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BIOLOGY
डायरिया या टाइफॉइड रोग के कारण , रोग के ...

डायरिया या टाइफॉइड रोग के कारण , रोग के लक्षण तथा उसकी रोकथाम के उपायों का उल्लेख करे।

लिखित उत्तर

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डायरिया- बच्चों में होने वाली एक सामान्य बीमारी है। यह संक्रमित भोजन एवं पानी के उपयोग के कारण उत्पन्न होता है। इसमें 24 घंटों तक लागातार पतला पाखाना होता रहता है। कारण डायरिया, इशरशिया, कोली, शिगेला आदि जैसे बैक्टीरिया तथा प्रोटोजोआ एवं वायरस द्वारा उत्पन्न होता है। लक्षण (i) लगातार पतला पाखाना तथा उल्टी होना। (ii) शरीर में पानी की कमी के कारण रोगी चिड़चिड़ा हो जाता है, उसकी आँखें धंसी नजर आती हैं, नाक में चींटी रेंगती महसूस होती है, जीभ तथा मुँह सूखा लगता है। अचानक भार में कमी, धीमी नाड़ी गति, गहरा श्वास तथा ज्वर या बेहोशी इसके लक्षण हैं। रोकथाम–(i) भोजन तथा अन्य दूसरे खाद्य पदार्थों को ढंक कर रखना चाहिए। (ii) फल एवं सब्जियों को प्रयोग से पहले अच्छी तरह धो लेना चाहिए। (iii) व्यक्तिगत साफ-सफाई रखी चाहिए। भोजन करने से पहले अच्छी तरह से साबुन से हाथ धोने चाहिए। (iv) सामुदायिक स्वच्छता भी महत्त्वपूर्ण है। (v) बासी एवं बिना ढंका खाना नहीं खाना चाहिए। नियंत्रण-(i) रोगी को पूर्ण आराम करना चाहिए। (ii) जीवाणु विरोधी दवाइयों तथा डायरियारोधी उपायों का उपयोग डायरिया के उपचार हेतु किया जाना चाहिए। (iii) शरीर में पानी की कमी को थोड़ी-थोड़ी मात्रा ORS लगातार देकर पूरी करनी चाहिए। (iv) इसबगोल की भूसी पानी अथवा दही के साथ लेनी चाहिए। (v) कच्चे केले के उबले हुए गुदे के साथ जरूरत के अनुसार नमक, हल्दी चूर्ण तथा चूना का प्रयोग रोगी को आराम पहुंचाता है। टाइफाइड के कारण टाइफाइड सलमोनेला टाइफी (Salmonella Typhis) नामक बैक्टीरिया के कारण होनेवाला संक्रामक रोग है। या का लक्षणतज बुखार, कमजोरी, सिरदर्द, पसीना आना. नाडी की गति (pulse rate) धीमी होना, प्रायः इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं। (ii)टाइफाइड का बुखार करीब 3 सप्ताह तक लगा रहता है। इस समय रोगी की जीभ हमेशा सूखी रहने लगती है तथ्य जीभ की सतह पर सफेद हल्की परत जम जाती है। तेज बुखार के कारण रोगी को कँपकँपी भी होती है। (iii)- रोगी के छोटी आंत में कभी-कभी अल्सर (Ulcer) हो जाता है जिससे रक्त बहने लगता है। टाइफाइडका रोकथाम - (i)इस रोग को फैलने से रोकने के लिये सभी व्यक्तियों को स्वच्छता के महत्त्व का ज्ञान होना अत्यंत जरूरी है। (ii) व्यक्तिगत सफाई के साथ-साथ रहने की जगह तथा पास-पड़ोस को साफ रखकर मक्खियों को पनपने से रोका जाना चाहिये। (iii) पेयजल और भोजन को संक्रमित होने से बचाना, इस रोग को फैलने से.रोकने के लिये अत्यंत आवश्यक है। (iv) टाइफाइड को फैलने से रोकने के लिये रोगी को परिवार के अन्य सदस्यों से पूरी तरह अलग रखना चाहिये। रोगी के इस्तेमाल में लाये जानेवाले सामानों को किसी अन्य स्वस्थ व्यक्ति को व्यवहार में नहीं लाना चाहिये। (v) आंत में अल्सर होने की संभावना को रोकने के लिये रोगी को हल्का तथा आसानी से पचनेवाला भोजन देना चाहिये। (vi) रोगी को पूर्णरूप से आराम करना अत्यावश्यक है। रोग से मुक्त होने के बाद भी 13 दिनों तक आराम करना अनिवार्य है। (vii)TAB (Typhoid Antibacterial या Typhoid Para A and B) के टीके करीब 3 वर्षों तक टाइफाइड के संक्रमण से सुरक्षित रखते हैं। अत: प्रत्येक व्यक्ति को हर तीन वर्ष के बाद चिकित्सक से परामर्श कर TAB का टीका अवश्य लगवाना चाहिये।
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