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CHEMISTRY
साइक्लोएल्केन के स्थायित्व को बेयर के वि...

साइक्लोएल्केन के स्थायित्व को बेयर के विकृति सिद्धांत के आधार पर समझाया जा सकता है । यह सिद्धांत केवल साइक्लोप्रोपेन, साइक्लोब्यूटेन तथा साइक्लोपेंटेन पर हो लागू होता है । साइक्लोहेक्सेन तथा उसके व्युत्पन्नो के स्थायित्व को मोर सिद्धातं के आधार पर समझाया जा सकता है । उस सिद्धांत के अनुसार साइक्लोहेक्सेन दो रूपों (कुर्सी तथा नौका) में पाया जाता है। कुर्सी रूप नौका रूप की तुलना में अधिक स्थायी होता है। कुर्सी रूप के प्रत्येक कार्बन पर एक अक्षीय तथा एक निरक्षीय बंध होता है। बड़े समूह सामान्यत: निरक्षीय स्थिति में होते है। साइक्लोहेक्सेन का मुख्य संरूपण कुर्सी रूप ही है परन्तु जब स्थिति 1 तथा 4 पर उपस्थित समूहों के बीच हाइड्रोजन आबन्धन सम्भव होता है तो अणु नौका रूप में आ जाता है।
विपक्ष 1, 4-साइक्लोहेक्सेन डाइऑल का अधिकतम स्थायी रूप है

A

B

C

D

लिखित उत्तर

Verified by Experts

The correct Answer is:
A

जब 1 तथा 4 स्थान पर उपस्थित समूहों के बीच हाइड्रोजन आबंधन होता है तब अणु नौका रूप में होता है। क्योकि कुर्सी रूप से हाइड्रोजन आबंधन सम्भव नहीं है।
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