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Class 12
PHYSICS
1900 के आसपास हुई खोज के अनुसार beta-क्ष...

1900 के आसपास हुई खोज के अनुसार `beta`-क्षय प्रक्रम वास्तव में न्यूट्रॉन (n) का क्षय होता है। प्रयोगशाला में पाया गया है कि न्यूट्रॉन के क्षय होने पर एक प्रोटोन (p) तथा एक इलेक्ट्रॉन (`e^(-)`) जनित होते है। इसलिये, न्यूट्रॉन क्षय को द्वि-पिंडी क्षय-प्रकम मानकर, सैद्धांतिक गणना से यह सिद्ध किया गया कि इलेक्ट्रान की गतिज ऊर्जा का मान स्थिर रहना चाहिये। लेकिन प्रयोगों ने दिखाया कि इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा के मान का संतत स्पेक्ट्रम होता है। त्रि-पिंडी क्षय प्रक्रम मानकर, अर्थात `n to p + e^(-) + vec v_e`, 1930 के आसपास Pauli ने इलेक्ट्रान का देखा गया ऊर्जा स्पेक्ट्रम समझाया। प्रति-न्यूट्रिनों (`vecv_e`) को द्रव्यमान-रहित व नगण्य ऊर्जा का मान कर और न्यूट्रान को स्थिर मान कर, संवेग व ऊर्जा संरक्षण के नियम गणना में लगाये गये जिससे इलेक्ट्रॉन की अधिकतम गतिज ऊर्जा को `0.8 xx 10^6eV` आंका गया। प्रोटान की गतिज ऊर्जा केवल प्रतिक्षेप ऊर्जा है।
प्रति-न्यूट्रिनों की अधिकतम ऊर्जा है।

A

`0 le K le 0.8 xx 10^6eV`

B

`3.0 eV le K lt 0.8 xx 10^6 eV`

C

`3.0 eV le K lt0.8 xx 10^6 eV`

D

`0 le K lt 0.8 xx 10^6 eV`

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
D
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