वस्तु के वेग के समानुपाती प्रतिरोधी बल
कम चाल पर , श्याम माध्यम में गतिशील वस्तुओं पर लगने वाले प्रतिरोध बल को प्रभावी रूप से वस्तु के वेग के समानुपाती रूप में प्रदर्शित करते है। गणितीय रूप से प्रतिरोधी बल को निम्न द्वारा व्यक्त करते हैं -
R=-bv
जहाँ V वस्तु का वेग तथा b एक धनात्मक स्थिरांक है जो वस्तु के आकर एवं माप पर तथा माध्यम के गुणों पर निर्भर करता है। ऋणात्मक चिन्ह दर्शाता है कि प्रतिरोधी बल वेग के विपरीत दिशा में है।
मानिये कि m द्रव्यमान के एक गोले को स्थिर अवस्था से द्रव में मुक्त करते है। गोले पर केवल प्रतिरोधी बल R तथा भार mg लगता हुआ माने। इसकी गति को न्यूटन के द्वितीय नियम का प्रयोग करते हुए व्यक्त कर सकते है यघपि डूबी हुई वस्तुओं पर उत्प्लावन बल भी लगता है , परन्तु यह स्थिर बल है तथा इस बल का प्रभाव एक नियत बल द्वारा गोले के आभासी भार में परिवर्तित करके बताया जाता है। अतः हम इसे यहाँ छोड़ सकते है ।
इस प्रकार `mg-bv=m(dv)/(dt) " " rArr(dv)/(dt)=g-v(b)/(m)`
समीकरण को हल करने पश्चात्
`v=(b)/(m)(1-e^(-bt//m))`
जहाँ e=2.71, प्राकृतिक लोगरिथम का आधार है।
जब बढ़ता हुआ प्रतिरोधी बल अंत में भार को संतुलित करता है , तब त्वरण शून्य हो जाता है। इस बिंदु पर वस्तु सीमांत वेग `V_(top)` पर पहुँच जाती है तथा शून्य त्वरण से आगे गति करती रहती है। अतः `V=V_(top)(1-e^((bt)/(m)))`
एक प्रयोगिता व्यवस्था में चार वस्तुओं I,II,III,IV को समान द्रव में छोड़ते है। आगे की गति से सम्बंधित इकट्ठे किये गये आँकड़ों के आधार पर स्थिरांक b के मान की गणना की गई थी। दी गयी तालिका में सम्बंधित आँकड़ें प्रस्तुत किये गये है।
गति शुरू होने से न्यूनतम समय में कौन सी वस्तु पहले अपने सीमांत वेग का आधा वेग प्राप्त करती है यदि सभी वस्तुओं को एक साथ छोड़ा गया हो ?