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PHYSICS
" पर्न."19" किम? परिएश में "A" व "B" क्व...

" पर्न."19" किम? परिएश में "A" व "B" क्विन्दुडते के बीच तुल्य प्रतिरोध जाल कीलिए । "

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Eight friends A, B, C, D, E, F, G and H are standing in two lines of four students each during school prayer. H is after D. C is just before A. E is after B. C and G are in the front positions. F is between G and B. Which two persons are standing at third position in both the rows? आठ मित्र - A, B, C, D, E, F, G और H दो पंक्तियों में बैठे हैं जिनमें से प्रत्येक पंक्ति में चार लोग हैं |H, D के बाद है| C, A के ठीक पहले है | E, B के बाद है| C और G अपनी पंक्तियों में आगे हैं | F, G और B के बीच है | प्रत्येक पंक्ति के तीसरे स्थान पर कौन से दो मित्र बैठे हैं ?

Study the given graph and answer the question that follows: Break up for distribution (degree wise) of the employees working in five departments (A,B,C,D, and E) in a company. If 20% of the employees working in department E are transferred to department A, then the difference between eh number of employees in A and 124% of the employees working in department C is: दिए गए ग्राफ का अध्ययन करें और नीचे दिए गए प्रश्न का उत्त्तर दें। कंपनी के पांच विभागों (A,B,C,D, और E) में काम कर रहे कर्मचारियों का वितरण (डिग्री में) यदि विभाग E में कार्य करने वाले 20% कर्मचारियों को विभाग A में स्थानांतरित कर दिया जाता है, तो विभाग A में कर्मचारियों की संख्या और विभाग C में कार्यरत 124% कार्मचारियों के बीच अंतर ज्ञात कीजिए।

Five books labelled B, G, N, P and T are kept one above the other(Not necessarily in the same order). Only one book is kept between N and G. B is just above P. B is above N. G is not above N. Which book is at the top? B, G, N, P और T नामक पाँच पुस्तकें एक के ऊपर एक रखी गई हैं (जरूरी नहीं कि उसी क्रम में)। N और G. B के बीच केवल एक पुस्तक रखी गई है। B, P के ठीक ऊपर है। G, N के ऊपर नहीं है। कौन सी पुस्तक सबसे ऊपर है?

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले उचित विकल्प चुनिए: समस्याओं का हल ढूँढने की क्षमता पर एक अध्ययन किया गया। इसमें का भारत में तीन तरह के बच्चों की बीच तुलना की गई-एक तरफ वे बच्चे जो दुकानदारी करते हैं और स्कूल नहीं जाते, ऐसे बच्चे जो दुकान संभालते य हैं और स्कूल भी जाते हैं और तीसरा समूह उन बच्चों का था जो स्कूल जाते हैं पर दुकान पर कोई मदद नहीं करते। उनसे गणना के तथा इबारती सवाल पूछे गए। दोनों ही तरह के सवालों में उन स्कूली बच्चों ने जो दुकानदार नहीं हैं, मौखिक गणना या मनगणित का प्रयोग बहुत कम किया, बनिस्बत उनके जो दुकानदार थे। स्कूली बच्चों ने ऐसी गलतियाँ भी की, जिनका कारण नहीं समझा जा सका। इससे यह साबित होता है कि दुकामदारी से जुड़े हर बच्चे हिसाब लगाने में गलती नहीं कर सकते क्योंकि इसका सीधा असर उनके काम पर पड़ता है, जबकि स्कूलों के बच्चे वही हिसाब लगाने में अक्सर भयंकर गलतियाँ कर देते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जिन बच्चों के रोजमर्ग की जिंदगी में इस तरह के सवालों से जूझना पड़ता है, वे अपने लिए जरूरी गणितीय क्षमता हासिल कर लेते हैं। लेकिन साथ ही इस बात पर भी गौर करना महत्त्वपूर्ण है कि इस तरह की दक्षताएँ एक स्तर तक और एक कार्य-क्षेत्र तक सीमित होकर रह जाती हैं। इसलिए वे सामाजिक व सांस्कृतिक परिवेश जो की ज्ञान को बनाने व बढ़ाने में मदद करते हैं, वही उस ज्ञान को संकुचित और सीमित भी कर सकते हैं। अनुछेद के आधार पर बताइए कि सामाजिक व सांस्कृतिक परिवेश ज्ञान को

