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दोपहर 12 बजे तापमान शून्य से 10^(@)C ऊप...

दोपहर 12 बजे तापमान शून्य से `10^(@)C` ऊपर था। यदि यह आधी रात तक `2^(@)C` प्रति घंटे की दर से कम होता है , तो किस समय तापमान शून्य से `8^(@)C` नीचे होगा । आधी रात को तापमान क्या होगा।

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A sells an item at 20% profit to B, B sells the same at 10% profit to C and receives 1,32,000. Had C purchased the same item from A, he would have spent 5% less than what he spent with B. What profit would A have made then? A किसी वस्तु को B से 20% के लाभ पर बेचता है। B इसी वस्तु को C को बेच देता है तथा 1,32,000 रुपये प्राप्त करता है। यदि C ने इसी वस्तु को A से क्रय किया होता, तो उसे B को भुगतान की गयी राशि की तुलना में 5% कम खर्च करना पड़ता। A को कितना लाभ हुआ ?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में से सबसे उचित विकल्प चुनिए। यायावरी यात्राओं के सुखो में एक सुख तो यह है की निकले किसी चीज की खोज में और मिल जाए कोई दूसरी ही चीज। लेकिन जीवन - भर यायावरी करते रहकर भी उस कल्पनातीत आविष्कार के लिए में तैयार नहीं था। जो इस बार राम - जानकी यात्रा के दौरान अकस्मात हुआ। यह तो जानता था की रामायण के चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ , उनके ऐसे अवशेष तो क्या ही मिल सकते है जिन्हे 'ऐतिहासिक' कहा जाए और यह भी जानता था की रामायण क चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ उनके ऐसे बहुत से स्थल मिल जायेंगे जिनका रामायण से कोई वास्तविक सम्बन्ध जरूर रहा हो , लेकिन उन्हें देखकर एकाएक यह मानने को जी होने लगे की कुछ सम्बन्ध जरूर रहा होगा। खासकर नेपाल ट्राई के जंगलो और नदी -नालो -भरे प्रदेशमें से गुजरते हुए तो मन हो ऐसा हो गया था किसी भी स्थल से जुड़ी किसी असुर की , गन्धर्व की , अप्सरा की , किरात अथवा नागकन्या की गाथा सुनकर एकाएक यह प्रतिक्रिया न होती की यह सब मनगढ़ंत है , ऐसा वास्तव में हुआ नहीं होगा , केवल आदिम -मानव की कच्ची कल्पना ने ये किससे गड़े होंगे। निश्चय ही स्थलों का अपना जादू होता है। ठोस व्यावहारिक आदमी भी ऐसे स्थलों पर पहुंचकर पाता है की उसकी कल्पना चेत उठी है फिर उसे अपनी संस्कृति के पुराण की ही बाते क्यों , दूसरी संस्कृतियों के पुराण भी सच्चे जान पढ़ने लगते है उनके भी वन - देवता और लता -बलाएँ और नदी -अप्सराएं देखते -देखते उसके आगे रूप लेने लगती है। लेखक के अनुसार आदिमानव की कच्ची कल्पना ने किस प्रकार की कहानियों को जन्म दिया होगा ?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में से सबसे उचित विकल्प चुनिए। यायावरी यात्राओं के सुखो में एक सुख तो यह है की निकले किसी चीज की खोज में और मिल जाए कोई दूसरी ही चीज। लेकिन जीवन - भर यायावरी करते रहकर भी उस कल्पनातीत आविष्कार के लिए में तैयार नहीं था। जो इस बार राम - जानकी यात्रा के दौरान अकस्मात हुआ। यह तो जानता था की रामायण के चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ , उनके ऐसे अवशेष तो क्या ही मिल सकते है जिन्हे 'ऐतिहासिक' कहा जाए और यह भी जानता था की रामायण क चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ उनके ऐसे बहुत से स्थल मिल जायेंगे जिनका रामायण से कोई वास्तविक सम्बन्ध जरूर रहा हो , लेकिन उन्हें देखकर एकाएक यह मानने को जी होने लगे की कुछ सम्बन्ध जरूर रहा होगा। खासकर नेपाल ट्राई के जंगलो और नदी -नालो -भरे प्रदेशमें से गुजरते हुए तो मन हो ऐसा हो गया था किसी भी स्थल से जुड़ी किसी असुर की , गन्धर्व की , अप्सरा की , किरात