOGY
डॉ० होमी जहांगीर भाभा परमाणु शक्ति आ...

डॉ० होमी जहांगीर भाभा परमाणु शक्ति आयोग के अध्यक्ष कब बनाए गए

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The Bar graph given below presents the number of shoes manufactured by a company on the different days of a week. नीचे दिया गया दंड आरेख एक कंपनी के द्वारा सप्ताह के अलग-अलग दिनों को बनाए गए जूतों की संख्या प्रस्तुत करता है | What is the total number of shoes manufactured by the company on all seven days together? सभी सात दिनों को मिलाकर कंपनी के द्वारा बनाए गए जूतों की कुल संख्या कितनी है ?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। प्रत्येक प्रभात सुंदर चीजें लेकर उपस्थित होता है, पर यदि हमने कल तथा परसों के प्रभात की कृपा से लाभ नहीं उठाया तो आज के प्रभात से लाभ उठाने की हमारी शक्ति क्षीण होती जाएगी, और यही गति रही तो फिर हम उस शक्ति को बिल्कुल ही गँवा बैठेंगे। किसी विद्वान् ने ठीक ही कहा है कि खोई हुई सम्पत्ति कमखर्ची और परिश्रम से प्राप्त की जा सकती है, भूला हुआ ज्ञान अध्ययन से प्राप्त हो सकता है, गँवाया हुआ स्वास्थ्य दवा और संयम से लौटाया जा सकता है परन्तु नष्ट किया हुआ समय सदा के लिए चला जाता है। वह बस स्मृति की एक चीज हो जाता है और अतीत की एक छाया मात्र रह जाता है। ग्लेडस्टन सरीखा प्रतिभाशाली व्यक्ति अपनी जेब में एक __ छोटी-सी पुस्तक हमेशा लेकर निकलता था। उन्हें चिन्ता रहती थी किकहीं कोई घड़ी व्यर्थ न चली जाए। तब हम जैसे साधारण मनुष्यों को अपने अमूल्य समय को नष्ट होने से बचाने के लिए क्या नहीं करना चाहिए? प्रतिभावान् पुरुष समय के छोटे-छोटे टुकड़ों को बचाकर महान हो जाते हैं और अपनी असफलता पर आश्चर्य करने वाले उन्हें यों ही उड़ जाने देते हैं। उन्हें जीवन-भर कभी समय का मूल्य मालूम __ ही नहीं हो पाता। समय का लाभ उठाने की शक्ति कब क्षीण हो जाती है?

जब से नव उदारवाद की बयार चली है तब से कहा जा रहा है कि सारा विश्व अमेरिकी रंग में, देर-सबेर सराबोर हो जाएगा, यानी सब मुल्कों का अमेरिकीकरण हो जाएगा। ऐसा दावा भूतपूर्व अमेरिकी विदेशमन्त्री डॉ। हेनरी किसिंगर ने 12 अक्टूबर, 1999 को आयरलैण्ड की राजधानी डब्लिन के ट्रिनिटी कॉलेज में अपने व्याख्यान के क्रम में किया : 'बुनियादी चुनौती यह है कि जिसे भूमण्डलीकरण कहा गया है, वह अमेरिका द्वारा वर्चस्व जमाए रखने सम्बन्धी भूमिका का ही दूसरा नाम है। बीते दशक के दौरान अमेरिका ने अभूतपूर्व समृद्धि हासिल की, पूँजी की उपलब्धता को व्यापक और सघन किया, नई प्रौद्योगिकियों की विविधता के निर्माण, उनके विकास और विस्तृत वितरण हेतु धन की व्यवस्था की, अनगिनत सेवाओं और वस्तुओं के बाजार बनाए। आर्थिक दृष्टि से इससे बेहतर कुछ और नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि इन सबको देखते हुए अमेरिकी विचारों, मूल्यों और जीवन शैली को स्वीकारने के अलावा विश्व के पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है। 'न्यूयॉर्क टाइम्स' के स्तम्भकार टॉमस एल। फ्रिडमैन घोषणा करते दिखते हैं कि हम अमेरिकी एक गतिशील विश्व के समर्थक मुक्त बाजार के पैरोकार और उच्च तकनीक के पुजारी हैं। हम चाहते हैं कि विश्व हमारे नेतृत्व में रहे और लोकतान्त्रिक तथा पूँजीवादी बने। इतिहास के अन्त की घोषणा करने वाले फ्रांसिस फुकुयामा का मानना है कि विश्व का अमेरिकीकरण होना ही चाहिए, क्योंकि कई दृष्टियों से अमेरिका आज विश्व का सर्वाधिक उन्नत पूँजीवादी समाज है। उसके संस्थान इसी कारण बाजार की शक्तियों के तर्क संगत विकास के प्रतीक हैं। यदि बाजार की शक्तियों को वैश्वीकरण संचालित करता है, तो भूमण्डलीकरण के साथ-साथ अमेरिकीकरण अनिवार्य रूप से होगा। 'न्यूयॉर्क टाइम्स' से जुड़े भारतीय मूल के टिप्पणीकार आकाश कपूर ने उपरोक्त चर्चा को आगे बढ़ाया है। कपूर के पिता भारतीय और माँ अमेरिकी हैं। वे पले-बढ़े हैं अमेरिका में, परन्तु अरसे से पुदुचेरी (पाण्डिचेरी) में रहते हैं। उनके लेख 'न्यूयॉर्क टाइम्स' और उनके भूमण्डलीय संस्करण 'इण्टरनेशनल हेराल्ड ट्रिब्यून' में नियमित रूप से प्रकाशित होते हैं। लेखक प्रस्तुत गद्यांश के माध्यम से क्या कहना चाहता है?

