वायु प्रदूषण-प्रकृति में वायु अहम भूमिका निभाता है। वायु के बिना सजीवों के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है, वायु के मुख्य अवयव जैसे ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोक्साइड, हाइड्रोजन, जलवाष्प तथा कुछ निष्क्रिय गैसें न्यूयोन, हीलियम, ऑर्गन होते हैं। वायुमण्डल में पायी जानेवाली जैसे एक निश्चित मात्रा एवं अनुपात में होती हैं। इस मात्रा एवं अनुपात में वृद्धि या कमी होने से वायु प्रदूषण की समस्या उत्पन्न होती है। कई वर्षों से वायु की गुणवत्ता में कमी आयी है। वायु में हानिकारक तत्व मिल जाने से वायु प्रदूषण होता है। कल-कारखानों के चिमनी द्वारा निकलते धुएँ वायु में मिल जाते हैं जिससे वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ जाती है।
वायु के प्रदूषण होने के मुख्य कारणों में वाहनों से निकले धुएँ, उन धुओं में कार्बन मोनोक्साइड, अधजले हाइड्रोकार्बन, नाइट्रोजन के विभिन्न ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और सीसा मुक्त हैं जो वायु को प्रदूषित करते हैं।
वर्तमान समय में उद्योगों की बढ़ोतरी से उसकी चिमनियों से निकले जहरीले धुएँ (गैसें), थर्मल पावर स्टेशनों, तेल शोधक कारखानों, कोयला खदानों एवं पेट्रोलियम आदि के दहन के धुएँ से वायुमण्डल में पहुँचकर वायु को प्रदूषित कर देते हैं।
वायु प्रदूषण संसार के विकसित देशों के साथ-साथ अल्पविकसित देशों तथा विकासशील देशों के लिये खतरा बन चुका है, क्योंकि आज के औद्योगिक प्रधान समाज में वायु प्रदूषित ज्यादा हो रहा है जिससे जीवन खतरे में जाता है। वायु प्रदूषण जन-जीवन के लिये खतरनाक है, अतः हमलोगों को इसके प्रति सचेत रहना होगा।
जल प्रदूषण प्राकृतिक या मानवजनित कारणों से जल की गुणवत्ता में गिरावट को जल प्रदूषण कहा जाता है। आधुनिक समय में तकनीकी विकास के कारण जल का उपयोग सिंचाई, जल-विद्युत उत्पादन, मत्स्यपालन, जल-यातायात तथा उद्योग आदि के लिये किया जा रहा है, आज जल की खपत मानव की प्रगतिशीलता का द्योतक बन गया है। फलतः जल की माँग में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है, लेकिन साथ ही जल की गुणवत्ता में भारी गिरावट भी हो रही है। दिन-प्रतिदिन जल प्रदूषित होता जा रहा है। भारत में उपलब्ध कुल जल का लगभग 70% जल प्रदूषित है।
जल प्रदूषण के स्रोत या कारण को निम्न बिंदुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है -
(i) रिहायशी घरों से निकलनेवाले मल-जल में कई प्रकार के रोगाणु पनपते हैं, ऐसे मल-जल के जलस्रोतों में मिलने से जल प्रदूषित होता है।
(ii) कारखानों से निकलनेवाले ऐसे औद्योगिक बहिःस्राव जिनमें हानिकारक रसायन तथा जहरीली धातु होते हैं, के जलस्रोतों में मिलने से जल प्रदूषित होता है।
(iii) अस्पतालों से निकलनेवाले अपशिष्ट, शल्यक्रिया द्वारा निकाले गये बेकार अंग या सम्पूर्ण मृत शरीर जलस्रोत में मिलकर उसे प्रदूषित करते हैं।
(iv) रासायनिक खाद तथा कीटनाशक रसायन वर्षाजल के साथ खेतों से बहकर नदी, तालाब के जल में मिलकर उसे प्रदर्शित करते हैं। - वास्तव में जल प्रदूषण होने से पारिस्थितिक तंत्र असंतुलित हो जायेगा और जन-जीवन खतरे में पड़ जाएगा।
इसके अतिरिक्त प्रदूषण की समस्याओं में वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण एक महत्वपूर्ण चुनौती है जिसे हम सब को इस चुनौती का सामना सजग और बुद्धिमतापूर्ण रूप से करना होगा। ताकि वायु और जल प्रदूषण को कम-से-कम करके पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित किया जा सके।