अथवा नागकन्या की गाथा सुनकर एकाएक यह प्रतिक्रिया न होती की यह सब मनगढ़ंत है , ऐसा वास्तव में हुआ नहीं होगा , केवल आदिम -मानव की कच्ची कल्पना ने ये किसस गड़े होंगे। निश्चय ही स्थलों का अपना जादू होता है। ठोस व्यावहारिक आदमी भी ऐसे स्थलों पर पहुंचकर पाता है की उसकी कल्पना चेत उठी है फिर उसे अपनी संस्कृति के पुराण की ही बाते क्यों , दूसरी संस्कृतियों के पुराण भी सच्चे जान पढ़ने लगते है उनके भी वन - देवता और लता -बलाएँ और नदी -अप्सराएं देखते -देखते उसके आगे रूप लेने लगती है। रामायण -स्थलों की खोज पर जाने से पहले लेखक को क्या पता था ?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में से सबसे उचित विकल्प चुनिए। यायावरी यात्राओं के सुखो में एक सुख तो यह है की निकले किसी चीज की खोज में और मिल जाए कोई दूसरी ही चीज। लेकिन जीवन - भर यायावरी करते रहकर भी उस कल्पनातीत आविष्कार के लिए में तैयार नहीं था। जो इस बार राम - जानकी यात्रा के दौरान अकस्मात हुआ। यह तो जानता था की रामायण के चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ , उनके ऐसे अवशेष तो क्या ही मिल सकते है जिन्हे 'ऐतिहासिक' कहा जाए और यह भी जानता था की रामायण क चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ उनके ऐसे बहुत से स्थल मिल जायेंगे जिनका रामायण से कोई वास्तविक सम्बन्ध जरूर रहा हो , लेकिन उन्हें देखकर एकाएक यह मानने को जी होने लगे की कुछ सम्बन्ध जरूर रहा होगा। खासकर नेपाल ट्राई के जंगलो और नदी -नालो -भरे प्रदेशमें से गुजरते हुए तो मन हो ऐसा हो गया था किसी भी स्थल से जुड़ी किसी असुर की , गन्धर्व की , अप्सरा की , किरात अथवा नागकन्या की गाथा सुनकर एकाएक यह प्रतिक्रिया न होती की यह सब मनगढ़ंत है , ऐसा वास्तव में हुआ नहीं होगा , केवल आदिम -मानव की कच्ची कल्पना ने ये किससे गड़े होंगे। निश्चय ही स्थलों का अपना जादू होता है। ठोस व्यावहारिक आदमी भी ऐसे स्थलों पर पहुंचकर पाता है की उसकी कल्पना चेत उठी है फिर उसे अपनी संस्कृति के पुराण की ही बाते क्यों , दूसरी संस्कृतियों के पुराण भी सच्चे जान पढ़ने लगते है उनके भी वन - देवता और लता -बलाएँ और नदी -अप्सराएं देखते -देखते उसके आगे रूप लेने लगती है। धार्मिक स्थलों पर भ्रमण करने से क्या प्रभाव पड़ता है ?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में से सबसे उचित विकल्प चुनिए। यायावरी यात्राओं के सुखो में एक सुख तो यह है की निकले किसी चीज की खोज में और मिल जाए कोई दूसरी ही चीज। लेकिन जीवन - भर यायावरी करते रहकर भी उस कल्पनातीत आविष्कार के लिए में तैयार नहीं था। जो इस बार राम - जानकी यात्रा के दौरान अकस्मात हुआ। यह तो जानता था की रामायण के चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ , उनके ऐसे अवशेष तो क्या ही मिल सकते है जिन्हे 'ऐतिहासिक' कहा जाए और यह भी जानता था की रामायण क चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ उनके ऐसे बहुत से स्थल मिल जायेंगे जिनका रामायण से कोई वास्तविक सम्बन्ध जरूर रहा हो , लेकिन उन्हें देखकर एकाएक यह मानने को जी होने लगे की कुछ सम्बन्ध जरूर रहा होगा। खासकर नेपाल ट्राई के जंगलो और नदी -नालो -भरे प्रदेशमें से गुजरते हुए तो मन हो ऐसा हो गया था किसी भी स्थल से जुड़ी किसी असुर की , गन्धर्व की , अप्सरा की , किरात अथवा नागकन्या की गाथा सुनकर एकाएक यह प्रतिक्रिया न होती की यह सब मनगढ़ंत है , ऐसा वास्तव में हुआ नहीं होगा , केवल आदिम -मानव की कच्ची कल्पना ने ये किससे गड़े होंगे। निश्चय ही स्थलों का अपना जादू होता है। ठोस व्यावहारिक आदमी भी ऐसे स्थलों पर पहुंचकर पाता है की उसकी कल्पना चेत उठी है फिर उसे अपनी संस्कृति के पुराण की ही बाते क्यों , दूसरी संस्कृतियों के पुराण भी सच्चे जान पढ़ने लगते है उनके भी वन - देवता और लता -बलाएँ और नदी -अप्सराएं देखते -देखते उसके आगे रूप लेने लगती है। किस यात्रा के दौरान लेखक के साथ वह घटना घटी , जिसके लिए वह तैयार नहीं था ?