खबर के बिकने की खबर पुरानी होकर भी पुरानी नहीं हुई। यह पूछने के बावजूद कि जब मीडिया मण्डी में है और मण्डी में धर्म, ईमान, पाखण्ड, ईश्वर सत्य, कला सभी कुछ बिक रहा है, तो खबर बिकने पर चौंकना, परेशान होना अथवा दुखी होना क्यों? परेशान होना जरूरी है। मीडिया का भ्रष्टाचार लोकतन्त्र को भारी नुकसान पहुँचाने वाला है। पैसे लेकर समाचार छापने की खबर ने । हड़कम्प मचा दिया। धन का लोभ क्या-क्या नहीं करवाता? बताया गया कि मुनाफाखोरी के दबाव में कुछ मीडिया संगठनों ने पत्रकारिता के ऊँचे आदर्शों का । हत्या कर दी। कुछ समय पहले तक रिपोर्टरों अथवा संवाददाताओं को नकद या अन्य छोटे-छोटे उपहार दिए जाते थे, देश-विदेश में किसी कम्पनी या किसी शख्स के बारे में अनुकूल खबर छापने पर अच्छे होटलों में लंच-डिनर के साथ नकद भुगतान का लिफाफा दिया जाता था। ऐसी खबर हर सूरत में वस्तुनिष्ठ होते हुए व्यक्ति, पद था संस्था की प्रशंसा कर रही होती थी, परन्तु फिर बड़ा बदलाव आया। कामकाज की शैली और नियम बदल गए। मूल्यों को निश्चित करने की गलाकाट प्रतियोगिता के अतिरिक्त बड़ा मुनाफा पाने के लिए एक नई टर्म मार्केटिंग का सहारा लिया आने लगा। उसूलों के उल्लंघन के जवाब तलाश कर लिए गए। कहा गया कि एजेसियों जैसे बिचौलियों को खत्म करने में कुछ भी बुरा नहीं। प्रेस-परिषद् ने कुछ दायित्व समझते हुए पैसे के बदले समाचार' पर एक कमेटी का गठन किया, जिससे चुनाव के दौरान नेताओं अथवा राजनीतिक दलों से पैसा लेकर समाचार प्रकाशित करने वाले जिम्मेदार कारकों को कठघरे में खड़ा किया जा सके, परन्तु कॉरिट मीडिया की दृश्य-अदृश्य शक्ति के सामने ऐसा हो न सका। सुप्रसिद्ध पत्रकार प्रभाष जोशी ने भी इस अनर्थ को रोकने की कोशिश को , परन्तु मीडिया-समूह और राजनीति के कार्यकर्ताओं के बीच दलाली पैकेज में सभी कुछ चल रहा है। किस मण्डी में धर्म और ईश्वर बिक रहा है?

