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PHYSICS
प्रकृति में, प्रायः संरचनात्मक अवयवों के...

प्रकृति में, प्रायः संरचनात्मक अवयवों के क्षय का कारण तनन अथवा संपीडन विकृतियों के बजाय ऐंठन अथवा बंकन के कारण उत्पन्न विशाल बल आपूर्ण होते हैं। संरचनाओं के इस प्रकार भंग होने की प्रक्रिया को आकुंचन कहते हैं तथा वृक्षों जैसी विशाल बेलनाकार संरचनाओं के प्रकरणों में यह बल-आघूर्ण अपने स्वयं के भार के कारण उत्पन्न होकर संरचना को बंकित कर देता है। अत: गुरुत्व केंद्र से गुजरने वाली ऊर्ध्वाधर रेखा संरचना के आधार से नहीं गुजरती। इस बंकन के कारण वृक्ष की केंद्रीय अक्ष के परितः प्रत्यास्थ चल आघूर्ण `(Y pi r^(4))/(4R)` द्वारा व्यक्त किया जाता है, यहाँ Y यंग गुणांक, r तने की शिया तथा वृक्ष की लंबाई के अनुदिश गुरुत्व केंद्र युक्त बंकित पृष्ठ (उदासीन पृष्ठ की वक्रता त्रिज्या है)। वृक्ष के तने की किसी दी गयी त्रिज्या के लिए वृक्ष की क्रांतिक ऊँचाई का आकलन कौजिए।

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