जल के संरक्षण के बारे में सुझाव निम्नलिखित हैं (1) ऐसे पौधों और फसलों का चयन करें, जिन्हें कम जल की आवश्यकता हो। धान की फसल को उगाना इसलिए हितकर नहीं है। (2) बगीचों व सब्जियों की सुबह या सायंकाल के समय सिंचाई करो, क्योंकि इससे जल का वाष्पीकरण तो कम होगा और मिट्टी भी इसको आसानी से अवशोषित कर लेगी। (3) आवश्यकता से अधिक जल देना, फसलों व अन्य पौधों के लिए हानिकारक है। फव्वारा विधि इसलिए सिंचाई की उत्तम विधि है। (4) भवनों के अंदर रखे गमलों में जल की कम आवश्यकता होती है, जबकि बाहर खुले में रखे पौधे व गमले जल की अधिक माँग करते हैं। अतः घरों में गमलों में लगे पौधों को अधिक महत्त्व दिया जाना चाहिए। (5) नंगी पड़ी भूमि में जल शीघ्र वाष्पित हो जाता है। अतः जल की बचत करने के लिए भूमि को घास फूस से ढांपकर ही सिंचाई करो। गमलों में लगे पौधों की जड़ों को व मिट्टी को घास से ढांप देना उचित है। (6) वर्षा जल को एकत्रित कर उसका उपयोग करना लाभकर है। (7) दैनिक कार्यों, जैसे दांत ब्रुश करने, शेव करने या कुला करने में कम-से-कम जल इस्तेमाल करो। ऐसा करने से 3 गैलन प्रति मिनट की बचत हो सकती है। (8) फ्लश का इस्तेमाल करने के लिए, ऐसी फ्लश का चयन करो, जो एक बार में अधिक-से-अधिक 5-6 गैलन जल ही प्रयुक्त करे। (9) जल की पाइपों से कई बार रिसाव के कारण काफी जल व्यर्थ बह जाता है। रिसाव का पता लगते ही इसे बंद करने के शीघ्र कदम उठाए जाने चाहिएं। जल की टंकी, ढूंटी आदि से जल बूंद-बूंद कर टपकता रहता है, यह जल की बर्बादी है, इसकी बचत करो। (10) जल की फ्लश के बहाव की मात्रा कम करने के लिए फ्लश की टैंकी में जल की भरी बोतल रखने से जल की बचत हो सकती है। अतः जल बहुमूल्य प्राकृतिक संपदा है। इसकी बचत करना हमारा कर्त्तव्य है।
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