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अरूण 120 में एक किलोग्राम रोव खरीदता हैं...

अरूण 120 में एक किलोग्राम रोव खरीदता हैं और 25% लाभ कै साथ वह उन्हें स्वाति को बेच देता है। स्वाति उन्हें दिव्या को बेच देती है जो उन्हे' फिर रो दिव्या 10% लाभ कै साथ 198 में बेच देती हैं। स्वाति ने कितना लाभ प्रतिशत अर्जित किया गया?

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. Shaan has a total of Rs 5,500 with him. He buys product ‘Z’ at Rs 5,000 from this sum and then sells it to another person, thus making a profit of 15% on it . With all the money he has now, he buys product ‘X’ and then sells it to another person making a profit of 25% on it. What is the total money Shaan has now? शान के पास कुल 5,500 रुपये हैं | वह इस राशि में से 5,000 रुपये देकर वस्तु Z को खरीदता है तथा इसे किसी अन्य व्यक्ति को बेच देता है, जिससे उसे इस पर 15% का लाभ होता है| अब उसके पास जितने रुपये हैं, उससे वह वस्तु X खरीदता है तथा इसे 25% के लाभ पर किसी अन्य व्यक्ति को बेच देता है | शान के पास अब कितने रुपये हैं ?

A person sold an article at a loss of 16%. Had he sold it for Rs. 660 more, he would have gained 8%. If the article is sold at Rs. 3,080, then how much profit percentage is gained? एक व्यक्ति ने 16% की हानि पर एक वस्तु को बेचा। अगर उसने इसे 660 रुपये अधिक में बेचा होता तो उसे 8% का लाभ होता। यदि वस्तु को 3,080 रुपये में बेचा जाता है, तो कितना लाभ प्रतिशत प्राप्त होता है

जिन्होंने भी बच्चों को पढ़ाने की कोशिश की है-चाहे वे माता-पिता हों या शिक्षक उनके खाते में सफलता के साथ-साथ असफलता और निराशा भी दर्ज होती है। ऐसे में एक सवाल उठता है कि आखिर इतना मुश्किल क्यों है पढ़ाना ? एक मुख्य समस्या तो यह है कि पढ़ाने वालों का विश्वास बच्चों की क्षमताओं या योग्यताओं पर काफी कम होता है। यह बात मैं यूँ ही नहीं कर रही बल्कि एक अभिभावक, एक शिक्षक और एक शिक्षक प्रशिक्षक होने के आधार पर कह रही हूँ कई बार मैं उस पाठ को लेकर बच्चों (दूसरी, तीसरी या फिर पाँचवीं) के सामने खड़ी होती हूँ जो मुझे उन्हें पढ़ाना है। मेरे पास कुछ जानकारी है जो मैं बच्चों को देना चाहती हूँ। लेकिन मैं यह जानकरी उन्हें क्यूँ देना चाहती हूँ? क्योंक मुझे लगता है कि वे इसके बारे में नहीं जानते, इसे जानने में उन्हें मजा आएगा, यह दुनिया के बारे में उनके नजरिए को विस्तृत करने में मदद करेगी, यह उन्हें बेहतर इन्सान बनने में मदद करेगी, भले ही थोड़ा-सा। लेकिन कभी-कभार पढ़ाना शुरू करने से पहले ही मेरे दिमाग में यह ख्याल बुदबुदाना शुरू कर देता है कि शायद उन्हें वह पहले से ही मालूम हो जो मैं उन्हें बताना चाहती हूँ, तो उन्हें कुछ बताने की बजाय मैं उनके सामने सवाल रख देती हूँ। इसे जानने में उन्हें मजा आएगा।' वाक्य में रेखांकित सर्वनामों का प्रयोग किनके लिए हुआ है?

