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CHEMISTRY
निम्न यौगिकों का नाभिकस्नेही योगात्मक अभ...

निम्न यौगिकों का नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रियाओं के लिए सक्रियता का बढ़ता हुआ क्रम होगा
एथेनल (I), प्रोपेनल (II), प्रोपेनोन (III), ब्यूटेनोन (IV)

A

`III lt II lt I lt IV`

B

`II lt I lt III lt IV`

C

`IV lt III lt II lt I`

D

`I lt II gt III gt IV`

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
C

एल्डिहाइड और कीटोन की सक्रियता को दो मुख्य कारणों द्वारा व्यक्त करते हैं:
(i) प्रेरणिक प्रभाव : योगात्मक अभिक्रिया के प्रति कार्बोनिल समूह की क्रियाशीलता कार्बोनिल कार्बन परमाणु पर धनावेश के परिमाण पर निर्भर करती है। अतः कोई भी प्रतिस्थापक जो कार्बोनिल कार्बन पर धनावेश बढ़ाता है, वो इन समूहों की योगात्मक अभिक्रियाओं के लिये क्रियाशीलता भी बढ़ायेगा। ऋणात्मक समूह (-I प्रभाव) योग क्रियाशीलता बढ़ाता हैं जबकि एल्किल समूह (+I प्रभाव) योग क्रियाशीलता कम करता है। अतः कार्बोनिल समूह से अधिक संख्या में एल्काइल समूह जुड़ जाते हैं इसलिए नाभिक स्नेही योगात्मक अभिक्रिया के प्रति इसकी क्रियाशीलता घट जाती है। अत: क्रियाशीलता का। घटता क्रम निम्न है।

(ii) त्रिविम प्रभाव : फार्मेल्डिहाइड में, एल्काइल समूह नहीं होता है जबकि अन्य सभी एल्डिहाइड में एक एल्काइल समूह होता है इसलिए यहाँ नाभिक स्नेही आक्रमण तुलनात्मक रूप से अधिक आसान होता है। लेकिन कीटोन में दो एल्काइल समूह काबोनिल समूह से जुड़े रहते हैं तथा यह आक्रमणकारी समूह के आक्रमण में बाधा उत्पन्न करते है। इस कारक को त्रिविम बाधा भी कहते है दूसरे शब्दों में, जैसे ही बाधा बढ़ती है क्रियाशीलता घटती है। अतः क्रियाशीलता का क्रम है।
`IV lt III lt II lt I`
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