Home
Class 10
PHYSICS
ऊर्जा के उन रूपों के नाम लिखिए जिनमें मह...

ऊर्जा के उन रूपों के नाम लिखिए जिनमें महासागरों में संचित ऊर्जा स्वयं को प्रकट करती है। इनमें से किसका OTEC प्रणाली में उपयोग होता है?

लिखित उत्तर

Verified by Experts

पृथ्वी तल का लगभग 70.4 प्रतिशत भाग महासागरों द्वारा घिरा है। महासागर सौर ऊर्जा के विशाल संग्राहक हैं। यह ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत के रूप में उपलब्ध हो सकती है। महासागर का अथाह जल न केवल सौर ऊर्जा का विशाल संग्राहक है अपितु इसमें अथाह भंडारण क्षमता भी है। महासागर में ऊर्जा अनेक रूपों में उपलब्ध है
(i) ज्वारीय ऊर्जा-महासागरों के तट के अनुदिश जल स्तर का प्रतिदिन चढ़ना-उतरना ज्वार-भाटा कहलाता है। प्रत्येक पूर्णमासी व अमावस्या को उच्च ज्वार आता है जिससे जल स्तर कुछ मीटर तक उठ सकता है। ज्वार-भाटे में पानी के चढ़ने व गिरने से अर्जित ऊर्जा को ज्वारीय ऊर्जा कहा जाता है। इस ऊर्जा का उपयोग विद्युत उत्पन्न करने के लिए किया जा सकता है।
(ii) तरंग ऊर्जा-महासागरों की सतह पर बहती हुई पवन जल-तरंगों में परिवर्तित हो जाती है। जल-तरंगों के अनुदिश गति करती हुई जल की विशाल मात्रा में उच्च परिमाण में गतिज ऊर्जा निहित होती है। यह महासागरीय ऊर्जा का एक रूप है जिसमें ऊर्जा स्वयं को प्रकट करती है। तरंग-ऊर्जा द्वारा व्यापारिक स्तर पर विद्युत उत्पन्न करने के लिए कई प्रकार की युक्तियों का विकास किया गया है।
(iii) सागरीय तापीय ऊर्जा-महासागर की सतह के जल तथा गहराई में स्थित जल के ताप में सदैव कुछ अंतर होता है। कई स्थानों पर यह अंतर `20^@C` तक भी हो सकता है। इस रूप में उपलब्ध ऊर्जा को सागरीय तापीय ऊर्जा कहते हैं। सागरीय तापीय ऊर्जा को विद्युत जैसे उपयोगी रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।
(iv) लवणीय प्रवणता-दो भिन्न समुद्रों का पानी जहाँ परस्पर मिलता है, वहाँ लवण की सांद्रता भिन्न हो जाती है। लवण सांद्रता की इस भिन्नता को लवणीय प्रवणता कहते हैं। इस परिस्थिति का भी ऊर्जा प्राप्त करने में उपयोग किया जाता है।
(v) सागरीय जैव-मात्रा-सागरीय वनस्पतियाँ अथवा जैव द्रव्यमान ऊर्जा का एक अन्य परोक्ष स्रोत है। विशाल मात्रा में उपलब्ध समुद्री शैवाल भविष्य में कभी समाप्त न होने वाला मैथेन ईंधन उपलब्ध करा सकते हैं। सागर ड्यूटीरियम अर्थात् भारी हाइड्रोजन परमाणु का भी स्रोत है। नियंत्रित रूप में ड्यूटीरियम के नाभिक का संलयन करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों में सफलता मिल जाने पर सागर ऊर्जा के एक ऐसे स्रोत में परिवर्तित हो जाएंगे जो करोड़ों वर्षों तक वर्तमान माँग के अनुसार ऊर्जा उपलब्ध करते रहेंगे।
OTEC प्रणाली में सागरीय तापीय ऊर्जा का उपयोग होता है।
Promotional Banner

टॉपर्स ने हल किए ये सवाल

  • ऊर्जा के स्त्रोत

    DEEPAK PUBLICATION|Exercise परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न (लघूत्तरात्मक प्रश्न)|85 Videos
  • प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

    DEEPAK PUBLICATION|Exercise आँकिक प्रश्न (B अन्य महत्त्वपूर्ण आँकिक प्रश्न)|24 Videos
DEEPAK PUBLICATION-ऊर्जा के स्त्रोत -परीक्षोपयोगी अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न (निबन्धात्मक प्रश्न )
  1. जल विद्युत संयंत्र किस प्रकार विद्युत का उत्पादन करता है? जल विद्युत स...

    Text Solution

    |

  2. एक जैव गैस संयंत्र किस प्रकार कार्य करता है? इसे किसानों के लिए एक वरद...

    Text Solution

    |

  3. पवन-चक्कियाँ क्या हैं? उनकी संरचना तथा कार्य बताइए। पवन ऊर्जा के क्या ...

    Text Solution

    |

  4. चित्र की सहायता से बॉक्सनुमा सौर कुकर की संरचना व कार्यविधि का वर्णन क...

    Text Solution

    |

  5. बॉक्सनुमा सौर कुकर व गोलीय परावर्तक प्रकार के सौर कुकर के बीच अंतर बता...

    Text Solution

    |

  6. सौर-सेल की बनावट का वर्णन करें। यह किस सिद्धांत पर कार्य करता है?

    Text Solution

    |

  7. ऊर्जा के उन रूपों के नाम लिखिए जिनमें महासागरों में संचित ऊर्जा स्वयं ...

    Text Solution

    |

  8. (a) सौर सेल क्या होते हैं? (b) दो तत्वों के नाम बताएँ जिनका प्रयो...

    Text Solution

    |

  9. नाभिकीय रिएक्टर के मुख्य घटक कौन-से हैं तथा उनके कार्यों का वर्णन करें...

    Text Solution

    |