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CHEMISTRY
निम्नलिखित के आविष्कारों द्वारा कैसे निर...

निम्नलिखित के आविष्कारों द्वारा कैसे निर्देशित होता है कि डाल्टन का परमाणु नियम अपर्याप्त है-
(i) कैथोड किरण (ii) नाभिक (iii) एनोड किरण (iv) समस्थानिक

लिखित उत्तर

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डाल्टन के अनुसार पदार्थ का सूक्ष्मतम कण परमाणु होता है जिसे खण्डित नहीं किया जा सकता है, लेकिन अनेक प्रयोगों द्वारा प्रमाणित हो चुका है कि परमाणु अतिसूक्ष्म कणों के संयोग से बने होते हैं जिनमें इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन प्रमुख हैं। इन तीनों को मौलिक कण कहा जाता है। अब हम निम्नलिखित आविष्कारों द्वारा डाल्टन के परमाणु नियम को अपर्याप्त बता सकते हैं-
(i) कैथोड किरण—जब नली के अन्दर वायु का दाब घटकर 0.001 mm हो जाता है तब की तुलना कैथोड से अदृश्य किरणें निकलने लगती हैं। ये किरणें उच्च वेग के साथ सीधी रेखाओं में गमन करती हुयी ऐनोड की ओर जाती हैं। गोल्डस्टीन ने इन किरणों का नाम कैथोड किरणें रखा, क्योंकि ये कैथोड से निकलती हैं।
कैथोड किरणों के गुण- (a) कैथोड किरणें कैथोड की सतह से अभिलंब की दिशा में निकलकर अत्यन्त तीव्र वेग से सीधी रेखाओं में गमन करती हैं।
(b) कैथोड किरणे अत्यन्त सूक्ष्म पार्थिव कणों के प्रवाह हैं।
(c) कैथोड किरणें ऋण आवेशयुक्त कणों की बनी होती हैं।
(d) प्रकाश की भाँति ये किरणें भी फोटोग्राफी में प्रयुक्त होनेवाली प्लेट को प्रभावित करती हैं।
(ii) नाभिक- यह परमाणु का केंद्रीय भाग है जिसका आयतन कुल परमाणु में बहुत कम (लगभग `10^(-5)` वाँ भाग) होता है। परमाणु में उपस्थित सभी प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन नाभिक में स्थित होते हैं अर्थात् परमाणु का सारा धन आवेश तथा सारा द्रव्यमान नाभिक या केंद्र में होता है।
नाभिक के गुण- (a) नाभिक का आयतन परमाणु के आयतन की तुलना में काफी कम (नगण्य) होता है।
(b) इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्तीय पथों पर चक्कर लगाते हैं। इन वृत्तीय पथों को कक्षायें कहते हैं, परमाणु सौरमंडल की तरह होता है। इसके केंद्र में सूर्य की तरह नाभिक या केंद्रक वर्तमान होता है। जिसमें परमाणु का पूर्ण धन आवेश उपस्थित रहता है, इसके चारों ओर नक्षत्र की तरह इलेक्ट्रॉन चक्कर लगाते रहते हैं।
(iii) ऐनोड किरण- हम जानते हैं कि इलेक्ट्रॉन सभी परमाणुओं में उपस्थित होता है। चूंकि परमाणु उदासीन होता है। अत: इन इलेक्ट्रॉन के आवेश के विपरीत आवेश वाले अन्य कण भी परमाणु में उपस्थित रहने चाहिये। परमाणु में धनावेश से युक्त कणों के अस्तित्व का प्रमाण गोल्डस्टीन ने दिया। गोल्डस्टीन ने बताया कि यदि विसर्ग नली के कैथोड में बारीक छिद्र कर दिया जाये और निम्न दाब (0.01 mm) तथा अधिक विभवांतर (10,000 V) पर विद्युत धारा प्रवाहित की जाये तो कुछ विशेष प्रकार की किरणें ऐनोड से कैथोड की ओर गमन करती हैं, जिन्हें ऐनोड किरण कहते हैं। चूँकि ये किरणें धनावेश से युक्त होती हैं, अत: इन्हें धन किरणें भी कहते हैं। इन किरणों को कैनाल किरणें भी कहा जाता है, क्योंकि इन किरणों का गमन कैथोड के छेद या कैनाल होकर होता है।
ऐनोड किरणों के गुण- (a) ऐनोड किरणें सीधी रेखा में, परंतु कैथोड किरणे विपरीत दिशा में गमन करती हैं, इसके मार्ग में अपारदर्शक वस्तु के रखने पर वस्तु की छाया बनती है।
(b) इन किरणों के मार्ग में हल्का पाद-चक्र रखने पर यह अपने धुरी पर नाचने लगता है। इससे यह सिद्ध होता है कि ये किरणे अत्यंत छोटे-छोटे द्रव्यकणों से बनी होती हैं।
(c) इन किरणों की प्रकृति विसर्ग नली में प्रयुक्त गैस की प्रकृति पर निर्भर करती है। विभिन्न गैसों के लिये आवेश (e) और द्रव्यमान (m) का अनुपात भिन्न-भिन्न होता है। विसर्ग नली में हाइड्रोजन गैस का प्रयोग करने पर इस अनुपात `(e//m)` का मान अधिकतम होता है। हाइड्रोजन से प्राप्त धन किरणें एक ही प्रकार के धनात्मक कणों की बनी होती हैं। इन्हीं कणों को प्रोटॉन कहते हैं।
`H overset(-e)to H^(+)` (प्रोटॉन)
(iv) समस्थानिक-एक ही तत्व के परमाणु जिनकी परमाणु संख्या समान किन्तु द्रव्यमान संख्या भिन्न-भिन्न होती हैं, समस्थानिक कहलाते हैं।
समस्थानिक के गुण- (a) किसी तत्व के सभी समस्थानिकों के परमाणुओं में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती हैं। अत: उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास भी सदृश होते हैं तथा संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या भी समान होती है। इसी कारण उनके रासायनिक गुण एक जैसे होते हैं।
(ii) किसी तत्व के समस्थानिकों के भौतिक गुण भिन्न-भिन्न होते हैं। इसका कारण यह है कि तत्व के समस्थानिकों के नाभिकों में न्यूट्रॉनों की संख्यायें भिन्न-भिन्न होती हैं जिससे किसी तत्व के समस्थानिकों के परमाणु द्रव्यमान, घनत्व तथा अन्य भौतिक गुणों में भिननता आ जाती है। अत: उपर्युक्त आविष्कारों द्वारा यह साबित होता है कि डाल्टन का परमाणु नियम अपर्याप्त है।
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