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PHYSICS
लोहे की क्रोड पर एक कुण्डली को लपेट कर इ...

लोहे की क्रोड पर एक कुण्डली को लपेट कर इसके ही ऊपर एक बार फिर उल्ट कर इस प्रकार लपेटा गया है कि क्रोड पर तारों की दो कुण्डलियाँ कसकर लपेट दी गयी है व इनके श्रेणी संयोजन में विपरीत दिशा में धारा प्रवाहित होती है। इसके स्व-प्रेरकत्व के बारे में आप क्या अनुमान लगाते है ? यह अधिक होगा या कम ?

लिखित उत्तर

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दोनों कुण्डलियों में विपरीत दिशा में धारा प्रवाहित होती है अतः इनके स्व-प्रेरकत्व भी एक दूसरे को निरस्त करते है।
यह ऐसी स्थिति है मानों दो कुण्डलियाँ श्रेणी संयोजित हो व उनके फ्लक्स विपरीत दिशा में हो।
Note: प्रतिरोध बॉक्स की प्रतिरोध कुण्डली विपरीत दिशा में दोहरा लपेट कर बनायी जाती है। इससे उसका स्वप्रेरकत्व नगण्य हो जाता है।

`Rne0`
`L~~0` (अप्रेरकीय प्रतिरोध)
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