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में से सबसे उचित विकल्प चुनिए। यायावरी यात्राओं के सुखो में एक सुख तो यह है की निकले किसी चीज की खोज में और मिल जाए कोई दूसरी ही चीज। लेकिन जीवन - भर यायावरी करते रहकर भी उस कल्पनातीत आविष्कार के लिए में तैयार नहीं था। जो इस बार राम - जानकी यात्रा के दौरान अकस्मात हुआ। यह तो जानता था की रामायण के चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ , उनके ऐसे अवशेष तो क्या ही मिल सकते है जिन्हे 'ऐतिहासिक' कहा जाए और यह भी जानता था की रामायण क चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ उनके ऐसे बहुत से स्थल मिल जायेंगे जिनका रामायण से कोई वास्तविक सम्बन्ध जरूर रहा हो , लेकिन उन्हें देखकर एकाएक यह मानने को जी होने लगे की कुछ सम्बन्ध जरूर रहा होगा। खासकर नेपाल ट्राई के जंगलो और नदी -नालो -भरे प्रदेशमें से गुजरते हुए तो मन हो ऐसा हो गया था किसी भी स्थल से जुड़ी किसी असुर की , गन्धर्व की , अप्सरा की , किरात अथवा नागकन्या की गाथा सुनकर एकाएक यह प्रतिक्रिया न होती की यह सब मनगढ़ंत है , ऐसा वास्तव में हुआ नहीं होगा , केवल आदिम -मानव की कच्ची कल्पना ने ये किससे गड़े होंगे। निश्चय ही स्थलों का अपना जादू होता है। ठोस व्यावहारिक आदमी भी ऐसे स्थलों पर पहुंचकर पाता है की उसकी कल्पना चेत उठी है फिर उसे अपनी संस्कृति के पुराण की ही बाते क्यों , दूसरी संस्कृतियों के पुराण भी सच्चे जान पढ़ने लगते है उनके भी वन - देवता और लता -बलाएँ और नदी -अप्सराएं देखते -देखते उसके आगे रूप लेने लगती है। यायावरी यात्रा किस प्रकार सुखद प्रतीत होती है ?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में से सबसे उचित विकल्प चुनिए। यायावरी यात्राओं के सुखो में एक सुख तो यह है की निकले किसी चीज की खोज में और मिल जाए कोई दूसरी ही चीज। लेकिन जीवन - भर यायावरी करते रहकर भी उस कल्पनातीत आविष्कार के लिए में तैयार नहीं था। जो इस बार राम - जानकी यात्रा के दौरान अकस्मात हुआ। यह तो जानता था की रामायण के चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ , उनके ऐसे अवशेष तो क्या ही मिल सकते है जिन्हे 'ऐतिहासिक' कहा जाए और यह भी जानता था की रामायण क चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ उनके ऐसे बहुत से स्थल मिल जायेंगे जिनका रामायण से कोई वास्तविक सम्बन्ध जरूर रहा हो , लेकिन उन्हें देखकर एकाएक यह मानने को जी होने लगे की कुछ सम्बन्ध जरूर रहा होगा। खासकर नेपाल ट्राई के जंगलो और नदी -नालो -भरे प्रदेशमें से गुजरते हुए तो मन हो ऐसा हो गया था किसी भी स्थल से जुड़ी किसी असुर की , गन्धर्व की , अप्सरा की , किरात अथवा नागकन्या की गाथा सुनकर एकाएक यह प्रतिक्रिया न होती की यह सब मनगढ़ंत है , ऐसा वास्तव में हुआ नहीं होगा , केवल आदिम -मानव की कच्ची कल्पना ने ये किससे गड़े होंगे। निश्चय ही स्थलों का अपना जादू होता है। ठोस व्यावहारिक आदमी भी ऐसे स्थलों पर पहुंचकर पाता है की उसकी कल्पना चेत उठी है फिर उसे अपनी संस्कृति के पुराण की ही बाते क्यों , दूसरी संस्कृतियों के पुराण भी सच्चे जान पढ़ने लगते है उनके भी वन - देवता और लता -बलाएँ और नदी -अप्सराएं देखते -देखते उसके आगे रूप लेने लगती है। लेखक के अनुसार प्राकृतिक वस्तुएँ जैसे नदी , लता आदि किस प्रकार कारणवश मानव के समुख अपना रूप बदलने लगते है ?