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BIOLOGY
भण्डारित खाद्य पदार्थों को हानि पहुँचाने...

भण्डारित खाद्य पदार्थों को हानि पहुँचाने वाले जैविक तथा अजैविक कारकों का वर्णन करो।

लिखित उत्तर

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भण्डारण के दौरान खाद्य-पदार्थों को नुकसान पहुंचानेवाले विभिन्न जैविक और अजैविक कारक ये हैं जैविक कारक खाद्य-पदार्थों के भण्डारण अवधि में सबसे अधिक नुकसान सूक्ष्मजीवों, कीटों तथा जंतुओं से होता है। सूक्ष्मजीव जैसे खमीर, फफूंदी, कवक और जीवाणु के अलावे पीड़क कीट जैसे लाल अन्न-भंग, दाल-ग, धान-घुन, मकड़े आदि पशु, जैसे चूहे, खरगोश, बकरी आदि एवं पक्षियों, जैसे गौरैया, तोता, मैना आदि द्वारा खाद्यान्नों की मुख्य रूप से क्षति होती है। अजैविक कारक-भण्डार के मध्य खाद्यान्नों को प्रभावित करनेवाले कुछ प्रमुख अजैविक कारक निम्नलिखित हैं (i) नमी खाद्यान्नों में नमी की मात्रा अधिक-से-अधिक 14% होनी चाहिये। परिपक्व खाद्यान्न में 16-18% तक नमी रहती है, जिसे भण्डारण के पहले सुखाकर 14% से कम करना जरूरी है। अगर खाद्यान्न में नमी अधिक रह गयी तो सूक्ष्मजीवों, कवकों आदि की वृद्धि और क्रियाशीलता की गति बढ़ जाती है, जो हानिकारक है। इससे अनाजों के वजन तथा अंकुरण क्षमता में कमी आती है। उत्पादन की कीमत एवं गुणवत्ता का ह्रास होता है। (ii) तापमान -खाद्यान्नों का सुरक्षित भण्डारण अपेक्षाकृत कम तापमान पर होना चाहिये अन्यथा सूक्ष्मजीव एवं कीटों की वृद्धि एवं क्रियाशीलता बढ़ जाती है। फलस्वरूप खाद्यान्न अपनी गुणवत्ता खो देते हैं और मानव के उपयोग के योग्य नहीं रह पाते।
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