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अभी तक कुछ नहीं पढ़ा ! अब कैसे 90% आएंगे|CBSE 2021#!#Class 12

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UP Board Exam 2024 | अभी तक कुछ नहीं पढ़ा? आखिरी 5 दिन पढ़कर गणित और विज्ञान में लाये 100 में 100

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए। यह तो आप जानते हैं कि पृथ्वी प्रारंभ में आग का गोला थी। मुझे ठीक-ठीक नहीं पता कि ऐसी आग में मुझ पानी का जन्म कैसे हुआ। लगता यह है कि हमारी पृथ्वी ज्यों-ज्यों ठंडी होती गई तो उसमें मौजूद गैसों में क्रियाएँ हुईं। हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक क्रियाओं से मेरा जन्म हुआ है। इन दोनों ने आपना अस्तित्व मिटाकर मुझे बनाया! पहले मैं पृथ्वी के ऊपर भाप रूप में ही था। फिर जाने क्या हुआ कि मैं ठोस बर्फ बन गया। कल्पना करो चारों ओर बर्फ ही बर्फ। जब सूर्य की किरणें हम पर पड़ती तो चारों और सौन्दर्य बिखर पड़ता। लाखों वर्षों तक इस रूप में रहने के बाद मैं फिसलने लगा क्योंकि बर्फ के ही दबाव से निचली परत पिघलने लगी थी। फिसलकर हम पहुँचे सागर में। वहाँ की तो बात ही निराली थी। वहाँ अब तक हमसे पहले पहुँचे पानी में छोटे-छोटे जीव तैरने लगे थे। घोंघे, मछलियाँ और कछुवे भी। धीरे-धीरे सृष्टि का विस्तार हुआ। जल के बाद स्थल में जीव बनने लगे और आज आप उसी श्रृंखला के अंग हैं और अपने को मनुष्य कहते हैं। कौन-सी संज्ञा बहुवचन में नहीं है?

Directions : A statement followed by four assumptions numbered I, II and III are given. An assumption is something supposed or taken for granted. You have to consider the statement and the following assumptions and decide which of the assumptions is implicit in the statement, then decide which of the answers (a), (b), (c) or (d) is correct. Statement : "The simplest and the most cost-effective way to upgrade your home-Exchange your old furniture and get 25% to 33% off on the new furniture". - An advertisement of a furniture company. Assumptions : I. Nowadays, there is no demand for furniture products unless some attractive scheme is offered. II. Some customers always desire to have best quality and do not bother either for cost or for convenience. III. Some customers want to keep their home up-to-date with reasonable cost and with less hassles./ निर्देश : नीचे दिए गए प्रत्येक प्रश्न में एक कथन दिया गया है, मान्यता I, II और III द्वारा इसका अनुसरण किया जाता है। कोई मान्यता है जिसे ऐसे ही मान लिया गया है। आपको कथन और दी गयी मान्यता पर विचार करना है और निर्धारित करना है कि कौन-सी (a), (b), (c) या (d) मान्यता कथन में निहित है : कथन : “अपने घर को अपग्रेड करने का सबसे सस्ता और सबसे अधिक लागत प्रभावी तरीका-अपने पुराने फर्नीचर को नए फर्नीचर से 25% से 33% की छूट के साथ एक्सचेंज कीजिए"-फर्नीचर कम्पनी का एक विज्ञापन। मान्यताएँ- I. आजकल फर्नीचर उत्पादों की कोई मांग नहीं है, जब तक कि कुछ आकर्षक स्कीम नहीं दी जाती है। II. कुछ ग्राहको को हमेशा अच्छी गुणवत्ता की इच्छा होती है और लागत या सुविधा के लिए परेशान नहीं होते हैं। III. कुछ ग्राहक अपने घर को उचित मूल्य के साथ और कम परेशानी के साथ अपडेट रखना चाहते हैं।

बच्चे की किशोरावस्था शिक्षा-शास्त्रियों और कला-शिक्षकों के लिए अपने आप में एक अलग ही विषय है। यह उन एक समस्या की उम्र कही गई है। कुछ विशेषज्ञ तो इसे 'संकट का समय' मानते हैं। जो भी हो, यह स्पष्ट है कि बच्चे के लिए यह अवस्था एक नया अनुभव होता है। दुनिया बदल जाती है। हो सकता है कि इस मानसिक परिवर्तन का कारण उसका अपना शारीरिक विकास भी हो। आज तक शरीर, जो एक तरीके से बढ़ रहा था, उसमें तब्दीली होने लगती है। उसके लिए यह एक ऐसा अनुभव होता है जो उसका मन अधिक-से-अधिक घेरे रहता है। समाज की परंपरा की वजह से वह इस समस्या को संकोच की वजह से प्रकाशित नहीं करता। उसे इसका खुलासा नहीं मिलता। मन की अवस्था बदल जाती है। मन दूसरी बातों से हटकर इधर-उधर भटकने लगता है। एकाग्रता नहीं रहती। शारीरिक विकास तो एक ढंग से हो जाता है। उसकी शारीरिक प्रवतियां भी सयानों की-सी होने लगती हैं। लेकिन मानस इतना विकसित अभी तक नहीं हो पाता, जिससे वह अपने आप को ठीक-ठीक समझ सके।

भाषा 'जातीय जीवन और उसकी संस्कृति की सर्वप्रधान रक्षिका है, वह उसके शील का दर्पण है, वह उसके विकास का वैभव है। भाषा जीती, और सब जीत लिया। फिर कुछ भी जीतने के लिए शेष नहीं रह जाता। विजितों का अस्तित्व मिट चलता है। विजितों के मुँह से निकली हुई विजयीजनों की भाषा उनकी दासता की सबसे बड़ी चिन्हानी है। पराई भाषा चरित्र की दृढ़ता का अपहरण कर लेती है, मौलिकता का विनाश कर देती है और नकल करने का स्वभाव बना करके उत्कृष्ट गुणों और प्रतिभा से नमस्कार करा देती है। इसीलिए, जो देश दुर्भाग्य से पराधीन हो जाते हैं, वे उस समय तक, जब तक कि वे अपना सब कुछ नहीं खो देते, अपनी भाषा की रक्षा के लिए सदा लोहा लेते रहना अपना कर्तव्य समझते हैं। अनेक यूरोपीय देशों के इतिहास भाषा-संग्राम की घटनाओं से भरे पड़े हैं। प्राचीन रोम साम्राज्य से लेकर अब तक के रूस, जर्मन, इटैलियन, आस्ट्रियन, फ्रेंच और ब्रिटिश सभी साम्राज्यों ने अपने अधीन देशों की भाषा पर अपनी विजय-वैजयंती फहरायी। भाषा-विजयी का यह काम सहज से नहीं हो गया। भाषा-समरस्थली के एक-एक इंच स्थान के लिए बड़ी-बड़ी लड़ाइयाँ हुई। देश की स्वाधीनता के लिए मर मिटने वाले अनेक वीर-पुंगवों के समयों में इस विचार का स्थान सदा ऊँचा रहा है कि देश की भौगोलिक सीमा की अपेक्षा मातृभाषा की सीमा की रक्षा की अधिक आवश्यकता है। वे अनुभव करते थे कि भाषा बची रहेगी तो देश का अस्तित्व और उसकी आत्मा बची रहेगी, अन्यथा फिर कहीं उसका कुछ भी पता न लगेगा। लेखक के अनुसार जातीय जीवन की रक्षिका कौन है?