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Class 12
CHEMISTRY
Ni ^(2 +) कि समवन्य संख्या 4 होती है। ...

`Ni ^(2 +)` कि समवन्य संख्या 4 होती है।
`NiCl _(2) + KON ` (अधिकता में) `to A` (सयानो संकुल)
`NiC l_(2)+` (अधिकता में) `to B` (क्लोरो संकुल)
A तथा B की चुम्बकीय प्रवृत्ति का आकलन कीजिए

A

दोनों प्रतिचुम्बकीय हैं

B

A प्रतिचुम्बकीय हैं तथा B एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन के साथ अनुचुम्बकीय है

C

A प्रतिचुम्बकीय है तथा B दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के साथ अनुचुम्बकीय है

D

दोनों अनुचुम्बकीय हैं

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
C

सायनो संकर `K_(2) [Ni (CN)_(4)]` में संकर आयान `[Ni (CN) _(4) ]^(2-)` है तथा Ni की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है , अर्थात यह `Ni ^(2+)` अथवा NI (ii ) के रूप में उपस्थित है।
`Ni _(28) = 1s ^(2) , 2s ^(2) , 2p ^(6) , 3s ^(2) , 3p ^(6) , 3d ^(8) , 4s ^(2)`
`Ni ^(2+)= 1s ^(2), 2s ^(2), 2p ^(6) , 3s ^(2), 3p ^(6) , 3s ^(8)`

अत: `dsp^(2)` संकरण के कारण इसकी संरचना वर्ग समतल है तथा अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की अनुपस्थिति के कारण यह प्रतिचुम्बकीय है। क्लोरो संकर `K [NiCI_(4)]` में, संकर आयन `[NiCI_(4)]^(2-)` है तथा इसमें निकिल की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है, अर्थात् इसमें निकिल Ni2+ अथवा Ni (II) के रूप में उपस्थित है।
अतः `Ni ^(2+) = 1s ^(2) , 2s ^(2) , 2p ^(6) , 3s ^(2) , 3p ^(6) , 3d ^(8) , 4s ^(0)`
`[NiCI_(4)]^(2-)` आयन में उपस्थित लिगेण्ड `CI^(-)` एक दुर्बल क्षेत्र लिगेण्ड है, अतः यह `Ni^(2+)` में उपस्थित अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों को युग्मित करने में असमर्थ है। अतः इस प्रकार, `sp^(3)`-संकरण के कारण इसकी संरचना । समचतुष्फलकीय है तथा अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति के कारण यह अनुचुम्बकीय प्रवृत्ति रखता है।
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