The monthly salaries of A and B are the same. A, B and C donate 10%, 8% and 9% respectively, of their monthly salaries to a charitable trust. The difference between the donation of A and B is 400. The total donation of A and B is 900 more than that of C. What is the monthly salary of C? A और B का मासिक वेतन समान है। A, B और C अपने मासिक वेतन का 10%, 8% और 9%, एक धर्मार्थ ट्रस्ट को दान करते हैं। A और B के दान के बीच का अंतर 400 है। A और B का कुल दान C की तुलना में 900 अधिक है। C का मासिक वेतन क्या है

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले उचित विकल्प चुनिए: समस्याओं का हल ढूँढने की क्षमता पर एक अध्ययन किया गया। इसमें का भारत में तीन तरह के बच्चों की बीच तुलना की गई-एक तरफ वे बच्चे जो दुकानदारी करते हैं और स्कूल नहीं जाते, ऐसे बच्चे जो दुकान संभालते य हैं और स्कूल भी जाते हैं और तीसरा समूह उन बच्चों का था जो स्कूल जाते हैं पर दुकान पर कोई मदद नहीं करते। उनसे गणना के तथा इबारती सवाल पूछे गए। दोनों ही तरह के सवालों में उन स्कूली बच्चों ने जो दुकानदार नहीं हैं, मौखिक गणना या मनगणित का प्रयोग बहुत कम किया, बनिस्बत उनके जो दुकानदार थे। स्कूली बच्चों ने ऐसी गलतियाँ भी की, जिनका कारण नहीं समझा जा सका। इससे यह साबित होता है कि दुकामदारी से जुड़े हर बच्चे हिसाब लगाने में गलती नहीं कर सकते क्योंकि इसका सीधा असर उनके काम पर पड़ता है, जबकि स्कूलों के बच्चे वही हिसाब लगाने में अक्सर भयंकर गलतियाँ कर देते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जिन बच्चों के रोजमर्ग की जिंदगी में इस तरह के सवालों से जूझना पड़ता है, वे अपने लिए जरूरी गणितीय क्षमता हासिल कर लेते हैं। लेकिन साथ ही इस बात पर भी गौर करना महत्त्वपूर्ण है कि इस तरह की दक्षताएँ एक स्तर तक और एक कार्य-क्षेत्र तक सीमित होकर रह जाती हैं। इसलिए वे सामाजिक व सांस्कृतिक परिवेश जो की ज्ञान को बनाने व बढ़ाने में मदद करते हैं, वही उस ज्ञान को संकुचित और सीमित भी कर सकते हैं। दुकानदार बच्चे हिसाब लगाने में भाषा गलती नहीं करते क्योंकि

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले उचित विकल्प चुनिए: समस्याओं का हल ढूँढने की क्षमता पर एक अध्ययन किया गया। इसमें का भारत में तीन तरह के बच्चों की बीच तुलना की गई-एक तरफ वे बच्चे जो दुकानदारी करते हैं और स्कूल नहीं जाते, ऐसे बच्चे जो दुकान संभालते य हैं और स्कूल भी जाते हैं और तीसरा समूह उन बच्चों का था जो स्कूल जाते हैं पर दुकान पर कोई मदद नहीं करते। उनसे गणना के तथा इबारती सवाल पूछे गए। दोनों ही तरह के सवालों में उन स्कूली बच्चों ने जो दुकानदार नहीं हैं, मौखिक गणना या मनगणित का प्रयोग बहुत कम किया, बनिस्बत उनके जो दुकानदार थे। स्कूली बच्चों ने ऐसी गलतियाँ भी की, जिनका कारण नहीं समझा जा सका। इससे यह साबित होता है कि दुकामदारी से जुड़े हर बच्चे हिसाब लगाने में गलती नहीं कर सकते क्योंकि इसका सीधा असर उनके काम पर पड़ता है, जबकि स्कूलों के बच्चे वही हिसाब लगाने में अक्सर भयंकर गलतियाँ कर देते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जिन बच्चों के रोजमर्ग की जिंदगी में इस तरह के सवालों से जूझना पड़ता है, वे अपने लिए जरूरी गणितीय क्षमता हासिल कर लेते हैं। लेकिन साथ ही इस बात पर भी गौर करना महत्त्वपूर्ण है कि इस तरह की दक्षताएँ एक स्तर तक और एक कार्य-क्षेत्र तक सीमित होकर रह जाती हैं। इसलिए वे सामाजिक व सांस्कृतिक परिवेश जो की ज्ञान को बनाने व बढ़ाने में मदद करते हैं, वही उस ज्ञान को संकुचित और सीमित भी कर सकते हैं। जो दक्षताएँ हमारे दैनिक जीवन में काम नहीं आती उनमें हमारा प्रदर्शन अक्सर

