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सिद्ध करें कि किसी त्रिभुज की भुजाओं को ...

सिद्ध करें कि किसी त्रिभुज की भुजाओं को एक ही क्रम में बढ़ाने पर बने बहिष्कोणों का योगफल `360^(@)` या चार समकोण होता है।

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दिए गए पद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उसके आधार पर पूछे गए प्रश्न का यथोचित उत्तर दीजिए। पद्यांश 1 है जन्म लेते जगह में एक ही एक ही पौधा उन्हें है पालता रात में उन पर चमकता चाँद भी एक ही-सी चाँदनी है डालता छेद कर काँटा किसी की अँगुलियाँ फाड़ देता है किसी का वर वसन। प्यार डूबी तितलियों के पर कतर भौंर का है बेध देता श्याम तन फूल लेकर तितलियों को गोद में भौंर को अपना अनूठा रस पिला निज सुगन्धों का निराले ढंग से है सदा देता कली का जी खिला। है खटकता एक सबकी आँख में दूसरा है सोहता सुर-सीस पर। किस तरह कुल की बड़ाई काम दे जो किसी में हो बड़प्पन की कसर। कवि ने 'कांटे' शब्द का प्रयोग किसके लिए किया है?

शिक्षक द्वारा किसी प्रकरण या पाठ विशेष की विषय-वस्तु का शिक्षा के शास्त्रीय विश्लेषण करने में कितने सोपानों का अनुसरण करना होता है

ABC is a right angled triangle, right angled at A. A circle is inscribed in it. The lengths of two sides containing the right angle are 48 cm and 14 cm. The radius of the inscribed circle is: ABC एक समकोण त्रिभुज है, A पर समकोण है। एक वृत्त इसमें अन्तर्निहित है. समकोण वाले दो भुजाओं की लंबाई 48 सेमी और 14 सेमी है। अन्तर्निहित वृत्त की त्रिज्या है

शिक्षा आज दुविधा के अजब दोराहे पर खड़ी है। एक रास्ता चकाचौंध का है, मृगतृष्णा का है। बाजार की मृगतृष्णा शिक्षार्थी को लोभ-लालच देकर अपनी तरफ दौड़ाते रहने को विवश करने को उतारू खड़ी है। बाजार के इन ललचाने वाले रास्तों पर आकर्षण है, चकाचौंध है और सम्मोहित कर देने वाले सपने हैं। दूसरी तरफ शिक्षा का साधना मार्ग है, जो शान्ति दे सकता है, सन्तोष दे सकता है और हमारे आत्मतत्त्व को प्रबल करता हुआ विमल विवेक दे सकता है। निश्चित ही वह मार्ग श्रेयस्कर है, मगर अपनी ओर आकर्षित करने वाले बाजार का मार्ग प्रेयस्कर है। इस दोराहे पर खड़ा शिक्षार्थी बाजार को चुन लेता है। लाखों-करोड़ों लोग आज इसी रास्ते के लालच में आ गए हैं और शिक्षा के भँवरजाल में फंस गए हैं। बाजार की खूबी यही है कि वह फंसने का अहसास किसी को नहीं होने देता और मनुष्य लगातार फंसता चला जाता है। किसी को यह महसूस नहीं होता कि वह दलदल में है बल्कि महसूस यह होता है कि बाजार द्वारा दिए गए पैकेज के कारण वह सुखी है। अब यह अलग बात है कि सच्चा सुख क्या है? और सुख 'का भ्रम क्या है? जरूरत विचार करने की है। सवाल यह है कि बाजार विचार करने का भी अवकाश देता हैं 'या कि नहीं। गद्यांश के आधार पर कहा जा सकता है कि

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