जिन्होंने भी बच्चों को पढ़ाने की कोशिश की है-चाहे वे माता-पिता हों या शिक्षक उनके खाते में सफलता के साथ-साथ असफलता और निराशा भी दर्ज होती है। ऐसे में एक सवाल उठता है कि आखिर इतना मुश्किल क्यों है पढ़ाना ? एक मुख्य समस्या तो यह है कि पढ़ाने वालों का विश्वास बच्चों की क्षमताओं या योग्यताओं पर काफी कम होता है। यह बात मैं यूँ ही नहीं कर रही बल्कि एक अभिभावक, एक शिक्षक और एक शिक्षक प्रशिक्षक होने के आधार पर कह रही हूँ कई बार मैं उस पाठ को लेकर बच्चों (दूसरी, तीसरी या फिर पाँचवीं) के सामने खड़ी होती हूँ जो मुझे उन्हें पढ़ाना है। मेरे पास कुछ जानकारी है जो मैं बच्चों को देना चाहती हूँ। लेकिन मैं यह जानकरी उन्हें क्यूँ देना चाहती हूँ? क्योंक मुझे लगता है कि वे इसके बारे में नहीं जानते, इसे जानने में उन्हें मजा आएगा, यह दुनिया के बारे में उनके नजरिए को विस्तृत करने में मदद करेगी, यह उन्हें बेहतर इन्सान बनने में मदद करेगी, भले ही थोड़ा-सा। लेकिन कभी-कभार पढ़ाना शुरू करने से पहले ही मेरे दिमाग में यह ख्याल बुदबुदाना शुरू कर देता है कि शायद उन्हें वह पहले से ही मालूम हो जो मैं उन्हें बताना चाहती हूँ, तो उन्हें कुछ बताने की बजाय मैं उनके सामने सवाल रख देती हूँ। किस शब्द में उपसर्ग और प्रत्यय-दोनों का प्रयोग हुआ है?

जिन्होंने भी बच्चों को पढ़ाने की कोशिश की है-चाहे वे माता-पिता हों या शिक्षक उनके खाते में सफलता के साथ-साथ असफलता और निराशा भी दर्ज होती है। ऐसे में एक सवाल उठता है कि आखिर इतना मुश्किल क्यों है पढ़ाना ? एक मुख्य समस्या तो यह है कि पढ़ाने वालों का विश्वास बच्चों की क्षमताओं या योग्यताओं पर काफी कम होता है। यह बात मैं यूँ ही नहीं कर रही बल्कि एक अभिभावक, एक शिक्षक और एक शिक्षक प्रशिक्षक होने के आधार पर कह रही हूँ कई बार मैं उस पाठ को लेकर बच्चों (दूसरी, तीसरी या फिर पाँचवीं) के सामने खड़ी होती हूँ जो मुझे उन्हें पढ़ाना है। मेरे पास कुछ जानकारी है जो मैं बच्चों को देना चाहती हूँ। लेकिन मैं यह जानकरी उन्हें क्यूँ देना चाहती हूँ? क्योंक मुझे लगता है कि वे इसके बारे में नहीं जानते, इसे जानने में उन्हें मजा आएगा, यह दुनिया के बारे में उनके नजरिए को विस्तृत करने में मदद करेगी, यह उन्हें बेहतर इन्सान बनने में मदद करेगी, भले ही थोड़ा-सा। लेकिन कभी-कभार पढ़ाना शुरू करने से पहले ही मेरे दिमाग में यह ख्याल बुदबुदाना शुरू कर देता है कि शायद उन्हें वह पहले से ही मालूम हो जो मैं उन्हें बताना चाहती हूँ, तो उन्हें कुछ बताने की बजाय मैं उनके सामने सवाल रख देती हूँ। लेखिका को कौन-सा ख्याल परेशान करता है?

A manufacturer sells the product to a wholesaler at 6% profit, the wholesaler sells the product to a retailer at 8% profit and the retailer sells the product to his customer at 10% profit. The price paid by the customer is rs 31,482. The cost of the product to the manufacturer is: एक निर्माता थोक व्यापारी को 6% लाभ पर वस्तु बेचता है | थोक व्यापारी इसे खुदरा व्यापारी को 8% लाभ पर बेचता है तथा खुदरा व्यापारी इसे ग्राहक को 10% लाभ पर बेच देता है | ग्राहक के द्वारा दी गयी कीमत 31,482 रुपये है, तो निर्माता के लिए इस उत्पाद की कीमत क्या होगी ?