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52 ताश के पत्तों कि एक भली-भांति फेटी ग...

52 ताश के पत्तों कि एक भली-भांति फेटी गई गद्दी में से 5 पत्ते उत्तरोत्तर प्रतिस्थापना सहित निकाले जाते है। इसकी क्या प्रायिकता है कि
(i) सभी 5 पत्ते हुकुम के हों?
(ii) केवल 3 पत्ते हुकुम के हाँ?
(iii) एक भी पत्ता हुकुम का नहीं हो?

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छात्र की सहायता करना अत्यावश्यक है कि उसका मन वैज्ञानिक, स्पष्ट, निश्चित और सूक्ष्मता से सोचने वाला तथा उसके साथ ही साथ मन की गहराईयों को अनावृत करने वाला हो। क्या छात्र को इस प्रकार शिक्षित करना संभव है कि वह सभी लेबिलों के परे जो कर सके तथा उस वस्त का पता लगा सके, उसका अनुभव कर सके, जिसको मन नहीं माप सकता, जो किसी पुस्तक में नहीं लिखा है। यदि इस प्रकार के एक विद्यालय में ऐसी शिक्षा संभव हो सके, तो वह अनूठी होगी। आप सभी को यह देखना चाहिए कि इस प्रकार के विद्यालय का निर्माण कितना मूल्यवान होगा। केवल नृत्य, संगीत, गणित और दूसरे पाठों पर ध्यान देना समस्त जीवन नहीं है। शांत बैठना तथा अपने को देखना, सूक्ष्म दृष्टि प्राप्त करना, अवलोकन करना भी जीवन का अंग है। विचार कैसे किया जाए. किस पर विचार किया जाए, तथा आप विचार क्यों कर रहे हैं, इसको देखना भी आवश्यक है। लेखक की दृष्टि में सर्वाधिक महत्वपूर्ण क्या है?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। लेखक का मानना है कि यह एक गम्भीर गलती है

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। उपरोक्त गद्यांश का भावार्थ है कि कुछ साधारण से नियमों का पालन करने से

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में सबसे उचित विकल्प चुनिए। इस समय जनसत्त संसार के प्रत्येक देश के दरवाजे पर दस्तक दे रही है और आज वह अपने मजबूत हाथो में भारतवर्ष के दरवाजे की जंजीर भी खटखटाती हुई उसे अत्यंत प्राचीन भूमि के निवासियों से प्रश्न करती है की बतलाओ , तुम नवयुग का स्वागत किस प्रकार करना चाहते हो ? इस देश के युवको से और उन सभी प्रकार के लोगो से जो कर्मक्षेत्र में अवतीर्ण हो चुके है उसके संसार के अत्याचारों और अनाचारों की और ऊँगली उठाते हुए स्पष्ट प्रश्न है कि क्या उस समय जबकि संसार में न्याय और अन्याय का ऐसा घमासान युद्ध छिड़ा हुआ है , तुम निष्क्रिय और चुपचाप हाथ पर हाथ रखे बैठे रहना ही उचित समझते हो ? क्या उस समय जबकि राष्ट्रों के होनहार नैनिहाल केवल निकृष्ट श्रेणियों में जन्म लेने के कारण जबरदस्तों कि स्वार्थ वेदी पर बेदर्दी से बलिदान किये जा रहे है , जब केवल जाती या रंग के कारण मनुष्य मनुष्य कि गर्दन काट रहा है , तुम चुपचाप बैठे हुए इस विभीषिका को देखते रहना अपना धर्म समझते हो ? क्या उस समय जब व्यक्तियों के स्वेच्छाचारो के अंत कि घोषणा संसार भर में गूंज उठी है और स्वेच्छाचार अपनी धाक कि समाप्ति के पश्चात अब अपने जाने कि गंभीरतापूर्वक तयारी कर रहा है , तब उन घटनाओ को चुपचाप देखना ही तुम्हारा कर्तव्य है ? गद्यांश के अनुसार विश्व के सभी देशो में आज किसकी धूम है ?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये हम में से बहुत से लोगों के दिमाग में जो तरह-तरह के मुर्खतापूर्वक विचार आते हैं उन्हें दूर रखने के लिए किसी अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि की आवश्यकता नहीं है। यदि हम कुछ साधारण से नियमों का पालन करें तो सभी गलतियों से तो नहीं, लेकिन मूर्खतापूर्वक गलतियाँ करने से जरूर बच सकते हैं। यदि कोई मामला निरीक्षण करने से सुलझ सकता है तो हमें स्वयं निरीक्षण करना चाहिए। अरस्तु का यह सोचना था कि पुरूषों की तुलना में महिलाओं के दाँतों की संख्या कम होती है। इस गलती से बचने का एक साधारण-सा तरीका था कि वे अपनी पत्नी के दाँत गिन लेते। यह सोचना कि हम जानते हैं, जबकि वास्तव में हम नहीं जानते, एक बुरी आदत है जो हम में से बहुतों को होती है। लेखक कहना चाहता है कि

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