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Class 10
BIOLOGY
आहार नाल के प्रमुख कार्य क्या हैं एवं यक...

आहार नाल के प्रमुख कार्य क्या हैं एवं यकृत तथा अग्न्याशय का नामांकित चित्र बनाइए।

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To do a certain work, the ratio of efficiency of A to that of B is 3:7.Working together, they can complete the work in 10 1/2 days. They work together for 8 days. 60% of the remaining work will be completed by A alone in : किसी कार्य को करने में, A की कार्य क्षमता तथा 8 की कार्य क्षमता का अनुपात 3: 7 है | एक साथ कार्य करते हुए, वे इस कार्य को 10 1/2 दिनों में कर सकते हैं | वे 8 दिनों तक साथ कार्य करते हैं | शेष कार्य का 60% हिस्सा A अकेले कितने दिनों में पूरा करेगा ?

फलन |अभ्यास कार्य |फलन के प्रान्त, परिसर तथा सहप्रांत|वेवी वक्र विधि |अभ्यास कार्य |फलन का प्रान्त|सारांश

वर्तनी-परिभाषा|शुद्ध वर्तनी लिखने के प्रमुख नियम|वर्तनी संबंधी अशुद्धियाँ एवं उनमें सुधार|अक्षर रचना की जानकारी का अभाव|भाषा संबंधी अशुद्धियाँ|OMR

A can do a work alone in 20 days. A and B together can do the same work in 15 days. B and C together can do the same work in 752 days. What is the ratio of efficiency of A, B and C in terms of working? A किसी कार्य को अकेला 20 दिनों में कर सकता है | A तथा B मिलकर उसी कार्य को 15 दिनों में कर सकते हैं |B तथा C मिलकर उसी कार्य को 75/2 दिनों में कर सकते हैं | कार्य करने की दृष्टि से A, B तथा C की दक्षता का अनुपात कितना है?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित में सबसे उचित विकल्प को चुनिए। भारत की शस्यश्यामला भूमि में जो निसर्ग-सिद्ध सुषमा है, उस पर भारतीय कवियों का चिरकाल से अनुराग रहा है। यों तो प्रकृति की साधारण वस्तुएँभी मनुष्यमात्र के लिए आकर्षक होती हैं, परन्तु उसकी सुन्दरतम विभूतियों __ में मानव वृत्तियाँ विशेष प्रकार से रमती हैं। अरब के कवि मरुस्थल में बहते हुए किसी साधारण से झरने अथवा ताड़ के लंबे-लंबे पेड़ों में ही सौन्दर्य का अनुभव कर लेते हैं तथा ऊँटों की चाल में ही सुन्दरता की कल्पना कर लेते हैं, परन्तु जिन्होंने भारत की हिमाच्छादित शैलमाला पर संध्या की सुनहली किरणों की सुषमा देखी हैं अथवा जिन्हें घनी अमराइयों की छाया में कल-कल ध्वनि से बहती हुई निर्झरिणी तथा उसकी समीपवर्तिनी लताओं की वसन्तश्री देखने का अवसर मिला है, साथ ही जो यहाँ के विशालकाय हाथियों की मतवाली चाल देख चुके हैं, उन्हें अरब की उपर्युक्त वस्तुओं में सौन्दर्य तो क्या, उलटे नीरसता, शुष्कता और भद्दापन ही मिलेगा। भारतीय कवियों को प्रकृति की सुन्दर गोद में क्रीड़ा करने का सौभाग्य प्राप्त है। ये हरे-हरे उपवनों तथा सुन्दर जलाशयों के तटों पर विचरण करते तथा प्रकृति के नाना मनोहारी रूपों से परिचित होते हैं। यही कारण है कि भारतीय कवि प्रकृति के संश्लिष्ट तथा सजीव चित्र जितनी मार्मिकता, उत्तमता तथा अधिकता से अंकित कर सकते हैं तथा उपमा-उत्प्रेक्षाओं के लिए जैसी सुन्दर वस्तुओं का उपयोग कर सकते हैं, वैसा रूखे-सूखे देश के निवासी कवि नहीं कर सकते। यह भारत-भूमि की ही विशेषता है कि यहाँ के कवियों का प्राकृतिक-वर्णन तथा तत्संभव सौन्दर्य-ज्ञान उच्च कोटि का होता है। प्रकृति के रम्य रूपों में तल्लीनता की जो अनुभूति होती है उसका उपयोग कविगण कभी-कभी रहस्यमयी भावनाओं के संचार में भी करते हैं। यह अखंड भूमण्डल तथा असंख्य ग्रह, उपग्रह, रवि-शशि अथवा जल, वायु, अग्नि, आकाश कितने रहस्यमय तथा अज्ञेय हैं? इनके सृष्टि-संचालन आदि के सम्बन्ध में दार्शनिकों अथवा वैज्ञानिकों ने इन तत्वों का निरूपण किया है। प्रस्तुत गद्यांश में किसे प्रधान बवाया गया है?