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PHYSICS
यदि पृथ्वी तल पर गुरुत्वीय त्वरण g हो तो...

यदि पृथ्वी तल पर गुरुत्वीय त्वरण g हो तो m द्रव्यमान की एक वस्तु को पृथ्वी तल से पृथ्वी की त्रिज्या R के बराबर ऊंचाई पर ले जाने पर स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि होगी-

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An article is sold at a certain price. If it is sold at 80% of this price, then there will be a loss of 10%. What is the percentage profit when the article is sold at the original selling price? एक वस्तु किसी निश्चित कीमत पर बेची जाती है | यदि इसे इस कीमत के 80% पर बेचा जाए, तो 10% की हानि होगी | वस्तु को आरंभिक विक्रय मूल्य पर बेचने पर होने वाला प्रतिशत लाभ ज्ञात करें |

एक तीन साल के बच्चे से किसी भी ऐसे विषय पर बातचीत की जा सकती हैं, जो उसके दायरे में आता हो।

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन नदियों को जन्म दिया है, उनमें गंगा और यमुना नाम की नदियाँ हमारे जीवन की धमनियों की तरह रही हैं। उनकी गोद में हमारे पूर्वजों ने सभ्यता के प्रांगण में अनेक नए खेल खेले। उनके तटों पर जीवन का जो प्रवाह प्रचलित हुआ. वह आज तक हमारे भूत और भावी जीवन को सींच रहा है। भारत हमारा देश है और हम उसके नागरिक हैं यह एक सच्चाई हमारे रोम-रोम में बिंधी हुई है। नदियों की अन्तर्वेदी में पनपने वाले आदि युग के जीवन पर हम अब जितना अधिक विचार करते हैं हमको अपने विकास और वृद्धि की सनातन जड़ों का पृथ्वी के साथ संबंध उतना ही अधिक घनिष्ठ जान पड़ता है। हमारे धार्मिक पर्यों पर लाखों लोग नदी और जलाशयों के तटों पर एकत्र होते हैं। पृथ्वी के एक-एक जलाशय और सरोवर को भारतीय भावना ने ठीक प्रकार से समझने का प्रयत्न किया, उनके साथ सौहार्द का भाव उत्पन्न किया जो हर एक पीढ़ी के साथ नए रूप में बंधा रहा। किन्तु आज स्थिति बड़ी विचित्र और एक सीमा तक चिन्ताजनक हो गई है। हमारी औद्योगिक क्रांति ने इन्हें प्रदूषित कर विषैला बना दिया है। जीवनदायिनी नदियाँ आज प्राणघातिनी होती जा रही हैं। मिल बैठकर सोचने की आवश्यकता है कि क्या करें कि ये पुनः जीवनदायिनी हों। और उन सोची हुई योजनाओं को अमल में लाने की भी आवश्यकता है। गंगा-यमुना को जल कहाँ से मिलता है?

निर्देशः गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। हमारे विशाल देश में हिमालय की अनन्त हिमराशि वाले ग्लेशियरों ने जिन नदियों को जन्म दिया है, उनमें गंगा और यमुना नाम की नदियाँ हमारे जीवन की धमनियों की तरह रही हैं। उनकी गोद में हमारे पूर्वजों ने सभ्यता के प्रांगण में अनेक नए खेल खेले। उनके तटों पर जीवन का जो प्रवाह प्रचलित हुआ, वह आज तक हमारे भूत और भावी जीवन को सींच रहा है। भारत हमारा देश है और हम उसके नागरिक हैं यह एक सच्चाई हमारे रोम-रोम में बिंधी हुई है। नदियों की अन्तर्वेदी में पनपने वाले आदि युग के जीवन पर हम अब जितना अधिक विचार करते हैं हमको अपने विकास और वृद्धि की सनातन जड़ों का पृथ्वी के साथ संबंध उतना ही अधिक घनिष्ठ जान पड़ता है। हमारे धार्मिक पर्वो पर लाखों लोग नदी और जलाशयों के तटों पर एकत्र होते हैं। पृथ्वी के एक-एक जलाशय और सरोवर को भारतीय भावना ने ठीक प्रकार से समझने का प्रयत्न किया, उनके साथ सौहार्द का भाव उत्पन्न किया जो हर एक पीढ़ी के साथ नए रूप में बँधा रहा। किन्तु आज स्थिति बड़ी विचित्र और एक सीमा तक चिन्ताजनक हो गई है। हमारी औद्योगिक क्रांति ने इन्हें प्रदूषित कर विषैला बना दिया है। जीवनदायिनी नदियाँ आज प्राणघातिनी होती जा रही हैं। मिल-बैठकर सोचने की आवश्यकता है कि क्या करें कि ये पुनः जीवनदायिनी हों और उन सोची हुई योजनाओं को अमल में लाने की भी आवश्यकता है। गंगा-यमुना को जल कहाँ से मिलता है ?