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले उचित विकल्प चुनिए: समस्याओं का हल ढूँढने की क्षमता पर एक अध्ययन किया गया। इसमें का भारत में तीन तरह के बच्चों की बीच तुलना की गई-एक तरफ वे बच्चे जो दुकानदारी करते हैं और स्कूल नहीं जाते, ऐसे बच्चे जो दुकान संभालते य हैं और स्कूल भी जाते हैं और तीसरा समूह उन बच्चों का था जो स्कूल जाते हैं पर दुकान पर कोई मदद नहीं करते। उनसे गणना के तथा इबारती सवाल पूछे गए। दोनों ही तरह के सवालों में उन स्कूली बच्चों ने जो दुकानदार नहीं हैं, मौखिक गणना या मनगणित का प्रयोग बहुत कम किया, बनिस्बत उनके जो दुकानदार थे। स्कूली बच्चों ने ऐसी गलतियाँ भी की, जिनका कारण नहीं समझा जा सका। इससे यह साबित होता है कि दुकामदारी से जुड़े हर बच्चे हिसाब लगाने में गलती नहीं कर सकते क्योंकि इसका सीधा असर उनके काम पर पड़ता है, जबकि स्कूलों के बच्चे वही हिसाब लगाने में अक्सर भयंकर गलतियाँ कर देते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जिन बच्चों के रोजमर्ग की जिंदगी में इस तरह के सवालों से जूझना पड़ता है, वे अपने लिए जरूरी गणितीय क्षमता हासिल कर लेते हैं। लेकिन साथ ही इस बात पर भी गौर करना महत्त्वपूर्ण है कि इस तरह की दक्षताएँ एक स्तर तक और एक कार्य-क्षेत्र तक सीमित होकर रह जाती हैं। इसलिए वे सामाजिक व सांस्कृतिक परिवेश जो की ज्ञान को बनाने व बढ़ाने में मदद करते हैं, वही उस ज्ञान को संकुचित और सीमित भी कर सकते हैं। किन बच्चों ने सवाल हल करने में मौखिक गणना का ज्यादा प्रयोग किया?

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले उचित विकल्प चुनिए: समस्याओं का हल ढूँढने की क्षमता पर एक अध्ययन किया गया। इसमें का भारत में तीन तरह के बच्चों की बीच तुलना की गई-एक तरफ वे बच्चे जो दुकानदारी करते हैं और स्कूल नहीं जाते, ऐसे बच्चे जो दुकान संभालते य हैं और स्कूल भी जाते हैं और तीसरा समूह उन बच्चों का था जो स्कूल जाते हैं पर दुकान पर कोई मदद नहीं करते। उनसे गणना के तथा इबारती सवाल पूछे गए। दोनों ही तरह के सवालों में उन स्कूली बच्चों ने जो दुकानदार नहीं हैं, मौखिक गणना या मनगणित का प्रयोग बहुत कम किया, बनिस्बत उनके जो दुकानदार थे। स्कूली बच्चों ने ऐसी गलतियाँ भी की, जिनका कारण नहीं समझा जा सका। इससे यह साबित होता है कि दुकामदारी से जुड़े हर बच्चे हिसाब लगाने में गलती नहीं कर सकते क्योंकि इसका सीधा असर उनके काम पर पड़ता है, जबकि स्कूलों के बच्चे वही हिसाब लगाने में अक्सर भयंकर गलतियाँ कर देते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जिन बच्चों के रोजमर्ग की जिंदगी में इस तरह के सवालों से जूझना पड़ता है, वे अपने लिए जरूरी गणितीय क्षमता हासिल कर लेते हैं। लेकिन साथ ही इस बात पर भी गौर करना महत्त्वपूर्ण है कि इस तरह की दक्षताएँ एक स्तर तक और एक कार्य-क्षेत्र तक सीमित होकर रह जाती हैं। इसलिए वे सामाजिक व सांस्कृतिक परिवेश जो की ज्ञान को बनाने व बढ़ाने में मदद करते हैं, वही उस ज्ञान को संकुचित और सीमित भी कर सकते हैं। अनुच्छेद के आधार पर कहा जा सकता है कि