Home
Class 11
PHYSICS
एक सरल लोलक का आवर्तकाल T है । बॉब का आप...

एक सरल लोलक का आवर्तकाल T है । बॉब का आपेक्षिक घनत्व `sigma` है ।बॉब को पानी में रखकर इसके द्वारा दोलन कराये जाते है । यह माना गया की श्यानता आदि के कारण कोई घर्षण नहीं है , लोलक का आवर्तकाल क्या होगा ?

Promotional Banner

Similar Questions

Explore conceptually related problems

आज जब भी कोई गाँव का नाम लेता है तो एक अलग ही छवि उभरती है। वह छवि कहती है कि वहाँ गरीबी है। वहाँ अशिक्षा और अज्ञान है। वहाँ अंध-विश्वास है। गंदगी है। बीमारी है। हमें विचार करना है कि सच क्या है? क्या हमारे गाँव ऐसे ही थे जैसे आज हैं? आज जो गाँवों का दुर्दशा हुई है उसके लिए जिम्मेदार कौन है? इन सवालों की पड़ताल करते हुए हमें नई समझ बनानी है तथा गाँवों के सही स्वरूप की पहचान करनी है। वैसे यह खुदा का शुक्र है कि गाँवों पर कई तरह के आक्रामक दुष्प्रभावों के बावजूद उनका मूल स्वरूप नहीं बदलता है। जो दूरस्थ गाँव हैं-- शहर के पड़ोस से दूर उनकी निजता तो खासी बची हुई है। ऐसी स्थिति में हमारा दायित्व, एक शिक्षित समाज का दायित्व क्या बनता है? हमें विचार करना है। मंगर ऐसा कोई भी विचार गाँवों को आँखों से देखे बिना, स्वयं देख कर समझे बिना नहीं किया जा सकता! तो हमें अपनी फर्स्ट हैंड समझ बनाने के लिए गाँव चलना है। अपने मूल स्वरूप में गाँव एक वेधशाला है। एक विद्याशाला है। गाँच वेधशाला इसलिए है कि ज्ञान को रोज वहाँ कर्म की कसौटी पर कसा जाता है। आजमाया जाता है। जो ज्ञान कर्म की कसौटी पर खरा न उतरे तो उसे खारिज कर दिया जाता है। हर ज्ञान के होने की शर्त यह है वह सृजन और उत्पादन की शान पर तराशा जाए। गाँव को प्रयोगशाला क्यों कहा गया है?

"लिखाई का कार्य पढ़ाई के कार्य से पूर्व शुरू होना चाहिए, क्योंकि लिखाई, पढ़ाई की अपेक्षा सरल है।" लेखन शिक्षण के संदर्भ में यह मत व्यक्त किया है

आज जब भी कोई गाँव का नाम लेता है तो एक अलग ही छवि उभरती है। वह छवि कहती है कि वहाँ गरीबी है। वहाँ अशिक्षा और अज्ञान है। वहाँ अंध-विश्वास है। गंदगी है। बीमारी है। हमें विचार करना है कि सच क्या है? क्या हमारे गाँव ऐसे ही थे जैसे आज हैं? आज जो गाँवों का दुर्दशा हुई है उसके लिए जिम्मेदार कौन है? इन सवालों की पड़ताल करते हुए हमें नई समझ बनानी है तथा गाँवों के सही स्वरूप की पहचान करनी है। वैसे यह खुदा का शुक्र है कि गाँवों पर कई तरह के आक्रामक दुष्प्रभावों के बावजूद उनका मूल स्वरूप नहीं बदलता है। जो दूरस्थ गाँव हैं-- शहर के पड़ोस से दूर उनकी निजता तो खासी बची हुई है। ऐसी स्थिति में हमारा दायित्व, एक शिक्षित समाज का दायित्व क्या बनता है? हमें विचार करना है। मंगर ऐसा कोई भी विचार गाँवों को आँखों से देखे बिना, स्वयं देख कर समझे बिना नहीं किया जा सकता! तो हमें अपनी फर्स्ट हैंड समझ बनाने के लिए गाँव चलना है। अपने मूल स्वरूप में गाँव एक वेधशाला है। एक विद्याशाला है। गाँच वेधशाला इसलिए है कि ज्ञान को रोज वहाँ कर्म की कसौटी पर कसा जाता है। आजमाया जाता है। जो ज्ञान कर्म की कसौटी पर खरा न उतरे तो उसे खारिज कर दिया जाता है। हर ज्ञान के होने की शर्त यह है वह सृजन और उत्पादन की शान पर तराशा जाए। गाँव की छवि में क्या शामिल नहीं है?

Recommended Questions
  1. एक सरल लोलक का आवर्तकाल T है । बॉब का आपेक्षिक घनत्व sigma है ।बॉब को ...

    Text Solution

    |

  2. एक इकाई त्रिज्या वाली अर्द्धगोलीय कटोरे में आधी गहराई तक पानी भरा है क...

    Text Solution

    |

  3. फसल क्या है? और तो कुछ नहीं है वह नदियों के पानी का जादू है वह हाथो के...

    Text Solution

    |

  4. फसल क्या है? और तो कुछ नहीं है वह नदियों के पानी का जादू है वह हाथो के...

    Text Solution

    |

  5. फसल क्या है? और तो कुछ नहीं है वह नदियों के पानी का जादू है वह हाथो के...

    Text Solution

    |

  6. दोलन|सरल आवर्त गति #!#सरल आवर्त गति में त्वरण तथा आवर्तकाल का व्यंजक

    Text Solution

    |

  7. पृथ्वी की त्रिज्या के तुलनीय लंबाई के सरल लोलक का आवर्तकाल|मुक्त दोलन ...

    Text Solution

    |

  8. सरल लोलक का आवर्तकाल

    Text Solution

    |

  9. सरल लोलक की गति किस प्रकार की गति है

    Text Solution

    |