Home
Class 9
MATHS
1.5 मीटर चौड़ाई के कपड़ें लम्बाई ज्ञात कीज...

1.5 मीटर चौड़ाई के कपड़ें लम्बाई ज्ञात कीजिए जो 14 मीटर व्यास और 24 मीटर ऊँचाई के शंक्वाकार तम्बू के बनाने के लिये आवश्यक है। दिया है कि मोड़ने और सिलाई में कपड़ें का प्रयुक्त होता है। इस कपड़े का `8(1)/(3)%` मूल्य भी रु 28 प्रति मीटर की दर से ज्ञात कीजिए।

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

A hemispherical dome is open from its base and is made up of iron. Thickness of dome is 3.5 meter. Total cost of painting dome's outer curved surface is Rs 2464. If the rate of painting is Rs 8 per meter^2 , then what is the volume (in meter^3 ) of iron used in making the dome ? एक अर्धगोलाकार गुम्बद अपने आधार से खुला है तथा लोहे से बना है। गुम्बद को मोटाई 3.5 मीटर है। गुम्बद के बाहर की वक्रीय सतह को पेंट करने में कुल 2464 रूपये का खर्चा होता है। यदि पेंटिंग की दर 8 रूपये प्रति मीटर^2 है, तो गुम्बद को बनाने में प्रयोग हुए लोहे का आयतन ( मीटर^3 में) क्या होगा?

निर्देश: गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह समर्पण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप नहीं कर सकता है। किन्तु कुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत् उपक्रम बन जाता है। जब व्यक्ति स्वयं के प्रति किए गए अन्याय, शोषण के विरुद्ध आवाज नहीं उठाता तो-

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह स्मरण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप नहीं कर सकता है। किन्तु कुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत उपक्रम बन जाता है। जब व्यक्ति स्वयं के प्रति किए गए अन्याय, शोषण के विरुद्ध आवाज नहीं उठाता तो

निर्देश: गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह समर्पण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप नहीं कर सकता है। किन्तु कुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत् उपक्रम बन जाता है। "..... और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है।" वाक्य में निपात है-

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह स्मरण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप नहीं कर सकता है। किन्तु कुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत उपक्रम बन जाता है। "..... और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है।" वाक्य में निपात है

निर्देश: गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार की इस स्वीकृति को मनुष्य का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह समर्पण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप नहीं कर सकता है। किन्तु कुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत् उपक्रम बन जाता है। इस गद्यांश में 'उपक्रम' का अर्थ है।

Recommended Questions
  1. 1.5 मीटर चौड़ाई के कपड़ें लम्बाई ज्ञात कीजिए जो 14 मीटर व्यास और 24 मीटर...

    Text Solution

    |

  2. किसी समबाहु त्रिभुज के आधार का समीकरण x+y=2 है तथा सामने के शीर्ष के ...

    Text Solution

    |

  3. एक छोटी फर्म सोने के अंगूठियां और चेनों का निर्माण करती है| प्रतिदिन अ...

    Text Solution

    |

  4. उस त्रिभुज का अतः केंद्र ज्ञात कीजिए जिसके शीर्षों के निर्देशांक (1, ...

    Text Solution

    |

  5. उस सरल रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए जो मूलबिंदु से होकर जाती है और निर्द...

    Text Solution

    |

  6. किसी त्रिभुज के शीर्ष बिन्दुओं के निर्देशांक (0,1),(2,0) और (-1,-2) है...

    Text Solution

    |

  7. उस सरल रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए जो बिन्दु (3,-4) से होकर जाती है और ...

    Text Solution

    |

  8. सिद्ध कीजिए कि बिन्दु (2,-2),(8,4),(5,7) और (-1,1) एक आयत के शीर्ष है।...

    Text Solution

    |

  9. एक टी. वी बनाने के कारखाने में मशीने A,B और C कुल उत्पादन का क्रमशः ...

    Text Solution

    |