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PHYSICS
यदि पृथ्वी कि सूर्य से दुरी वर्तमान दुरी...

यदि पृथ्वी कि सूर्य से दुरी वर्तमान दुरी कि दोगुनी हो जायें तो वर्ष में कितने दिन हो जायेंगे?

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A sum doubles in 4 years at a certain rate of compound interest. In how many years does it amount to 8 times itself at the same rate? कोई राशि चक्रवृद्धि ब्याज की एक निश्चित दर से 4 वर्षों में दोगुनी हो जाती है | इसी दर से यह कितने वर्षों में खुद से 8 गुना हो जाएगी ?

A sum of money, deposited at some rate percent per annum of compound interest, doubles itself in 4 years. In how many years will it become 16 times of itself at the same rate ? चक्रवृद्धि व्याज की किसी वार्षिक प्रतिशत दर से कोई धनराशि 4 वर्ष में स्वयं की दोगुनी हो जाती है। उसी दर से, कितने वर्ष में यह स्वयं की 16 गुनी होगी?

A sum doubles in seven years at simple interest. In how many years will the sum become five times the original sum? एक राशि साधारण ब्याज पर सात वर्षों में दोगुनी हो जाती है | कितने वर्षों में यह राशि मूल राशि से पांच गुना हो जाएगी ?

At what rate percent per annum with simple interest will a sum of money double in 12.5 years? प्रति वर्ष कितने प्रतिशत साधारण ब्याज की दर से एक राशि 12.5 वर्षों में दोगुनी हो जायेगी ?

A sum of money becomes double of itself in 50 months when invested on simple interest. What is the rate of interest per annum? साधारण ब्याज पर निवेश की गयी कोई राशि 50 महीनों में खुद से दोगुनी हो जाती है | प्रति वर्ष ब्याज की दर ज्ञात करें |

An aeroplane flying horizontally at a height of 3 Km. above the ground is observed at a certain point on earth to subtend an angle of 60^@ . After 15 sec flight, its angle of elevation is changed to 30^@ . The speed of the aeroplane (taking sqrt3 = 1.732) is- कोई वायुयान पृथ्वी की सतह से 3 कि.मी. ऊपर क्षेतिज उड़ रहा है। पृथ्वी से किसी बिन्दु से यह देखने में आता है कि वह 60^@ के कोण पर कक्षांतरित होता है। 15 सेकण्ड बाद उसका उन्नयन कोण 30^@ परिवर्तित हो जाता हैं वायुयान की चाल बताइए। ( sqrt3 =1.732)

हमारे व्यावहारिक अथवा वास्तविक जीवन में भी यही सिद्धांत काम करता है कि हम समाज अथवा लोगों को जो देते हैं वही हमारे पास लौटकर आता है। हम लोगों से प्यार करते हैं तो लोग भी हमें प्यार करते हैं लेकिन यदि हम लोगों से घृणा करते हैं तो वे भी हमसे घृणा ही करेंगे इसमें संदेह नहीं। यदि हम सबके साथ सहयोग करते हैं अथवा ईमानदार बने रहते हैं तो दूसरे भी हमारे प्रति सहयोगात्मक और ईमानदार हो जाते है। इसे आकर्षण का नियम कहा गया है। हम जैसा स्वभाव विकसित कर लेते हैं वैसी ही चीजें हमारी ओर आकर्षित होती हैं। गंदगी मक्खी को आकर्षित करती है तो फूल तितली को आकर्षित करते हैं। यदि हम स्वयं को फूल जैसा सुंदर, सुवासित, मसृण व रंगीन अर्थात सुंदर गुणों से युक्त बना लेंगे तो स्वाभाविक है कि समाज के सुंदर गुणी व्यक्ति हमारी ओर आकर्षित होंगे ही। यदि हम चाहते हैं कि हमारे संपर्क में केवल अच्छे लोग ही आएँ तो हमें स्वयं को उनके अनुरूप बनाना होगा - दुर्गुणों में नहीं, सदगुणों में। अपने व्यवहार को व्यवस्थित व आदतों को अच्छा करना होगा। अपनी वाणी को कोमल व मधुर बनाना होगा। केवल मात्र बाहर से नहीं, मन की गहराइयों में रचयं को सुंदर बनाना होगा। यदि हम बाहरी रुप स्वरुप से नहीं, वरन मन से सुंदर बन पाते है तो विचार और कर्म स्वयं सुंदर हो जाएंगे। जीवन रूपी सितार ठीक बजने लगेगा। जीवन के प्रति सत्यम् शिवम् और सुंदरम् का आकर्षण बढ़ने लगेगा। हमारे व्यवहार और कार्य स्वयं ठीक से हो जाएंगे यदि हम