खबर के बिकने की खबर पुरानी होकर भी पुरानी नहीं हुई। यह पूछने के बावजूद कि जब मीडिया मण्डी में है और मण्डी में धर्म, ईमान, पाखण्ड, ईश्वर सत्य, कला सभी कुछ बिक रहा है, तो खबर बिकने पर चौंकना, परेशान होना अथवा दुखी होना क्यों? परेशान होना जरूरी है। मीडिया का भ्रष्टाचार लोकतन्त्र को भारी नुकसान पहुँचाने वाला है। पैसे लेकर समाचार छापने की खबर ने । हड़कम्प मचा दिया। धन का लोभ क्या-क्या नहीं करवाता? बताया गया कि मुनाफाखोरी के दबाव में कुछ मीडिया संगठनों ने पत्रकारिता के ऊँचे आदर्शों का । हत्या कर दी। कुछ समय पहले तक रिपोर्टरों अथवा संवाददाताओं को नकद या अन्य छोटे-छोटे उपहार दिए जाते थे, देश-विदेश में किसी कम्पनी या किसी शख्स के बारे में अनुकूल खबर छापने पर अच्छे होटलों में लंच-डिनर के साथ नकद भुगतान का लिफाफा दिया जाता था। ऐसी खबर हर सूरत में वस्तुनिष्ठ होते हुए व्यक्ति, पद था संस्था की प्रशंसा कर रही होती थी, परन्तु फिर बड़ा बदलाव आया। कामकाज की शैली और नियम बदल गए। मूल्यों को निश्चित करने की गलाकाट प्रतियोगिता के अतिरिक्त बड़ा मुनाफा पाने के लिए एक नई टर्म मार्केटिंग का सहारा लिया आने लगा। उसूलों के उल्लंघन के जवाब तलाश कर लिए गए। कहा गया कि एजेसियों जैसे बिचौलियों को खत्म करने में कुछ भी बुरा नहीं। प्रेस-परिषद् ने कुछ दायित्व समझते हुए पैसे के बदले समाचार' पर एक कमेटी का गठन किया, जिससे चुनाव के दौरान नेताओं अथवा राजनीतिक दलों से पैसा लेकर समाचार प्रकाशित करने वाले जिम्मेदार कारकों को कठघरे में खड़ा किया जा सके, परन्तु कॉरिट मीडिया की दृश्य-अदृश्य शक्ति के सामने ऐसा हो न सका। सुप्रसिद्ध पत्रकार प्रभाष जोशी ने भी इस अनर्थ को रोकने की कोशिश को , परन्तु मीडिया-समूह और राजनीति के कार्यकर्ताओं के बीच दलाली पैकेज में सभी कुछ चल रहा है। लोकतन्त्र को किससे नुकसान हो रहा है?

खबर के बिकने की खबर पुरानी होकर भी पुरानी नहीं हुई। यह पूछने के बावजूद कि जब मीडिया मण्डी में है और मण्डी में धर्म, ईमान, पाखण्ड, ईश्वर सत्य, कला सभी कुछ बिक रहा है, तो खबर बिकने पर चौंकना, परेशान होना अथवा दुखी होना क्यों? परेशान होना जरूरी है। मीडिया का भ्रष्टाचार लोकतन्त्र को भारी नुकसान पहुँचाने वाला है। पैसे लेकर समाचार छापने की खबर ने । हड़कम्प मचा दिया। धन का लोभ क्या-क्या नहीं करवाता? बताया गया कि मुनाफाखोरी के दबाव में कुछ मीडिया संगठनों ने पत्रकारिता के ऊँचे आदर्शों का । हत्या कर दी। कुछ समय पहले तक रिपोर्टरों अथवा संवाददाताओं को नकद या अन्य छोटे-छोटे उपहार दिए जाते थे, देश-विदेश में किसी कम्पनी या किसी शख्स के बारे में अनुकूल खबर छापने पर अच्छे होटलों में लंच-डिनर के साथ नकद भुगतान का लिफाफा दिया जाता था। ऐसी खबर हर सूरत में वस्तुनिष्ठ होते हुए व्यक्ति, पद था संस्था की प्रशंसा कर रही होती थी, परन्तु फिर बड़ा बदलाव आया। कामकाज की शैली और नियम बदल गए। मूल्यों को निश्चित करने की गलाकाट प्रतियोगिता के अतिरिक्त बड़ा मुनाफा पाने के लिए एक नई टर्म मार्केटिंग का सहारा लिया आने लगा। उसूलों के उल्लंघन के जवाब तलाश कर लिए गए। कहा गया कि एजेसियों जैसे बिचौलियों को खत्म करने में कुछ भी बुरा नहीं। प्रेस-परिषद् ने कुछ दायित्व समझते हुए पैसे के बदले समाचार' पर एक कमेटी का गठन किया, जिससे चुनाव के दौरान नेताओं अथवा राजनीतिक दलों से पैसा लेकर समाचार प्रकाशित करने वाले जिम्मेदार कारकों को कठघरे में खड़ा किया जा सके, परन्तु कॉरिट मीडिया की दृश्य-अदृश्य शक्ति के सामने ऐसा हो न सका। सुप्रसिद्ध पत्रकार प्रभाष जोशी ने भी इस अनर्थ को रोकने की कोशिश को , परन्तु मीडिया-समूह और राजनीति के कार्यकर्ताओं के बीच दलाली पैकेज में सभी कुछ चल रहा है। लेखक के अनुसार